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Rewari News: दीपावली पर आना था घर, जवान का पार्थिव शरीर लेकर पहुंची सीआरपीएफ बटालियन
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पवन कुमार का फाइल फोटो
कुंड। सीआरपीएफ की बटालियन पवन कुमार का पार्थिव शरीर लेकर शनिवार सुबह गांव पहुंची, जहां उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। जैनाबाद गांव निवासी सीआरपीएफ जवान पवन ने शुक्रवार को छत्तीसगढ़ में अपनी सर्विस राइफल से खुद को गोली मार ली थी। पवन कुमार के परिजन ये मानने को बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं कि उसने खुदकुशी की है। उनका कहना है कि इस घटना से कुछ घंटे पहले उसने पत्नी, भाई सुरेश के अलावा साले से भी बात की थी।
पिता भी सेना में थे
पवन कुमार करीब 20 साल पहले सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। छत्तीसगढ़ के बीजापुर के पातरपारा में सीआरपीएफ 199 बटालियन का कैंप है। फिलहाल वह हेड कांस्टेबल के पद पर मोर्चा नंबर 2 में ड्यूटी पर तैनात थे। पवन कुमार की पत्नी के अलावा एक बेटा और एक बेटी है। उनके पिता का निधन हो चुका है। घर पर उनकी बूढ़ी मां परिवार के साथ रहती हैं। पवन कुमार के पिता भी सेना में थे। उन्हीं के नक्शे कदम पर चलते हुए पवन कुमार सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे।
फरवरी में घर आया था जवान पवन
पवन के बेटे नवीन कुमार ने बताया कि पिता आखिरी बार इसी साल फरवरी में घर आए थे। उस वक्त ताऊ के बेटे की शादी थी। अक्सर मेरी भी पापा से बात होती रहती थी। हमें कभी नहीं लगा कि वह परेशान थे। 2 दिन पहले ही मां और ताऊ से बात की थी। मैंने भी कुछ देर बात की। हमें कुछ पता ही नहीं चला कि अचानक ये सब कैसे हुआ।
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दीपावली पर हर साल पवन कुमार आता था घर
पवन कुमार के भाई सुरेश का कहना है कि उनका भाई हर साल दीपावली पर छुट्टी लेकर घर आता था, क्योंकि इस वक्त फसल की बुआई से लेकर कई तरह के काम होते हैं। इस बार भी उसे दीपावली के त्योहार से पहले घर आना था, लेकिन इस दिन उसका शव पहुंचा।
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पिता भी सेना में थे
पवन कुमार करीब 20 साल पहले सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। छत्तीसगढ़ के बीजापुर के पातरपारा में सीआरपीएफ 199 बटालियन का कैंप है। फिलहाल वह हेड कांस्टेबल के पद पर मोर्चा नंबर 2 में ड्यूटी पर तैनात थे। पवन कुमार की पत्नी के अलावा एक बेटा और एक बेटी है। उनके पिता का निधन हो चुका है। घर पर उनकी बूढ़ी मां परिवार के साथ रहती हैं। पवन कुमार के पिता भी सेना में थे। उन्हीं के नक्शे कदम पर चलते हुए पवन कुमार सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे।
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फरवरी में घर आया था जवान पवन
पवन के बेटे नवीन कुमार ने बताया कि पिता आखिरी बार इसी साल फरवरी में घर आए थे। उस वक्त ताऊ के बेटे की शादी थी। अक्सर मेरी भी पापा से बात होती रहती थी। हमें कभी नहीं लगा कि वह परेशान थे। 2 दिन पहले ही मां और ताऊ से बात की थी। मैंने भी कुछ देर बात की। हमें कुछ पता ही नहीं चला कि अचानक ये सब कैसे हुआ।
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दीपावली पर हर साल पवन कुमार आता था घर
पवन कुमार के भाई सुरेश का कहना है कि उनका भाई हर साल दीपावली पर छुट्टी लेकर घर आता था, क्योंकि इस वक्त फसल की बुआई से लेकर कई तरह के काम होते हैं। इस बार भी उसे दीपावली के त्योहार से पहले घर आना था, लेकिन इस दिन उसका शव पहुंचा।

पवन कुमार का फाइल फोटो