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Rewari News: डेंगू के दो और केस मिले, 23 पहुंची मरीजों की संख्या
Mon, 09 Sep 2024 02:10 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 09 Sep 2024 02:10 AM IST
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फोटो: 3रेवाड़ी। शहर में एक स्थान पर कूलर में जमा पानी में लार्वा की जांच करते कर्मचारी। स्रोत
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिले में तीन दिन में डेंगू के पांच नए मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही डेंगू के मरीजों की संख्या अब 23 हो गई है। जलभराव वाले स्थानों पर मच्छर पनपने से डेंगू के मरीज मिलने लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सर्वे के तहत कई घरों में हौद के पानी में मच्छरों के लार्वे मिले हैं। ऐसे 2200 से अधिक लोगों को नोटिस दिया जा चुका है।
स्वास्थ्य विभाग रोकथाम के प्रयास तो कर रहा है लेकिन वह पर्याप्त नहीं हैं। अब भी प्रतिदिन सैंपलिंग 20 से 40 के बीच हो रही है। पिछले वर्ष इस समय सैंपलों की संख्या 90 तक पहुंच गई थी। ऐसे में अगर सैंपलिंग बढ़ती है तो केस भी बढ़ेंगे। डेंगू की एलाइजा जांच केवल सिविल अस्पताल में ही हो रही है। डेंगू से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से सिविल अस्पताल के अलावा कोसली सब डिवीजनल सामान्य अस्पताल, बावल सीएचसी को मिलाकर 33 बेड लगाए हैं। हांलाकि, अभी राहत है कि मरीजों को आसानी से बेड मिल रहे हैं। जिस तरह डेंगू फैल रहा है, आने वाले दिनों में समस्या बढ़ सकती है। अस्पतालों में बेड कम पड़ सकते हैं। अभी जो पीड़ित आ रहे हैं, उनमें प्लेटलेट्स ठीक मिल रही है। सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक में डिमांड अनुसार प्लेटलेट्स तैयार की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने डेंगू और मलेरिया के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने और बरसात के मौसम में सावधानी बरतने की सलाह दी है। मलेरिया के लक्षण मच्छरों के काटने के 6 से 8 दिन बाद शुरू होते हैं। इसमें ठंड लगकर बुखार का आना और बुखार के ठीक होने पर पसीना आना, थकान, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, पेट की परेशानी, उल्टियां होना, बेहोशी आना, एनीमिया, त्वचा की पीली रंग की विकृति आदि लक्षण महसूस हो तो जांच कराना बेहतर है।
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2200 लोगों को थमाए नोटिस
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिलाभर में टीम बनाई गई है। टीम घर-घर जाकर कूलर व बाहर होदी में भरे पानी में मच्छरों के लार्वा की जांच कर रही है। जहां-जहां मच्छरों के लार्वा मिल रहे हैं वहां पर अभी तक 2200 लोगों को नोटिस दिया जा चुका है। जिन घरों या अन्य जगह पर दो-तीन बार जांच की गई और चेतावनी के बाद भी लार्वा मिले तो वहां चालान काटा जा सकता है। पिछले वर्ष 2023 में 6 लोगों के चालान काट गए थे। इसकी वजह थी कि सेक्टर जैसे पॉश इलाकों में मच्छरों के लार्वा मिले थे। चेतावनी के बाद भी लोगों की तरफ से लापरवाही बरती गई थी।
डेंगू व मलेरिया के छह साल के आंकड़े:
जिले में वर्ष 2018 में डेंगू के 82, 2019 में 27, 2020 में 39 व वर्ष 2021 में 306, 2022 में 324, 2023 में 406 व इस वर्ष 23 मरीज सामने आ चुके हैं। इसी तरह मलेरिया के वर्ष 2018 में 13, वर्ष 2019 में 8, वर्ष 2020 में 2, वर्ष 2021 में 1, 2022 में 3 और 2023 में 9 व इस वर्ष 2 मामले सामने आ चुके हैं।
वर्जन:
स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीमें जिले के विभिन्न गांवों में जाकर लोगों जागरूक कर रही है, जिससे कि लोग घरों में पानी को एकत्रित न होने दें। घरों में लार्वा मिलने पर अभी तक 2200 लोगों को नोटिस थमाया जा चुका है। लोग घर से बाहर निकले तो पूरी बांह के कपड़े पहन कर निकलें।
- डॉ. अमित यादव, नोडल अधिकारी, डेंगू एवं मलेरिया
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रेवाड़ी। जिले में तीन दिन में डेंगू के पांच नए मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही डेंगू के मरीजों की संख्या अब 23 हो गई है। जलभराव वाले स्थानों पर मच्छर पनपने से डेंगू के मरीज मिलने लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सर्वे के तहत कई घरों में हौद के पानी में मच्छरों के लार्वे मिले हैं। ऐसे 2200 से अधिक लोगों को नोटिस दिया जा चुका है।
स्वास्थ्य विभाग रोकथाम के प्रयास तो कर रहा है लेकिन वह पर्याप्त नहीं हैं। अब भी प्रतिदिन सैंपलिंग 20 से 40 के बीच हो रही है। पिछले वर्ष इस समय सैंपलों की संख्या 90 तक पहुंच गई थी। ऐसे में अगर सैंपलिंग बढ़ती है तो केस भी बढ़ेंगे। डेंगू की एलाइजा जांच केवल सिविल अस्पताल में ही हो रही है। डेंगू से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से सिविल अस्पताल के अलावा कोसली सब डिवीजनल सामान्य अस्पताल, बावल सीएचसी को मिलाकर 33 बेड लगाए हैं। हांलाकि, अभी राहत है कि मरीजों को आसानी से बेड मिल रहे हैं। जिस तरह डेंगू फैल रहा है, आने वाले दिनों में समस्या बढ़ सकती है। अस्पतालों में बेड कम पड़ सकते हैं। अभी जो पीड़ित आ रहे हैं, उनमें प्लेटलेट्स ठीक मिल रही है। सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक में डिमांड अनुसार प्लेटलेट्स तैयार की जा रही है।
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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने डेंगू और मलेरिया के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने और बरसात के मौसम में सावधानी बरतने की सलाह दी है। मलेरिया के लक्षण मच्छरों के काटने के 6 से 8 दिन बाद शुरू होते हैं। इसमें ठंड लगकर बुखार का आना और बुखार के ठीक होने पर पसीना आना, थकान, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, पेट की परेशानी, उल्टियां होना, बेहोशी आना, एनीमिया, त्वचा की पीली रंग की विकृति आदि लक्षण महसूस हो तो जांच कराना बेहतर है।
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2200 लोगों को थमाए नोटिस
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिलाभर में टीम बनाई गई है। टीम घर-घर जाकर कूलर व बाहर होदी में भरे पानी में मच्छरों के लार्वा की जांच कर रही है। जहां-जहां मच्छरों के लार्वा मिल रहे हैं वहां पर अभी तक 2200 लोगों को नोटिस दिया जा चुका है। जिन घरों या अन्य जगह पर दो-तीन बार जांच की गई और चेतावनी के बाद भी लार्वा मिले तो वहां चालान काटा जा सकता है। पिछले वर्ष 2023 में 6 लोगों के चालान काट गए थे। इसकी वजह थी कि सेक्टर जैसे पॉश इलाकों में मच्छरों के लार्वा मिले थे। चेतावनी के बाद भी लोगों की तरफ से लापरवाही बरती गई थी।
डेंगू व मलेरिया के छह साल के आंकड़े:
जिले में वर्ष 2018 में डेंगू के 82, 2019 में 27, 2020 में 39 व वर्ष 2021 में 306, 2022 में 324, 2023 में 406 व इस वर्ष 23 मरीज सामने आ चुके हैं। इसी तरह मलेरिया के वर्ष 2018 में 13, वर्ष 2019 में 8, वर्ष 2020 में 2, वर्ष 2021 में 1, 2022 में 3 और 2023 में 9 व इस वर्ष 2 मामले सामने आ चुके हैं।
वर्जन:
स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीमें जिले के विभिन्न गांवों में जाकर लोगों जागरूक कर रही है, जिससे कि लोग घरों में पानी को एकत्रित न होने दें। घरों में लार्वा मिलने पर अभी तक 2200 लोगों को नोटिस थमाया जा चुका है। लोग घर से बाहर निकले तो पूरी बांह के कपड़े पहन कर निकलें।
- डॉ. अमित यादव, नोडल अधिकारी, डेंगू एवं मलेरिया