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इंजेक्शन की गुणवता बचाने के लिए मरीजों को स्वयं डोनेट करना पड़ा फ्रिज
Updated Fri, 30 Mar 2018 02:59 AM IST
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सूरत ए हाल
बदइंतजामी : मरीज के फ्रिज से काम चला रही ईएसआई डिस्पेंसरी
इंजेक्शन की गुणवत्ता बचाने के लिए मरीजों को स्वयं डोनेट करना पड़ा फ्रिज
संजय कुमार
रोहतक।
एक अस्पताल के लिए इससे ज्यादा शर्मनाक बात क्या होगी कि दवाओं को बचाने के लिए मरीज को खुद का फ्रिज रखना पड़े। जी हां! ये हाल है ईएसआई डिस्पेंसरी का। यहां महिला डॉक्टर की कमी तो है ही साथ ही दवा रखने के लिए नियमानुसार स्टोरेज तक नहीं है।
हीमोफीलिया रोग से ग्रस्त तीन मरीजों को अपने इंजेक्शनों को बचाने के लिए खुद पैसे जमा कर यहां के लिए एक फ्रिज खरीदना पड़ा है। इसी फ्रिज में इन मरीजों के इंजेक्शन सुरक्षित रखे जाते हैं। बाकी मरीजों का भगवान मालिक है।
डिस्पेंसरी में आने वाले मरीजों की दवा रखने के लिए स्टोर बनाया गया है, लेकिन इसके तापमान को नियंत्रित करने के लिए कोई इंतजाम नहीं है। यहां दवाएं, इंजेक्शन सामान्य तापमान में रखे रहते हैं। डिस्पेंसरी में हीमोफीलिया के तीन मरीजों का उपचार होता है। अधिकारी इनके लिए स्पेशल तीन से चार माह के इंजेक्शन एडवांस में मंगा कर रखते हैं। लेकिन इन इंजेक्शनों को रखने के लिए डिस्पेंसरी के पास सिर्फ एक छोटा सा फ्रिज।
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अपने इंजेक्शन को सुरक्षित न देख मजबूरी में तीनों मरीजों ने 4500 रुपये एकत्रित कर डिस्पेंसरी में अपना फ्रिज रखवाया। हीमोफीलिया एसोसिएशन के जिला प्रधान अजय शर्मा ने बताया कि डिस्पेंसरी में फ्रिज रखवाना उनकी मजबूरी हो गया था। क्योंकि जिला अस्पताल में कई बार इंजेक्शन नहीं मिल पाते।
तीन माह से इंजेक्शन ही नहीं
पीड़ित की मानें तो जिला अस्पतालों की स्थिति यह है कि तीन माह से इंजेक्शन नहीं मिल रहा है। जबकि रक्त बहने के दौरान हीमोफीलिया के मरीज को यदि इंजेक्शन न मिले तो उसकी जान को खतरा हो जाता है। इस संबंध में उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों से भी बात की है। उन्हें आश्वासन दिया है कि दो-चार दिन में इंजेक्शन जिला अस्पतालों में उपलब्ध होंगे। इस संबंध में बातचीत करने के लिए ईएसआई डिस्पेंसरी के प्रभारी डॉ. भामिक कादयान से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
बोले अधिकारी
दवा को एक निश्चित तापमान पर रखना जरूरी होता है। इसके लिए स्टोर में एसी होना जरूरी है। इसके अलावा कुछ इंजेक्शन को कम तापमान में रखना जरूरी होता है, इसके लिए स्टोर में फ्रिज भी जरूरी है। यदि ऐसा नहीं है तो दवा के साल्ट की गुणवत्ता में कमी आ जाती है। इससे मरीज को दवा का सही सॉल्ट नहीं मिल पाता और वह समय पर सही नहीं होगा। जांच के लिए ईएसआई डिस्पेंसरी की दवाओं के सैंपल लिये जाएंगे।
- मंदीप मान, जिला ड्रग कंट्रोलर
फोटो सहित एसएनजे 10, 10ए, 10बी, 10सी
ईएसआई अस्पताल की डिस्पेंसरी में रखा मरीज का फ्रिज।
ईएसआई अस्पताल के स्टोर में रखी खुली में दवाएं।
ईएसआई अस्पताल में रखा डिस्पेंसरी का फ्रिज।
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सूरत ए हाल
बदइंतजामी : मरीज के फ्रिज से काम चला रही ईएसआई डिस्पेंसरी
इंजेक्शन की गुणवत्ता बचाने के लिए मरीजों को स्वयं डोनेट करना पड़ा फ्रिज
संजय कुमार
रोहतक।
एक अस्पताल के लिए इससे ज्यादा शर्मनाक बात क्या होगी कि दवाओं को बचाने के लिए मरीज को खुद का फ्रिज रखना पड़े। जी हां! ये हाल है ईएसआई डिस्पेंसरी का। यहां महिला डॉक्टर की कमी तो है ही साथ ही दवा रखने के लिए नियमानुसार स्टोरेज तक नहीं है।
हीमोफीलिया रोग से ग्रस्त तीन मरीजों को अपने इंजेक्शनों को बचाने के लिए खुद पैसे जमा कर यहां के लिए एक फ्रिज खरीदना पड़ा है। इसी फ्रिज में इन मरीजों के इंजेक्शन सुरक्षित रखे जाते हैं। बाकी मरीजों का भगवान मालिक है।
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डिस्पेंसरी में आने वाले मरीजों की दवा रखने के लिए स्टोर बनाया गया है, लेकिन इसके तापमान को नियंत्रित करने के लिए कोई इंतजाम नहीं है। यहां दवाएं, इंजेक्शन सामान्य तापमान में रखे रहते हैं। डिस्पेंसरी में हीमोफीलिया के तीन मरीजों का उपचार होता है। अधिकारी इनके लिए स्पेशल तीन से चार माह के इंजेक्शन एडवांस में मंगा कर रखते हैं। लेकिन इन इंजेक्शनों को रखने के लिए डिस्पेंसरी के पास सिर्फ एक छोटा सा फ्रिज।
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अपने इंजेक्शन को सुरक्षित न देख मजबूरी में तीनों मरीजों ने 4500 रुपये एकत्रित कर डिस्पेंसरी में अपना फ्रिज रखवाया। हीमोफीलिया एसोसिएशन के जिला प्रधान अजय शर्मा ने बताया कि डिस्पेंसरी में फ्रिज रखवाना उनकी मजबूरी हो गया था। क्योंकि जिला अस्पताल में कई बार इंजेक्शन नहीं मिल पाते।
तीन माह से इंजेक्शन ही नहीं
पीड़ित की मानें तो जिला अस्पतालों की स्थिति यह है कि तीन माह से इंजेक्शन नहीं मिल रहा है। जबकि रक्त बहने के दौरान हीमोफीलिया के मरीज को यदि इंजेक्शन न मिले तो उसकी जान को खतरा हो जाता है। इस संबंध में उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों से भी बात की है। उन्हें आश्वासन दिया है कि दो-चार दिन में इंजेक्शन जिला अस्पतालों में उपलब्ध होंगे। इस संबंध में बातचीत करने के लिए ईएसआई डिस्पेंसरी के प्रभारी डॉ. भामिक कादयान से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
बोले अधिकारी
दवा को एक निश्चित तापमान पर रखना जरूरी होता है। इसके लिए स्टोर में एसी होना जरूरी है। इसके अलावा कुछ इंजेक्शन को कम तापमान में रखना जरूरी होता है, इसके लिए स्टोर में फ्रिज भी जरूरी है। यदि ऐसा नहीं है तो दवा के साल्ट की गुणवत्ता में कमी आ जाती है। इससे मरीज को दवा का सही सॉल्ट नहीं मिल पाता और वह समय पर सही नहीं होगा। जांच के लिए ईएसआई डिस्पेंसरी की दवाओं के सैंपल लिये जाएंगे।
- मंदीप मान, जिला ड्रग कंट्रोलर
फोटो सहित एसएनजे 10, 10ए, 10बी, 10सी
ईएसआई अस्पताल की डिस्पेंसरी में रखा मरीज का फ्रिज।
ईएसआई अस्पताल के स्टोर में रखी खुली में दवाएं।
ईएसआई अस्पताल में रखा डिस्पेंसरी का फ्रिज।