फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   24 घंटे में सौ किलोमीटर की बाध्यता व्यापारियों की मुसीबत, जीएसटी में सारे जवाब नहीं

24 घंटे में सौ किलोमीटर की बाध्यता व्यापारियों की मुसीबत, जीएसटी में सारे जवाब नहीं

Fri, 12 Jan 2018 02:49 AM IST
Updated Fri, 12 Jan 2018 02:49 AM IST
विज्ञापन
24 घंटे में सौ किलोमीटर की बाध्यता व्यापारियों की मुसीबत, जीएसटी में सारे जवाब नहीं
व्यापारियों के लिए मुसीबत बना ई-वे बिल, व्यवहारिक दिक्कतें जीएसटी में शामिल नहीं, अधिकारियों के पास जवाब नहीं
विज्ञापन

- 24 घंटे में सौ किलोमीटर की बाध्यता व्यापारियों के परेशानी का सबब, ई-वे बिल के प्रति जागरूक करने के लिए जीएसटी विभाग ने की कांफ्रेंस
- अधिकारियों ने कहा कि व्यापारी दें सुझाव, ई-वे बिल में आ रही दिक्कतों को दूर करने का दिया आश्वासन
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। एक फरवरी से पूरे देश में ई-वे बिल लागू किया जा रहा है, लेकिन 24 घंटे में सौ किलोमीटर की दूरी तय करने की बाध्यता व्यापारियोें और ट्रांसपोर्टरों के लिए मुसीबत है। इस दूरी को तय करने में लगने वाले समय की कई व्यवहारिक दिक्कतें जीएसटी में शामिल नहीं हैं और अधिकारियों के पास भी इसका जवाब नहीं है। हालांकि जीएसटी विभाग के अधिकारी व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होने देने का आश्वासन दे रहे है, उनसे सुझाव भी मांग रहे है, जिससे ई-वे बिल को सफलतापूर्वक लागू किया जा सके। बृहस्पतिवार को व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों को ई-वे बिल के प्रति जागरूक करने के लिए जीएसटी विभाग ने होटल रिवोली में एक कांफ्रेंस की, जहां यह बात निकलकर आई।
ई-वे बिल के बगैर व्यापारी और ट्रांसपोर्टर अपने माल को 10 किलोमीटर से अधिक दूर नहीं ले जा सकेंगे। व्यापारियों को ई-वे बिल जनरेट करने में भी कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन ई-वे बिल जनरेट करने के साथ ही सौ किलोमीटर की दूरी 24 घंटे के अंदर तय करने की बाध्यता इनके लिए बड़ी मुसीबत है। व्यापारियों ने उदाहरण के तौर पर पूछा कि 50 हजार रुपये से कम कीमत का माल रोहतक से पानीपत होते हुए आगे ले जाना है, लेकिन पानीपत से आगे माल ले जाने वाला एक ही ट्रांसपोर्टर है। माल की कीमत कम होने की वजह से ट्रांसपोर्टर कई व्यापारियों या एक ही व्यापारी का अन्य माल भी इकठ्ठा करेगा, जिसके बाद आगे जाएगा। समस्या यह है कि विभिन्न माल की इनवाइस डेट अलग है और ई-वे बिल की तारीख भी अलग है, ऐसे में 24 घंटे में सौ किलोमीटर की दूरी तय होना मुमकिन नहीं है। इसी के साथ अगर कोई कंपनी अलग-अलग माल आर्डर करती है और सभी का अलग-अलग बिल मांगती है। ई-वे बिल भी एक ही डेट पर जनरेट किए गए है। एक बिल अगर 50 हजार रुपये से कम का भी है तो सारे माल की कीमत लाखों में होगी। ऐसे में जांच के दौरान अधिकारी को कैसे समझाएंगे कि कंपनी के मांग के अनुसार अलग-अलग बिल काटा गया है, न कि ई-वे बिल से जनरेट करने से बचने के लिए, क्योंकि 50 हजार रुपये से कम कीमत के माल के लिए ई-वे बिल की आवश्यकता नहीं है। इसका भी जीएसटी में सही जवाब नहीं है। व्यापारियों का कहना है कि यह एक लूपहोल है, जिसका फायदा उठाकर उन्हें परेशान किया जा सकता है।
विज्ञापन


माध्यम बदलने पर अपडेट करना होगा ई-वे बिल
कांफ्रेंस में जीएसटी विभाग के उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त (बिक्री कर) सुरेश कुमार बोडवाल और संयुक्त आबकारी व कराधान आयुक्त (रेंज) रोहतक कृष्ण कुमार ने व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों की ज्यादातर शंकाओं को दूर किया। उन्होंने बताया कि ई-वे बिल जरूरी है। यह इलेक्ट्रानिक डॉक्युमेंट है, जिसे रखना जरूरी है। इसका मकसद माल की मोबिलिटी को सुनिश्चित करने के साथ ही टैक्स चोरी को रोकना है। उन्होंने बताया कि एक ही माल को ट्रांसपोर्ट के कई माध्यमों से ले जाने पर हर बार माध्यम बदलने पर ई-वे बिल को अपडेट करना होगा। उन्होंने बताया कि ई-वे बिल इनवॉयस के आधार पर बनेगा, ऐसे में ट्रक में अलग-अलग कंपनियों का लाखों का माल है तो पूरे ट्रक पर टैक्स नहीं लगेगा। उन्होंने व्यापारियों का कहा कि वह अपने सुझाव दें, जिस पर विचार कर दिक्कतों को दूर किया जाएगा। इस मौके पर जीएसटी डिपार्टमेंट की ओर से एक्साइज एवं टैक्सेशन ऑफिसर रामेश्वर दहिया, शैलेंद्र कौशिक और जिला कर निरीक्षक सुलक्षना मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed