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Rewari News: राजस्थान, मेवात से आए 100 किलो पनीर के सैंपल लिए
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रेवाड़ी। जिला खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग का मिलावट खोरों के खिलाफ लगातार अभियान जारी है। पिछले दो माह में टीम की ओर से दूध डेयरियों से पनीर के लिए गए ज्यादातर सेंपल फेल पाए गए हैं। इसी क्रम में टीम ने कोसली में गुड़ियानी रोड पर एक दूध डेयरी पर कार्रवाई की है। यहां टीम को बड़ी मात्रा में पनीर मिला है। टीम ने पनीर व मैदा का सैंपल लेकर लैब में भेज दिया है। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी के अनुसार बार-बार शिकायत मिल रही थी कि कोसली क्षेत्र में मेवात व राजस्थान से बड़ी मात्रा में डेयरी पर पनीर सप्लाई हो रहा है, जिसकी गुणवत्ता खराब है। जिला खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने कोसली में गुड़ियानी रोड पर एक दूध डेयरी पर जांच के लिए पहुंची तो यहां करीब 80-100 किलोग्राम पनीर सप्लाई के लिए रखा हुआ था। यहां से टीम ने पनीर व मैदा का एक-एक सैंपल लेकर पंचकूला स्थित लैब में भेज दिया है। अगर जांच रिपोर्ट में पनीर की गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो उक्त डेयरी संचालक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
दो माह में लिए गए ज्यादातर सैंपल मिल चुके हैं फेल
पिछले दो माह में टीम ने नामी गिरामी होटलों, रेस्टोरेंट्स, ढाबों, डेयरी व फ्लोर मिल की जांच कर खाद्य पदार्थों के नमूने लिए थे। इनमें से 16 की जांच रिपोर्ट आई थी, जिनमें 8 फेल और 8 पास पाए गए थे। फेल नमूनों में सबसे अधिक पनीर के थे। वहीं, दीपावली सीजन में भी जिला खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 45 सैंपल लिए थे, जिनमें से 10 सैंपल में गुणवत्ता में कमी पाई गई थी। उस समय टीम ने पनीर, दही, छैना, काजू, खोया, घी, दूध व सॉस के सैंपल लिए थे। जो सैंपल ज्यादा फेल मिले हैं, उनमें पनीर, दूध व दही शामिल था। इसके अलावा टीम ने पिछले दो माह में दूध डेयरियों पर पनीर के सैंपल लिए थे। उन सभी के सैंपल में कमी पाई गई है।
30 मामले कोर्ट में विचाराधीन
विभाग की तरफ से सैंपल को 3 श्रेणी में बांटा गया है। इनमें सब स्टैंडर्ड, अनसेफ व लेवल शामिल हैं। सब स्टैंडर्ड यानी गुणवत्ता की कमी पाई जाने पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता है। इसके अलावा अनसेफ यानि जीवन के लिए हानिकारक पाए जाने पर 6 माह की सजा व पांच लाख रुपये तक जुर्माना का प्रावधान है। वहीं, लेवल यानि किसी ब्रांडेड कंपनी की पैकिंग, न्यूट्रीशियन, डेट एक्सपायरी, लेबल पर कोई भी अनियमितता आदि पाए जाने पर 3 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। रेवाड़ी जिला में अनसेफ पाए जाने वाले यानि सजा होने वाले 30 मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं, अभी तक 7 मामलों में फैसला आ चुका है।
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एक्ट में जुर्माना और सजा दोनों का प्रावधान
सब स्टैंडर्ड, मिसब्रांडेड व मिसलीड सैंपल वाले मामले एडीसी तथा अनसेफ सैंपल के केस सीजेएम की अदालत में लगाए जाते हैं। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट के अनुसार, सब स्टैंडर्ड केस में 5 लाख रुपये, मिसब्रांडेड में 3 लाख रुपये तथा मिस लीडिंग सैंपल की रिपोर्ट के मामले में 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा अनसेफ मामले में 6 माह की सजा व एक लाख रुपये तक या फिर केस के आधार पर सजा व जुर्माना हो सकता है।
विभाग की टीम लगातार मिलावटखोरों पर नजर बनाए हुए है। कोसली में राजस्थान व मेवात से भारी मात्रा में पनीर सप्लाई किए जाने की टीम को लगातार शिकायत मिल रही थी, जिसकी गुणवत्ता में कमी बताई जा रही है। अब इनके सैंपल लेकर लैब भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. दीपक चौधरी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी
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दो माह में लिए गए ज्यादातर सैंपल मिल चुके हैं फेल
पिछले दो माह में टीम ने नामी गिरामी होटलों, रेस्टोरेंट्स, ढाबों, डेयरी व फ्लोर मिल की जांच कर खाद्य पदार्थों के नमूने लिए थे। इनमें से 16 की जांच रिपोर्ट आई थी, जिनमें 8 फेल और 8 पास पाए गए थे। फेल नमूनों में सबसे अधिक पनीर के थे। वहीं, दीपावली सीजन में भी जिला खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 45 सैंपल लिए थे, जिनमें से 10 सैंपल में गुणवत्ता में कमी पाई गई थी। उस समय टीम ने पनीर, दही, छैना, काजू, खोया, घी, दूध व सॉस के सैंपल लिए थे। जो सैंपल ज्यादा फेल मिले हैं, उनमें पनीर, दूध व दही शामिल था। इसके अलावा टीम ने पिछले दो माह में दूध डेयरियों पर पनीर के सैंपल लिए थे। उन सभी के सैंपल में कमी पाई गई है।
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30 मामले कोर्ट में विचाराधीन
विभाग की तरफ से सैंपल को 3 श्रेणी में बांटा गया है। इनमें सब स्टैंडर्ड, अनसेफ व लेवल शामिल हैं। सब स्टैंडर्ड यानी गुणवत्ता की कमी पाई जाने पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता है। इसके अलावा अनसेफ यानि जीवन के लिए हानिकारक पाए जाने पर 6 माह की सजा व पांच लाख रुपये तक जुर्माना का प्रावधान है। वहीं, लेवल यानि किसी ब्रांडेड कंपनी की पैकिंग, न्यूट्रीशियन, डेट एक्सपायरी, लेबल पर कोई भी अनियमितता आदि पाए जाने पर 3 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। रेवाड़ी जिला में अनसेफ पाए जाने वाले यानि सजा होने वाले 30 मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं, अभी तक 7 मामलों में फैसला आ चुका है।
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एक्ट में जुर्माना और सजा दोनों का प्रावधान
सब स्टैंडर्ड, मिसब्रांडेड व मिसलीड सैंपल वाले मामले एडीसी तथा अनसेफ सैंपल के केस सीजेएम की अदालत में लगाए जाते हैं। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट के अनुसार, सब स्टैंडर्ड केस में 5 लाख रुपये, मिसब्रांडेड में 3 लाख रुपये तथा मिस लीडिंग सैंपल की रिपोर्ट के मामले में 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा अनसेफ मामले में 6 माह की सजा व एक लाख रुपये तक या फिर केस के आधार पर सजा व जुर्माना हो सकता है।
विभाग की टीम लगातार मिलावटखोरों पर नजर बनाए हुए है। कोसली में राजस्थान व मेवात से भारी मात्रा में पनीर सप्लाई किए जाने की टीम को लगातार शिकायत मिल रही थी, जिसकी गुणवत्ता में कमी बताई जा रही है। अब इनके सैंपल लेकर लैब भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. दीपक चौधरी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी