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बायो टॉयलेट से मिलेगी गंदगी से निजात.

Mon, 29 Aug 2016 12:51 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला
ब्यूरो /अमर उजाला Updated Mon, 29 Aug 2016 12:51 AM IST
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ट्रेनों में लगेंगे जैविक टॉयलेट - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
स्वच्छ भारत कार्यक्रम के तहत रेल डिब्बों में बायो टॉयलेट लगाए जा रहे हैं। रेलवे अधिकारियों की माने तो वर्ष 2019 तक रेलवे के 55 हजार रेल डिब्बों में जैविक शौचालय लग चुके होंगे। बायो टॉयलेट लगने से रेल पटरियों पर गंदगी व अस्वच्छता की समस्या पूर्ण रूप से खत्म हो जाएगी।
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उत्तर पश्चिम रेलवे के अंतर्गत आने वाली ट्रेनों के 500 से अधिक डिब्बों में जैविक शौचालय लगाए जा चुके हैं। वहीं रेवाड़ी जंक्शन से गुजरने वाली कई ट्रेनों में बायो टॉयलेट लगे हुए हैं। हालांकि सभी रेलगाड़ियाें में जैविक शौचालय नहीं होने सेे पटरियों पर पड़े मानव अपशिष्ट व गंदगी से स्टेशन को निजात नहीं मिली है, लेकिन आने वाले कुछ समय में स्वास्थ्य व पर्यावरण की दृष्टि से रेलवे यात्रियों को एक बेहतर व खुशनुमा वातावरण जरूर मिलेगा।
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स्टेशनों पर नहीं फैलेगी बदबू
रेलवे स्टेशनों पर अपशिष्ट व अन्य गंदगी से पटरियों पर बदबूदार व अस्वच्छ माहौल रहता है। वहीं बीमारियां भी फैलने का खतरा रहता है। दूसरी प्लेटफॉर्म पर बिकने वाली खाद्य सामग्री भी गंदगी से पनपे मक्खी-मच्छरों से दूषित हो जाती है। कुल मिलाकर एक रेल यात्री के स्टेशन पहुंचते ही स्वास्थ्य खराब होने की पूरी संभावनाएं बढ़ जाती हैं। अब सभी ट्रेनों में बॉयो टॉयलेट्स लगने के बाद जहां पटरियों पर फैले मानव अपशिष्ट की समस्या का समाधान होगा, वहीं सफाई कर्मियों को भी सफाई के लिए अधिक मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी।
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ऐसे काम करता है बायो टॉयलेट
सामान्य रूप से ट्रेनों में लगे शौचालय से अपशिष्ट व गंदगी पटरियों पर ही छोड़ी जाती है। लेकिन बॉयो टॉयलेट लगने के बाद मानव अपशिष्ट पटरियों पर न गिरकर एक टैंक में जमा हो जाता है। टैंक में लगी मशीन व केमिकल के माध्यम से जमा वेस्ट तरल रूप ले लेता है। वहीं सॉलिड वेस्ट से तरल घोल बन जाने के बाद इसे स्टेशन से दूर वाली जगह पर शौचालय से बाहर छोड़ दिया जाता है। हालांकि यह वेस्ट गिरता पटरियों पर ही है, लेकिन अच्छी बात यह है कि यह तरल वेस्ट न ही बदबू फैलाता है और ना ही इससे पर्यावरण को कोई नुकसान होता है तथा बीमारी फैलने का भी खतरा नहीं रहता।

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वर्जन:
रेल गाड़ियों में बॉयो टॉयलेट लगने से हर दिन रेलवे स्टेशनों पर स्वच्छता के ग्राफ में बढ़ोत्तरी ही हो रही है। रेवाड़ी जंक्शन पर पिछले एक साल में सफाई व्यवस्था काफी बेहतर हुई है। हमारे सफाई कर्मचारी दिनभर पटरियों की साफ-सफाई में लगे रहते हैं, वहीं सभी ट्रेनों में जैविक टॉयलेट विकसित होने के बाद पटरियों पर गंदगी की समस्या जड़ से समाप्त हो जाएगी।
प्रवेश कुमार, मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक, रेलवे जंक्शन रेवाड़ी
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