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रोडवेज का चक्का जाम, विभाग को 10 लाख की चपत
Updated Wed, 14 Jun 2017 01:07 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
निजी परमिटों का विरोध कर रही रोडवेज यूनियनों ने मंगलवार को झज्जर डिपो में चक्का जाम रखा। इसकी शुरूआत सुबह 4 बजे ही डिपो के गेट पर ताला लगाकर कर दी गई। डिपो में पूर्णतया चक्का जाम रहा, प्रशासन के द्वारा भी बस संचालन को लेकर कोई प्रयास नहीं किया गया। इसके चलते यात्रियों को बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ा। वहीं रोडवेज यूनियनों ने साफ कर दिया कि अब निजी परमिटों को लेकर वो कोई भी आश्वासन सुनने के मूड में नहीं हैं। हड़ताल के दौरान रोडवेज नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार ने 10 हजार बसें बेड़े में शामिल कर उसे मजबूत बनाना चाहिए। निजीकरण की राह पर चलने से महकमे व जनता दोनों का नुकसान हो रहा है। चक्का जाम का नेतृत्व अलग-अलग यूनियनों के नेता कर्मबीर चाहर, आजाद मलिक, विजय माजरा, राजेे, अशोक शर्मा, जगबीर सिंह ने किया।
झज्जर डिपो को 10 लाख का नुकसान
रोडवेज के झज्जर डिपो को चक्का जाम के कारण मंगलवार को दस लाख रुपये की चपत लगी। झज्जर डिपो की बसें हर दिन 55 हजार किलोमीटर का सफर तय कर 10 लाख रुपये की कमाई करती हैं, जोकि मंगलवार को ये सफर नहीं कर पाई। वहीं डिपो में इस समय 159 बसें हैं, जिनमें करीब 10 बसें चालकों के अभाव में हर समय खड़ी रहती हैं। इसके अलावा कुछ बसें मैंटीनेंस के चलते वर्कशॉप में ही खड़ी रहती हैं।
डिपो परिसर में दिनभर चला धरना
डिपो परिसर में दिनभर कर्मचारी यूनियनों का धरना चलता रहा। बंद व प्रदर्शन में कर्मशाला स्टाफ भी शामिल हुआ। कर्मशाला के कर्मचारी नारेबाजी करते हुए डिपो परिसर में पहुंचे, जहां पर उन्होंने बंद का समर्थन किया। रोडवेज कर्मचारियों ने दिनभर परिवहन विभाग के अधिकारियों व सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान कर्मचारी नेताओं ने सरकार व विभाग के आलाधिकारियों के खिलाफ यूनियनों को बार-बार गुमराह करने के आरोप भी लगाए।
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निजी बस संचालकों की रही चांदी
रोडवेज के चक्का जाम के चलते निजी बस संचालकों व अवैध वाहनों की खूब मौज रही। अवैध वाहनों व निजी बसों में मंगलवार को ये हाल था कि लोग इनकी छत पर भी सफर करने को मजबूर हो गए। रोडवेज के झज्जर डिपो की बसें हर दिन करीब 25 हजार लोगों को सफर करवाती हैं। वहीं झज्जर जिले में 67 निजी बसों का संचालन होता है, जिनके लिए इतने यात्रियों का सफर करवाना बड़ा मुश्किल रहा।
वर्जन
कर्मचारी यूनियनों के चक्का जाम के चलते मंगलवार को 10 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। विभागीय मंत्री व आलाधिकारियों के बीच बातचीत चल रही है, जिसमें कोई हल निकलने की उम्मीद हैं।
-राहुल जैन, जीएम रोडवेज झज्जर।
-----------------
चक्का जाम से थमे रोडवेज के पहिए, झज्जर डिपो को 10 लाख की चपत
-जिले में हर रोज होता है रोडवेज बसों का 55 हजार किलोमीटर का सफर
-निजी वाहन चालकों ने जमकर कूटी चांदी
फोटो संख्या-3 से 7
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झज्जर।
निजी परमिटों का विरोध कर रही रोडवेज यूनियनों ने मंगलवार को झज्जर डिपो में चक्का जाम रखा। इसकी शुरूआत सुबह 4 बजे ही डिपो के गेट पर ताला लगाकर कर दी गई। डिपो में पूर्णतया चक्का जाम रहा, प्रशासन के द्वारा भी बस संचालन को लेकर कोई प्रयास नहीं किया गया। इसके चलते यात्रियों को बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ा। वहीं रोडवेज यूनियनों ने साफ कर दिया कि अब निजी परमिटों को लेकर वो कोई भी आश्वासन सुनने के मूड में नहीं हैं। हड़ताल के दौरान रोडवेज नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार ने 10 हजार बसें बेड़े में शामिल कर उसे मजबूत बनाना चाहिए। निजीकरण की राह पर चलने से महकमे व जनता दोनों का नुकसान हो रहा है। चक्का जाम का नेतृत्व अलग-अलग यूनियनों के नेता कर्मबीर चाहर, आजाद मलिक, विजय माजरा, राजेे, अशोक शर्मा, जगबीर सिंह ने किया।
झज्जर डिपो को 10 लाख का नुकसान
रोडवेज के झज्जर डिपो को चक्का जाम के कारण मंगलवार को दस लाख रुपये की चपत लगी। झज्जर डिपो की बसें हर दिन 55 हजार किलोमीटर का सफर तय कर 10 लाख रुपये की कमाई करती हैं, जोकि मंगलवार को ये सफर नहीं कर पाई। वहीं डिपो में इस समय 159 बसें हैं, जिनमें करीब 10 बसें चालकों के अभाव में हर समय खड़ी रहती हैं। इसके अलावा कुछ बसें मैंटीनेंस के चलते वर्कशॉप में ही खड़ी रहती हैं।
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डिपो परिसर में दिनभर चला धरना
डिपो परिसर में दिनभर कर्मचारी यूनियनों का धरना चलता रहा। बंद व प्रदर्शन में कर्मशाला स्टाफ भी शामिल हुआ। कर्मशाला के कर्मचारी नारेबाजी करते हुए डिपो परिसर में पहुंचे, जहां पर उन्होंने बंद का समर्थन किया। रोडवेज कर्मचारियों ने दिनभर परिवहन विभाग के अधिकारियों व सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान कर्मचारी नेताओं ने सरकार व विभाग के आलाधिकारियों के खिलाफ यूनियनों को बार-बार गुमराह करने के आरोप भी लगाए।
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निजी बस संचालकों की रही चांदी
रोडवेज के चक्का जाम के चलते निजी बस संचालकों व अवैध वाहनों की खूब मौज रही। अवैध वाहनों व निजी बसों में मंगलवार को ये हाल था कि लोग इनकी छत पर भी सफर करने को मजबूर हो गए। रोडवेज के झज्जर डिपो की बसें हर दिन करीब 25 हजार लोगों को सफर करवाती हैं। वहीं झज्जर जिले में 67 निजी बसों का संचालन होता है, जिनके लिए इतने यात्रियों का सफर करवाना बड़ा मुश्किल रहा।
वर्जन
कर्मचारी यूनियनों के चक्का जाम के चलते मंगलवार को 10 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। विभागीय मंत्री व आलाधिकारियों के बीच बातचीत चल रही है, जिसमें कोई हल निकलने की उम्मीद हैं।
-राहुल जैन, जीएम रोडवेज झज्जर।
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चक्का जाम से थमे रोडवेज के पहिए, झज्जर डिपो को 10 लाख की चपत
-जिले में हर रोज होता है रोडवेज बसों का 55 हजार किलोमीटर का सफर
-निजी वाहन चालकों ने जमकर कूटी चांदी
फोटो संख्या-3 से 7