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Rewari News: इस सीजन का अधिकतम पारा 42 डिग्री और न्यूनतम पहुंचा 22.5, एडवाइजरी जारी
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भाड़ावास मार्ग पर दोपहर में धूप से बचने के लिए छतरी का सहारा लेती महिलाएं। संवाद
रेवाड़ी। जिले के तापमान में लगातार बढ़ोतरी होने से दिन अब हल्की लू चल रही है। मंगलवार को सीजन का अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। सोमवार को अधिकतम तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।
न्यूनतम तापमान में साढ़े 4 डिग्री सेल्सियस की एकदम से बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में रातें भी अब काफी गर्म होने लगी हैं। इसे देखते हुए कार्यवाहक डीसी अनुपमा अंजलि ने जनहित में लू से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की है।
दरअसल, गर्मी के मौसम में हवा के गर्म थपेड़ों और बढ़े हुए तापमान से लू (हीट वेव) लगने का खतरा बढ़ जाता है, खासकर धूप में घूमने वालों, खिलाड़ियों, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को लू लगने का डर ज्यादा रहता है। कार्यवाहक डीसी ने आमजन से आह्वान किया कि प्रशासन की ओर से जारी की गई एडवाइजरी की पालना करें और हीट वेव से बचे रहें। उन्होंने बताया कि हीट वेव से बचाव के लिए स्थानीय मौसम संबंधी खबरों के लिए रेडियो सुनें, टीवी देखें, समाचार पत्र पढ़ें। गर्मी में हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनें, अपना सिर ढककर रखें, कपड़े, हैट व छतरी का उपयोग करें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं-भले ही प्यास न लगी हो, ओआरएस (ओरल रीहाइड्रेशन सॉल्यूशन), घर में बने पेय जैसे लस्सी, तोरानी (चावल का मांड) नींबू पानी, छाछ आदि का सेवन कर तरोताजा रहें। पार्किंग के समय बच्चों को वाहनों में छोड़कर न जाएं, उन्हें लू लगने का खतरा हो सकता है, नंगे पांव बाहर न जाएं, गर्मी से राहत के लिए हाथ का पंखा अपने पास रखें, काम के बीच में थोड़ा-थोड़ा विश्राम लें, खेत खलिहान में काम कर रहे हैं तो समय-समय पर पेड़ या छाया में ही आसरा लें।
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गर्मी के मौसम में जंक फूड का सेवन न करें
डॉ. अभय कुमार ने बताया कि गर्मी के मौसम में जंक फूड का सेवन न करें। ताजे फल, सलाद तथा घर में बना खाना खाएं। खासतौर से दोपहर 12 बजे से शाम 3 बजे के बीच धूप में सीधे न जाएं। यदि बच्चे को चक्कर आए, उल्टी, घबराहट और तेज सिरदर्द हो, सीने में दर्द हो या सांस लेने में कठिनाई हो तो चिकित्सक को दिखाएं। बढ़ती गर्मी में वृद्ध एवं कमजोर व्यक्तियों की खास देखभाल करें, तेज गर्मी, खासतौर से जब वे अकेले हों तो कम से कम दिन में दो बार उनकी जांच करें। ध्यान रहे कि उनके पास फोन हो, यदि वे गर्मी से बैचेनी महसूस कर रहे हों तो उन्हें ठंडक देने का प्रयास करें। उनके शरीर को गीला रखें, उन्हें नहलाएं व उनकी गर्दन व बगल में गीला तौलिया रखें। शरीर को ठंडक देने के साथ साथ डॉक्टर और एंबुलेंस को बुलाएं, उन्हें अपने पास हमेशा पानी की बोतल रखने के लिए कहें। ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
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न्यूनतम तापमान में साढ़े 4 डिग्री सेल्सियस की एकदम से बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में रातें भी अब काफी गर्म होने लगी हैं। इसे देखते हुए कार्यवाहक डीसी अनुपमा अंजलि ने जनहित में लू से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की है।
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दरअसल, गर्मी के मौसम में हवा के गर्म थपेड़ों और बढ़े हुए तापमान से लू (हीट वेव) लगने का खतरा बढ़ जाता है, खासकर धूप में घूमने वालों, खिलाड़ियों, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को लू लगने का डर ज्यादा रहता है। कार्यवाहक डीसी ने आमजन से आह्वान किया कि प्रशासन की ओर से जारी की गई एडवाइजरी की पालना करें और हीट वेव से बचे रहें। उन्होंने बताया कि हीट वेव से बचाव के लिए स्थानीय मौसम संबंधी खबरों के लिए रेडियो सुनें, टीवी देखें, समाचार पत्र पढ़ें। गर्मी में हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनें, अपना सिर ढककर रखें, कपड़े, हैट व छतरी का उपयोग करें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं-भले ही प्यास न लगी हो, ओआरएस (ओरल रीहाइड्रेशन सॉल्यूशन), घर में बने पेय जैसे लस्सी, तोरानी (चावल का मांड) नींबू पानी, छाछ आदि का सेवन कर तरोताजा रहें। पार्किंग के समय बच्चों को वाहनों में छोड़कर न जाएं, उन्हें लू लगने का खतरा हो सकता है, नंगे पांव बाहर न जाएं, गर्मी से राहत के लिए हाथ का पंखा अपने पास रखें, काम के बीच में थोड़ा-थोड़ा विश्राम लें, खेत खलिहान में काम कर रहे हैं तो समय-समय पर पेड़ या छाया में ही आसरा लें।
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गर्मी के मौसम में जंक फूड का सेवन न करें
डॉ. अभय कुमार ने बताया कि गर्मी के मौसम में जंक फूड का सेवन न करें। ताजे फल, सलाद तथा घर में बना खाना खाएं। खासतौर से दोपहर 12 बजे से शाम 3 बजे के बीच धूप में सीधे न जाएं। यदि बच्चे को चक्कर आए, उल्टी, घबराहट और तेज सिरदर्द हो, सीने में दर्द हो या सांस लेने में कठिनाई हो तो चिकित्सक को दिखाएं। बढ़ती गर्मी में वृद्ध एवं कमजोर व्यक्तियों की खास देखभाल करें, तेज गर्मी, खासतौर से जब वे अकेले हों तो कम से कम दिन में दो बार उनकी जांच करें। ध्यान रहे कि उनके पास फोन हो, यदि वे गर्मी से बैचेनी महसूस कर रहे हों तो उन्हें ठंडक देने का प्रयास करें। उनके शरीर को गीला रखें, उन्हें नहलाएं व उनकी गर्दन व बगल में गीला तौलिया रखें। शरीर को ठंडक देने के साथ साथ डॉक्टर और एंबुलेंस को बुलाएं, उन्हें अपने पास हमेशा पानी की बोतल रखने के लिए कहें। ध्यान रखना बहुत जरूरी है।