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पांच दिन की प्रैक्टिस कर टेकचंद आज गोला फेंक में दिखाएंगे दम
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टेकचंद।
- फोटो : Rewari
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रेवाड़ी। टोक्यो पैरालंपिक में ज्वैलिन थ्रो में भारत को स्वर्ण दिलाने की उम्मीद लेकर रवाना हुए टेकचंद शुक्रवार को पांच दिन की प्रैक्टिस बाद गोला फेंकेंगे। चिकित्सीय जांच में कैटेगरी एफ-54 की बजाय एफ-55 आने के कारण उनके खेल में बदलाव हुआ है।
अमर उजाला से बातचीत में टेकचंद ने बताया कि 22 अगस्त को चिकित्सीय जांच में उनकी कैटेगरी एफ-54 की बजाय एफ-55 कर दी गई थी। इस कैटेगरी में ज्वैलिन थ्रो का इवेंट ही नहीं था। जैसे ही सूचना मिली तीन साल की मेहनत बेकार होती दिखी। लेकिन साथ पहुंचे अधिकारियों व खिलाड़ियों ने हौसला बढ़ाया और उन्होंने शॉटपुट की तैयारी शुरू कर दी। टेकचंद ने बताया कि शॉटपुट में उन्होंने वर्ष 2018 में विश्व पैरा एथलेटिक्स- ग्रांड प्रिक्स में रजत पदक जीता था। ऐसे में शुक्रवार को मां के आशीर्वाद व देश की ओर से मिल रही प्रेरणा से मेडल जीतने के लिए मैदान में उतरूंगा।
मेडिकल रिव्यूू में बदल जाती है कैटेगरी
बतौर टेकचंद पैरा खिलाड़ी खेल हो या जीवन संघर्ष से गुजरता है। ऐसे में खेल बदला है, हौसला नहीं बदला है। उन्होंने बताया कि मेडिकल रिव्यू के आधार पर कैटेगरी बदली जाती है। यह अकेले मेरे साथ नहीं है, ऐसा किसी के साथ भी हो सकता है। ऐसे में पैरा खिलाड़ी हमेशा तैयार रहते हैं। शरीर में हो रहे बदलाव के हिसाब से कैटेगरी निर्धारित की जाती है। घर, परिवार से लेकर देशभर से शुभकामनाएं मिल रही हैं। खेल से पहले दबाव के सवाल पर टेकचंद ने कहा कि खिलाड़ी को इसके लिए तैयार किया जाता है। मैदान में जाते समय बस अपना शत प्रतिशत देने का लक्ष्य रहता है। परिणाम परिस्थितियों पर निर्भर करता है। जापानी समय के अनुसार शुक्रवार को शाम सात बजे उनका मुकाबला होना है।
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अमर उजाला से बातचीत में टेकचंद ने बताया कि 22 अगस्त को चिकित्सीय जांच में उनकी कैटेगरी एफ-54 की बजाय एफ-55 कर दी गई थी। इस कैटेगरी में ज्वैलिन थ्रो का इवेंट ही नहीं था। जैसे ही सूचना मिली तीन साल की मेहनत बेकार होती दिखी। लेकिन साथ पहुंचे अधिकारियों व खिलाड़ियों ने हौसला बढ़ाया और उन्होंने शॉटपुट की तैयारी शुरू कर दी। टेकचंद ने बताया कि शॉटपुट में उन्होंने वर्ष 2018 में विश्व पैरा एथलेटिक्स- ग्रांड प्रिक्स में रजत पदक जीता था। ऐसे में शुक्रवार को मां के आशीर्वाद व देश की ओर से मिल रही प्रेरणा से मेडल जीतने के लिए मैदान में उतरूंगा।
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मेडिकल रिव्यूू में बदल जाती है कैटेगरी
बतौर टेकचंद पैरा खिलाड़ी खेल हो या जीवन संघर्ष से गुजरता है। ऐसे में खेल बदला है, हौसला नहीं बदला है। उन्होंने बताया कि मेडिकल रिव्यू के आधार पर कैटेगरी बदली जाती है। यह अकेले मेरे साथ नहीं है, ऐसा किसी के साथ भी हो सकता है। ऐसे में पैरा खिलाड़ी हमेशा तैयार रहते हैं। शरीर में हो रहे बदलाव के हिसाब से कैटेगरी निर्धारित की जाती है। घर, परिवार से लेकर देशभर से शुभकामनाएं मिल रही हैं। खेल से पहले दबाव के सवाल पर टेकचंद ने कहा कि खिलाड़ी को इसके लिए तैयार किया जाता है। मैदान में जाते समय बस अपना शत प्रतिशत देने का लक्ष्य रहता है। परिणाम परिस्थितियों पर निर्भर करता है। जापानी समय के अनुसार शुक्रवार को शाम सात बजे उनका मुकाबला होना है।
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