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Rewari News: कोर्ट ने हत्या और पॉक्सो के आरोपी को किया बरी
Fri, 31 Oct 2025 10:12 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 31 Oct 2025 10:12 PM IST
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रेवाड़ी। फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय के न्यायाधीश लोकेश गुप्ता ने आरोपी अमित को बरी कर दिया है। अमित पर भारतीय दंड संहिता की धाराओं 302 (हत्या), 363 (अपहरण), 366 ए (बच्चे के अपहरण), बाल यौन अत्याचार संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) की धारा 4 और अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम की धाराओं के तहत गंभीर आरोप थे।
मामला 2 जुलाई 2021 की घटना से जुड़ा है, जहां अभियोजन पक्ष का आरोप था कि अमित ने एक नाबालिग पीड़िता का अपहरण किया, उसे जुल्म और अत्याचार का सामना कराया और जहर देकर उसकी हत्या कर दी। इस गंभीर मामले में अभियुक्त को 21 सितंबर 2021 को गिरफ्तार किया गया था।
अभियुक्त अमित के पक्ष में वरिष्ठ अधिवक्ता हिमांशु सिराधना ने कानूनी प्रतिनिधित्व किया और न्यायालय में उसकी पैरवी की। गिरफ्तारी के बाद आरोपी लगभग 4 वर्ष तक हिरासत में रहा। अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत सभी साक्ष्यों, गवाहों के बयानों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों का गहन विश्लेषण किया।
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अदालत ने पाया कि पीड़िता की उम्र के प्रमाण पूर्ण व सत्यापित नहीं थे जिसमें आधार कार्ड जैसे दस्तावेज भी अपर्याप्त साबित हुए। साथ ही, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन शोषण के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले। अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्कों में विरोधाभास भी देखे। सभी तथ्यों और साक्ष्यों के विमर्श के पश्चात अदालत ने अमित को सभी आरोपों से बरी करते हुए निर्दोष घोषित किया और उसे रिहा करने का आदेश दिया।
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मामला 2 जुलाई 2021 की घटना से जुड़ा है, जहां अभियोजन पक्ष का आरोप था कि अमित ने एक नाबालिग पीड़िता का अपहरण किया, उसे जुल्म और अत्याचार का सामना कराया और जहर देकर उसकी हत्या कर दी। इस गंभीर मामले में अभियुक्त को 21 सितंबर 2021 को गिरफ्तार किया गया था।
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अभियुक्त अमित के पक्ष में वरिष्ठ अधिवक्ता हिमांशु सिराधना ने कानूनी प्रतिनिधित्व किया और न्यायालय में उसकी पैरवी की। गिरफ्तारी के बाद आरोपी लगभग 4 वर्ष तक हिरासत में रहा। अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत सभी साक्ष्यों, गवाहों के बयानों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों का गहन विश्लेषण किया।
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अदालत ने पाया कि पीड़िता की उम्र के प्रमाण पूर्ण व सत्यापित नहीं थे जिसमें आधार कार्ड जैसे दस्तावेज भी अपर्याप्त साबित हुए। साथ ही, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन शोषण के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले। अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्कों में विरोधाभास भी देखे। सभी तथ्यों और साक्ष्यों के विमर्श के पश्चात अदालत ने अमित को सभी आरोपों से बरी करते हुए निर्दोष घोषित किया और उसे रिहा करने का आदेश दिया।