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पूर्व मंत्री के बयान पर ग्रामीणों ने रोष जताया
अमर उजाला ब्यूरो/रेवाड़ी
Updated Fri, 01 Jan 2016 12:46 AM IST
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कांग्रेसी नेता एवं पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव की ओर से सूमा गांव में जमीन बांटने के दिए बयान पर गांव के लोग उनके विरोध में आ गए हैं।
ग्रामीणों ने बृहस्पतिवार को गांव में पंचायत कर मांग उठाई कि पूर्व मंत्री अपने बयान में खेद जताए। वर्ना महापंचायत कर आंदोलन की रूपरेखा बनाई जाएगी।
पंचायत में ग्रामीणों ने जमीन खरीद करने की रजिस्ट्रियां भी दिखाई। इधर, कैप्टन अजय ने कहा कि उन्होंने यह नहीं कहा कि जमीन बांटी बल्कि यह कहा था कि उस वक्त उनकी जमीन सरप्लस हुई जो उनके काश्तकारों को मामूली रेट पर मिली। ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर शनि मंदिर में पंचायत कर रोष जताया।
ग्रामीणों ने कहा कि कैप्टन साहब बताएं कौनसी जमीन किस-किस को दान में दी है। उन्होंने कहा कि गांव में उनके बुजुर्गों ने 50-60 साल पहले आठ सौ एकड़ जमीन खरीदी थी।
इसमें से 50 एकड़ के लगभग जमीन सरप्लस में चली गई जिसे अलॉट होने के बाद वे कोर्ट से केस जीत चुके हैं लेकिन राजनीति प्रभाव से कैप्टन ने आज तक अलॉटियों का इंतकाल नहीं चढने दिया। पंचायत की अध्यक्षता कर रहे गांव के अमर सिंह दहिया ने कहा कि कैप्टन अजय गांव के लिए कहे शब्दों को वापस लें और सार्वजनिक रूप से माफी मांगे, अन्यथा वे उनके खिलाफ महापंचायत करने को बाध्य होंगे। उनका कहना था कि गांव को एक पूर्व मंत्री ने भिखारी बना दिया है। गांव में यह भी मामला सामने आया कि इनके पिता ने सन साठ से पहले मात्र छह कनाल जमीन गांव में पीने के पानी के लिए कुआं बनवाने के लिए दी, जिस पर गांव ने कुआं और खेल कोठा बनवाया और उसे भी अपने कब्जे में लेकर उस पर पोली हाउस बना लिया।
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कोर्ट केस जीत कर बनवाई रजिस्ट्री
ग्रामीण प्रभाती लाल, सुरेश कुमार, बीर सिंह आदि ने कहा कि बुजुर्गों ने पैसा देकर जमीन की रजिस्ट्री कराई है। किसी ने न तो दान में दी है और न ही बांटी है। ऐसे में पूर्व मंत्री को अपने बयान वापस लेना चाहिए। लगभग दो घंटा चली पंचायत में आखिर यह निर्णय लिया गया कि पूर्व मंत्री अपने बयानों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगे अन्यथा इलाके कि पंचायत बुला कर आगामी कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा। पंचायत में पंचायत में कृष्ण कुमार, छोटूराम, रोशन लाल, बिजेपाल शर्मा ,शिवचरण शर्मा, महेंद्र, तुलसीराम, राजमल, जयसिंह ने भी अपने विचार रखे।
जमीन सरप्लस कराई तब सस्ती मिली जमीन
पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव का कहना है कि उनकी करीब 1111 एकड़ जमीन थी। 1972 में आए नए कानून के अनुसार 54 एकड़ से ज्यादा जिसके पास थी, उसे सरप्लस किया जाना था। ऐसे में उनकी 800 एकड़ जमीन सरप्लस हुई, जिसका लगभग प्रति एकड़ 100 रुपये मिला और इसी राशि पर सरकार ने ग्रामीणों को जमीन दी, जो उनकी जमीन पर काश्त कर रहे थे। क्योंकि गिरदावरी उनके नाम ही थी।
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को उनका धन्यवाद करना चाहिए। क्योंकि उनकी भलाई के लिए उनकी पिता राव अभय सिंह ने जमीन को सरप्लस कराया गया। ताकि काश्तकारों को जमीन मिल सके। जमीन सरप्लस होने पर उसका ट्रस्ट नहीं बनवाया। जिस प्रकार से रामपुरा में भगवती आश्रम के नाम पर ट्रस्ट बना और यहां किसी को जमीन नहीं मिली। उन्होंने कहा कि उन्होंने यह बयान दिया था कि गांव सूमा उनका पैतृक गांव है और वहां सभी बिरादरियों के पास जमीन है। क्योंकि वहां उनकी जमीन सरप्लस हुई तो काश्तकारों को मामूली रेट पर मिली। जबकि उस वक्त जमीन के रेट प्रति एकड़ करीब 20 हजार रुपये थे।
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ग्रामीणों ने बृहस्पतिवार को गांव में पंचायत कर मांग उठाई कि पूर्व मंत्री अपने बयान में खेद जताए। वर्ना महापंचायत कर आंदोलन की रूपरेखा बनाई जाएगी।
पंचायत में ग्रामीणों ने जमीन खरीद करने की रजिस्ट्रियां भी दिखाई। इधर, कैप्टन अजय ने कहा कि उन्होंने यह नहीं कहा कि जमीन बांटी बल्कि यह कहा था कि उस वक्त उनकी जमीन सरप्लस हुई जो उनके काश्तकारों को मामूली रेट पर मिली। ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर शनि मंदिर में पंचायत कर रोष जताया।
ग्रामीणों ने कहा कि कैप्टन साहब बताएं कौनसी जमीन किस-किस को दान में दी है। उन्होंने कहा कि गांव में उनके बुजुर्गों ने 50-60 साल पहले आठ सौ एकड़ जमीन खरीदी थी।
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इसमें से 50 एकड़ के लगभग जमीन सरप्लस में चली गई जिसे अलॉट होने के बाद वे कोर्ट से केस जीत चुके हैं लेकिन राजनीति प्रभाव से कैप्टन ने आज तक अलॉटियों का इंतकाल नहीं चढने दिया। पंचायत की अध्यक्षता कर रहे गांव के अमर सिंह दहिया ने कहा कि कैप्टन अजय गांव के लिए कहे शब्दों को वापस लें और सार्वजनिक रूप से माफी मांगे, अन्यथा वे उनके खिलाफ महापंचायत करने को बाध्य होंगे। उनका कहना था कि गांव को एक पूर्व मंत्री ने भिखारी बना दिया है। गांव में यह भी मामला सामने आया कि इनके पिता ने सन साठ से पहले मात्र छह कनाल जमीन गांव में पीने के पानी के लिए कुआं बनवाने के लिए दी, जिस पर गांव ने कुआं और खेल कोठा बनवाया और उसे भी अपने कब्जे में लेकर उस पर पोली हाउस बना लिया।
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कोर्ट केस जीत कर बनवाई रजिस्ट्री
ग्रामीण प्रभाती लाल, सुरेश कुमार, बीर सिंह आदि ने कहा कि बुजुर्गों ने पैसा देकर जमीन की रजिस्ट्री कराई है। किसी ने न तो दान में दी है और न ही बांटी है। ऐसे में पूर्व मंत्री को अपने बयान वापस लेना चाहिए। लगभग दो घंटा चली पंचायत में आखिर यह निर्णय लिया गया कि पूर्व मंत्री अपने बयानों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगे अन्यथा इलाके कि पंचायत बुला कर आगामी कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा। पंचायत में पंचायत में कृष्ण कुमार, छोटूराम, रोशन लाल, बिजेपाल शर्मा ,शिवचरण शर्मा, महेंद्र, तुलसीराम, राजमल, जयसिंह ने भी अपने विचार रखे।
जमीन सरप्लस कराई तब सस्ती मिली जमीन
पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव का कहना है कि उनकी करीब 1111 एकड़ जमीन थी। 1972 में आए नए कानून के अनुसार 54 एकड़ से ज्यादा जिसके पास थी, उसे सरप्लस किया जाना था। ऐसे में उनकी 800 एकड़ जमीन सरप्लस हुई, जिसका लगभग प्रति एकड़ 100 रुपये मिला और इसी राशि पर सरकार ने ग्रामीणों को जमीन दी, जो उनकी जमीन पर काश्त कर रहे थे। क्योंकि गिरदावरी उनके नाम ही थी।
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को उनका धन्यवाद करना चाहिए। क्योंकि उनकी भलाई के लिए उनकी पिता राव अभय सिंह ने जमीन को सरप्लस कराया गया। ताकि काश्तकारों को जमीन मिल सके। जमीन सरप्लस होने पर उसका ट्रस्ट नहीं बनवाया। जिस प्रकार से रामपुरा में भगवती आश्रम के नाम पर ट्रस्ट बना और यहां किसी को जमीन नहीं मिली। उन्होंने कहा कि उन्होंने यह बयान दिया था कि गांव सूमा उनका पैतृक गांव है और वहां सभी बिरादरियों के पास जमीन है। क्योंकि वहां उनकी जमीन सरप्लस हुई तो काश्तकारों को मामूली रेट पर मिली। जबकि उस वक्त जमीन के रेट प्रति एकड़ करीब 20 हजार रुपये थे।