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इरादों में जीत की गूंज से मिलता है मुकाम.
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Fri, 20 May 2016 12:51 AM IST
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बारहवीं में अव्वल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जीत की खातिर बस जुनून चाहिये, जिसमें उबाल हो ऐसा खून चाहिये, ये आसमां बी जाएगा जमीन पर, बस इरादों में जीत की गूंज चाहिये....ये विचार हरियाणा विद्यालय बोर्ड परीक्षा में 483 अंक हासिल कर प्रदेश में 5वां स्थान हासिल करने वाले कमलकांत ने कहे। वे ज्ञानदीप विद्या मंदिर में प्रात:काल सभा के दौरान अपने साथी छात्रों को पढ़ाई के अनुभव साझा कर रहे थे।
कमलकांत ने विद्यार्थियों को बेहतर ढंग से पढ़ाई करने के टिप्स भी दिये। स्कूल में विद्यालय प्राचार्य नलिनी प्रकाश व संचालिका शशिबाला ने होनहार छात्र कमलकांत को 21 हजार रुपये देकर पुरस्कृत किया। इसके अलावा 89 फीसदी अंकों के साथ उत्तीर्ण होने वाली छात्रा कविता व छात्रा निशा (85फीसदी) को भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। कमलकांत ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और अध्यापकों को दिया है।
बिना ट्यूशन के हासिल किया पांचवा स्थान
प्रदेश में चौथा स्थान हासिल करने वाली हेमलता की तरह ही कमल कांत के पिता जयपाल भी अध्यापक हैं। जयपाल बताते हैं कि उसके बेटे ने महज घर और स्कूल की पढ़ाई के बल पर प्रदेश में पांचवां स्थान हासिल किया है। न कभी बेटे ने ट्यूशन के लिए कहा और न ही स्कूल ने कोचिंग के लिए जोर दिया। घर पर मां की देखरेख और स्कूल में अध्यापकों की मेहनत का ही फल है उसने 500 में से 483 अंक हासिल कर जिले भर का नाम प्रदेश में रोशन किया है।
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इंजीनियर बनना है उद्देश्य
जयपाल बताते हैं कि बचपन से मेधावी बेटे कमलकांत का उद्देश्य भविष्य में इंजीनियर बनना है। इसके लिए वह तैयारी भी कर रहा है। उसने बताया कि वह सुबह जल्दी उठकर पढ़ता है। इसके अलावा वह अलग-अलग शिफ्ट में पढ़ना ज्यादा पसंद करता है।
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कमलकांत ने विद्यार्थियों को बेहतर ढंग से पढ़ाई करने के टिप्स भी दिये। स्कूल में विद्यालय प्राचार्य नलिनी प्रकाश व संचालिका शशिबाला ने होनहार छात्र कमलकांत को 21 हजार रुपये देकर पुरस्कृत किया। इसके अलावा 89 फीसदी अंकों के साथ उत्तीर्ण होने वाली छात्रा कविता व छात्रा निशा (85फीसदी) को भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। कमलकांत ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और अध्यापकों को दिया है।
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बिना ट्यूशन के हासिल किया पांचवा स्थान
प्रदेश में चौथा स्थान हासिल करने वाली हेमलता की तरह ही कमल कांत के पिता जयपाल भी अध्यापक हैं। जयपाल बताते हैं कि उसके बेटे ने महज घर और स्कूल की पढ़ाई के बल पर प्रदेश में पांचवां स्थान हासिल किया है। न कभी बेटे ने ट्यूशन के लिए कहा और न ही स्कूल ने कोचिंग के लिए जोर दिया। घर पर मां की देखरेख और स्कूल में अध्यापकों की मेहनत का ही फल है उसने 500 में से 483 अंक हासिल कर जिले भर का नाम प्रदेश में रोशन किया है।
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इंजीनियर बनना है उद्देश्य
जयपाल बताते हैं कि बचपन से मेधावी बेटे कमलकांत का उद्देश्य भविष्य में इंजीनियर बनना है। इसके लिए वह तैयारी भी कर रहा है। उसने बताया कि वह सुबह जल्दी उठकर पढ़ता है। इसके अलावा वह अलग-अलग शिफ्ट में पढ़ना ज्यादा पसंद करता है।