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Rewari News: कोर्ट में पीड़िता बोली- इन युवकों ने नहीं की थी छेड़छाड़, तीन आरोपी बरी
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रेवाड़ी। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी बेनिका की अदालत ने छेड़छाड़ के मामले की सुनवाई करते हुए विनय, योगेश और नवीन को बरी कर दिया है। कोर्ट में पीडिता बोली कि इन युवकों ने छेड़छाड़ नहीं की थी।
यह मामला अक्तूबर 2023 को बीएमजी मॉल के बाहर हुई कथित छेड़छाड़ की घटना से जुड़ा था। युवकों पर आरोप था कि मोटरसाइकिल पर सवार होकर युवती के साथ छेड़छाड़ की थी। पुलिस ने अदालत में चालान पेश किया था।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने शिकायतकर्ता और उसके रिश्तेदार को मुख्य गवाह के रूप में पेश किया लेकिन अदालत में गवाही देते समय दोनों गवाह मुकर गए। पीड़िता ने बताया कि अदालत में मौजूद आरोपी वे लोग नहीं हैं जिन्होंने उनके साथ छेड़छाड़ की थी।
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इसी तरह दूसरे गवाह ने भी आरोपियों की पहचान करने से इन्कार कर दिया और कहा कि पुलिस ने उनसे खाली कागजों पर हस्ताक्षर करवा लिए थे।
अदालत ने की ये टिप्पणी
अदालत ने कहा कि पूछताछ के दौरान पीड़िता ने स्पष्ट रूप से कहा कि अदालत के समक्ष उपस्थित अभियुक्त वे व्यक्ति नहीं थे जिन्होंने घटना के दिन उसके विरुद्ध कथित कृत्य किए थे। जब मुख्य पीड़िता ने ही आरोपियों को घटना का जिम्मेदार नहीं ठहराया तब अभियोजन पक्ष का पूरा केस धराशायी हो जाता है। न तो कोई अन्य स्वतंत्र गवाह पेश किया गया और न ही कोई पुख्ता साक्ष्य अदालत के समक्ष आया। ऐसे हालात में अभियोजन की विफलता साफ है और आरोपियों को दोषी ठहराना न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध होगा। इसलिए तीनों को बरी किया जाता है।
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यह मामला अक्तूबर 2023 को बीएमजी मॉल के बाहर हुई कथित छेड़छाड़ की घटना से जुड़ा था। युवकों पर आरोप था कि मोटरसाइकिल पर सवार होकर युवती के साथ छेड़छाड़ की थी। पुलिस ने अदालत में चालान पेश किया था।
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सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने शिकायतकर्ता और उसके रिश्तेदार को मुख्य गवाह के रूप में पेश किया लेकिन अदालत में गवाही देते समय दोनों गवाह मुकर गए। पीड़िता ने बताया कि अदालत में मौजूद आरोपी वे लोग नहीं हैं जिन्होंने उनके साथ छेड़छाड़ की थी।
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इसी तरह दूसरे गवाह ने भी आरोपियों की पहचान करने से इन्कार कर दिया और कहा कि पुलिस ने उनसे खाली कागजों पर हस्ताक्षर करवा लिए थे।
अदालत ने की ये टिप्पणी
अदालत ने कहा कि पूछताछ के दौरान पीड़िता ने स्पष्ट रूप से कहा कि अदालत के समक्ष उपस्थित अभियुक्त वे व्यक्ति नहीं थे जिन्होंने घटना के दिन उसके विरुद्ध कथित कृत्य किए थे। जब मुख्य पीड़िता ने ही आरोपियों को घटना का जिम्मेदार नहीं ठहराया तब अभियोजन पक्ष का पूरा केस धराशायी हो जाता है। न तो कोई अन्य स्वतंत्र गवाह पेश किया गया और न ही कोई पुख्ता साक्ष्य अदालत के समक्ष आया। ऐसे हालात में अभियोजन की विफलता साफ है और आरोपियों को दोषी ठहराना न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध होगा। इसलिए तीनों को बरी किया जाता है।