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तीन दिन की रणनीति से होगा चुनावी शंखनाद

Wed, 02 Aug 2017 02:42 AM IST
Updated Wed, 02 Aug 2017 02:42 AM IST
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तीन दिन की रणनीति से होगा चुनावी शंखनाद
तीन दिन की रणनीति से होगा चुनावी शंखनाद
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नितिन यादव
रोहतक।
आज से तीन दिन तक चलने वाला भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का दौरा प्रदेश में भाजपा की राजनीति के हिसाब से अहम होगा। अगले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में अभी समय है लेकिन अमित शाह के दौरे को चुनावी तैयारी की शुरूआत माना जा रहा है। प्रदेश में कांग्रेस के एकमात्र सांसद रोहतक से हैं और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा का गढ़ भी यही है। माना जा रहा है कि पूरे प्रदेश के साथ इस गढ़ को भेदने के टिप्स भी अमित शाह अपने नेताओं को देंगे। इतना ही नहीं पार्टी और सरकार के अंदर की कई चुनौतियों को निपटाकर पार्टी को पूरी तरह से चुनावी मोड में लाने की कवायद भी होगी।

प्रदेश की राजनैतिक राजधानी से बनेगा 2019 का प्लान
रोहतक में एक दिन के प्रवास को तीन दिन किए जाने से ही इस जिले की राजनैतिक अहमियत का अंदाज लगाया जा सकता है। कांग्रेस नेता और पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा का गृह जिला होने के साथ उनके बेटे यहां से सांसद भी हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में प्रदेश में भाजपा के शानदार प्रदर्शन के बाद भी रोहतक में कांग्रेस अपना वजूद बचाने में कामयाब रही थी। विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा रहा था। इसी गढ़ में अपना परचम लहराने की मंशा अब भाजपा नेताओं की है। जाट आरक्षण हिंसा के बाद से ध्रुवीकरण की प्रयोगशाला के हिसाब से भी यह सही क्षेत्र है। वैसे तो सभी नेता जाट और गैर जाट के मुद्दे से इंकार कर रहे हैं लेकिन यह चुनाव में अहम रोल अदा करेगा।
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जातिगत समीकरणों के हिसाब से होगा बूथ मैनेजमेंट
अमित शाह सामाजिक और जातिगत समीकरणों के हिसाब से बूथ का माइक्रो मैनेजमेंट करते हैं। हरियाणा में जाट आरक्षण हिंसा में जाटों की नाराजगी की चर्चा के बावजूद यूपी विधानसभा चुनावों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों के गढ़ में भाजपा को खूब वोट मिले थे। यूपी चुनावों में ही गैर यादव और गैर जाट की रणनीति से भी भाजपा को ओबीसी और दलित वर्ग में खूब सफलता मिली थी। सीटवार तैयारी का नतीजा यह रहा था कि कई सीटों पर यादवों और जाटों ने भी भाजपा के पक्ष में मतदान किया। यही रणनीति भाजपा हरियाणा में भी आने वाले समय में इस्तेमाल करेगी। भाजपा गैर जाट मतों को एकमुश्त अपने साथ चाहती है तो जाटों को साधने का लगातार प्रयास किया गया है। शहर में लगने वाले होर्डिंग में मुख्यमंत्री खट्टर के अलावा सबसे प्रमुखता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला को ही दी जा रही है। इसके अलावा जाट आरक्षण हिंसा के पीड़ितों को नौकरी देने काम भी किया गया है।
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पार्टी की अंदरूनी राजनीति निपटाने पर भी रहेगा जोर
प्रदेश में खट्टर के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही कई बार पार्टी और सरकार में आवाजें उठती रही हैं। प्रदेश अध्यक्ष पद पर बदलाव को लेकर कई बार चर्चाएं हुईं तो गुरुग्राम के विधायक उमेश अग्रवाल ने भी कई मामलों को उठाया है। जिलेवार भी पार्टी के दिग्गजों में समय-समय पर दूरियां नजर आती रही हैं। ऐसे में चुनावी रणनीति से दूसरों का किला भेदने से पहले भाजपा को अपना घर मजबूत करना होगा। कुरुक्षेत्र के सांसद राजकुमार सैनी लगातार पार्टी और नेताओं पर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में हर फ्रंट को मजबूत करके आने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारियों की मजबूत पटकथा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लिखेंगे।
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