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Rewari News: शिक्षक मनोज ने बच्चों को अंग्रेजी में किया दक्ष, स्कूल की दशा भी संवारी
Wed, 03 Sep 2025 01:08 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 03 Sep 2025 01:08 AM IST
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रेवाड़ी। शहर के भाड़ावास स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के अंग्रेजी अध्यापक मनोज वशिष्ठ ने अपने अभिनव प्रयोग से न सिर्फ बच्चों को अंग्रेजी में दक्ष किया बल्कि विद्यालय की दशा को भी संवारने का कार्य किया। उनके प्रयास से स्कूल के विद्यार्थी शिक्षा के साथ खेल में भी आगे हैं।
मनोज के शिष्य एक कंपनी में कार्य करते हैं। मनोज ने जब उनको स्कूल की दशा बताई तो उन्होंने कंपनी की ओर से 30 लाख रुपये की लागत से विद्यालय की मरम्मत और सुंदरीकरण का कार्य कराया। इसके बाद बजट मिला तो उन्होंने बच्चों को बेहतर शिक्षा का माहौल प्रदान किया।
स्कूल के खेल मैदान के ऊपर से 11 हजार वोल्ट की बिजली की लाइनें गुजर रही थी जिससे खतरे की आशंका थी। मनोज वशिष्ठ ने अधिकारियों से संपर्क कर इन तारों को वहां से हटवाया।
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ऑनलाइन पढ़ाई में भी उनकी अहम भूमिका रही। उन्होंने ईजी इंग्लिश एक्सप्रेशन नाम से एक ऑनलाइन शिक्षण शृंखला शुरू की है जिसमें अंग्रेजी को बेहद सरल, मनोरंजक और वैज्ञानिक तरीके से विद्यार्थियों को पढ़ाया जाता है।
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कोविड-19 में बच्चों को डिजिटल माध्यम से जोड़ा
जब पूरी दुनिया वैश्विक महामारी कोविड-19 की चपेट में थी और शिक्षा व्यवस्था अपने अस्तित्व को बचाने की जद्दोजहद में लगी थी तब मनोज वशिष्ठ ने विद्यार्थियों को नई दिशा दी। ऐसे कठिन समय में जब छात्र कक्षाओं से दूर थे और डिजिटल संसाधनों की भारी कमी थी। मनोज ने विद्यार्थियों के लिए इस कमी को पूरा किया और बच्चों को डिजिटल माध्यम से जोड़ा।
प्रो. अशोक यादव से मिली प्रेरणा
मनोज वशिष्ठ ने राजकीय महाविद्यालय बावल से पढ़ाई शुरू की और बीए फाइनल में टॉप किया। बताया कि शिक्षक प्रो. अशोक यादव (बावल कॉलेज) उनके प्रेरणास्रोत रहे, जिन्होंने उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में कुछ नया करने का हौसला दिया। उनकी मेहनत और दूरदृष्टि के चलते जैन स्कूल रेवाड़ी शैक्षणिक परिणामों में आगे रहा। वहां की छात्र संख्या बढ़ी। खेल प्रतियोगिताओं और सह-शैक्षणिक गतिविधियों में विद्यालय अग्रणी बन गया। मनोज वशिष्ठ ने विद्यालय में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी लैब की स्थापना के साथ-साथ एक समृद्ध पुस्तकालय की भी नींव रखी।
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मनोज के शिष्य एक कंपनी में कार्य करते हैं। मनोज ने जब उनको स्कूल की दशा बताई तो उन्होंने कंपनी की ओर से 30 लाख रुपये की लागत से विद्यालय की मरम्मत और सुंदरीकरण का कार्य कराया। इसके बाद बजट मिला तो उन्होंने बच्चों को बेहतर शिक्षा का माहौल प्रदान किया।
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स्कूल के खेल मैदान के ऊपर से 11 हजार वोल्ट की बिजली की लाइनें गुजर रही थी जिससे खतरे की आशंका थी। मनोज वशिष्ठ ने अधिकारियों से संपर्क कर इन तारों को वहां से हटवाया।
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ऑनलाइन पढ़ाई में भी उनकी अहम भूमिका रही। उन्होंने ईजी इंग्लिश एक्सप्रेशन नाम से एक ऑनलाइन शिक्षण शृंखला शुरू की है जिसमें अंग्रेजी को बेहद सरल, मनोरंजक और वैज्ञानिक तरीके से विद्यार्थियों को पढ़ाया जाता है।
कोविड-19 में बच्चों को डिजिटल माध्यम से जोड़ा
जब पूरी दुनिया वैश्विक महामारी कोविड-19 की चपेट में थी और शिक्षा व्यवस्था अपने अस्तित्व को बचाने की जद्दोजहद में लगी थी तब मनोज वशिष्ठ ने विद्यार्थियों को नई दिशा दी। ऐसे कठिन समय में जब छात्र कक्षाओं से दूर थे और डिजिटल संसाधनों की भारी कमी थी। मनोज ने विद्यार्थियों के लिए इस कमी को पूरा किया और बच्चों को डिजिटल माध्यम से जोड़ा।
प्रो. अशोक यादव से मिली प्रेरणा
मनोज वशिष्ठ ने राजकीय महाविद्यालय बावल से पढ़ाई शुरू की और बीए फाइनल में टॉप किया। बताया कि शिक्षक प्रो. अशोक यादव (बावल कॉलेज) उनके प्रेरणास्रोत रहे, जिन्होंने उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में कुछ नया करने का हौसला दिया। उनकी मेहनत और दूरदृष्टि के चलते जैन स्कूल रेवाड़ी शैक्षणिक परिणामों में आगे रहा। वहां की छात्र संख्या बढ़ी। खेल प्रतियोगिताओं और सह-शैक्षणिक गतिविधियों में विद्यालय अग्रणी बन गया। मनोज वशिष्ठ ने विद्यालय में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी लैब की स्थापना के साथ-साथ एक समृद्ध पुस्तकालय की भी नींव रखी।