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महर्षि वाल्मीकि का जीवन आत्मपरिवर्तन का उदाहरण : मनोज

Sun, 25 Oct 2026 11:13 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 25 Oct 2026 11:13 PM IST
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The life of Maharishi Valmiki is an example
मनोज वशिष्ठ
रेवाड़ी। शिक्षाविद एवं साहित्यकार मनोज वशिष्ठ ने बताया कि भारतीय संस्कृति में महर्षि वाल्मीकि का जीवन आत्मपरिवर्तन, साधना और करुणा का प्रेरणादायी उदाहरण है। शरद पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला उनका प्रकट दिवस हमें संदेश देता है कि मनुष्य की पहचान उसके अतीत से नहीं, बल्कि वर्तमान के कर्मों और भविष्य के संकल्पों से बनती है।
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महर्षि वाल्मीकि को संस्कृत साहित्य का आदिकवि माना जाता है।
उनका जीवन सिखाता है कि कोई भी व्यक्ति अपने संकल्प, साधना और सत्कर्मों से परिवर्तन की राह चुन सकता है। दूसरों के दुख को समझना, अपने कर्मों की जिम्मेदारी लेना और सत्य के मार्ग पर चलना ही महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाओं का मूल संदेश है।
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