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प्रदेश सरकार बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए कटिबद्ध : डीसी
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प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में प्रदेश के बच्चों का सर्वांगीण एवं समग्र विकास करते हुए उन्हें बेहतर शिक्षा देने के लिए कटिबद्ध है। हरियाणा एक ऐसा राज्य है जहां गरीब विद्यार्थियों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए मौजूदा सत्र से कक्षा दूसरी से बारहवीं तक के विद्यार्थियों को मान्यता प्राप्त प्राइवेट विद्यालयों में पढ़ने का समान अवसर प्रदान किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में ‘मुख्यमंत्री समान शिक्षा राहत, सहायता एवं अनुदान‘ (‘चिराग’) नामक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की गई है।
डीसी अशोक कुमार गर्ग ने बताया कि चिराग योजना के तहत निजी विद्यालयों की सहमति से ऐसे बच्चों जिनके माता-पिता/ अभिभावकों की वार्षिक सत्यापित आय 1 लाख 80 हजार रुपये से कम है और वे बच्चे सरकारी विद्यालयों में पढ़ रहे हैं उनके दाखिले इन निजी विद्यालयों में कक्षा दूसरी से बारहवीं तक किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि ‘चिराग’ योजना के तहत कक्षा दूसरी से पांचवीं तक प्रति छात्र 700 रुपये, कक्षा छठी से आठवीं तक प्रति छात्र 900 एवं कक्षा नौवीं से बारहवीं तक प्रति छात्र 1100 रुपये प्रतिमाह की दर से प्रतिपूर्ति राशि या फार्म 6 में घोषित शुल्क राशि, जो भी कम होगी वह विद्यालयों को अदा की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत प्रदेश के 381 निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों द्वारा 24987 सीटों पर छात्रों को दाखिले देने की प्रक्रिया जारी है।
डीसी ने बताया कि सरकार की ओर से राज्य में निशुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के सेक्शन 12 (1) (सी) को पूर्णत: लागू करते हुए सभी मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में कक्षा पहली या इससे पूर्व की कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटों पर कमजोर वर्ग से संबंधित विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करने का अलग से प्रावधान किया गया है।
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डीसी अशोक कुमार गर्ग ने बताया कि चिराग योजना के तहत निजी विद्यालयों की सहमति से ऐसे बच्चों जिनके माता-पिता/ अभिभावकों की वार्षिक सत्यापित आय 1 लाख 80 हजार रुपये से कम है और वे बच्चे सरकारी विद्यालयों में पढ़ रहे हैं उनके दाखिले इन निजी विद्यालयों में कक्षा दूसरी से बारहवीं तक किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि ‘चिराग’ योजना के तहत कक्षा दूसरी से पांचवीं तक प्रति छात्र 700 रुपये, कक्षा छठी से आठवीं तक प्रति छात्र 900 एवं कक्षा नौवीं से बारहवीं तक प्रति छात्र 1100 रुपये प्रतिमाह की दर से प्रतिपूर्ति राशि या फार्म 6 में घोषित शुल्क राशि, जो भी कम होगी वह विद्यालयों को अदा की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत प्रदेश के 381 निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों द्वारा 24987 सीटों पर छात्रों को दाखिले देने की प्रक्रिया जारी है।
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डीसी ने बताया कि सरकार की ओर से राज्य में निशुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के सेक्शन 12 (1) (सी) को पूर्णत: लागू करते हुए सभी मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में कक्षा पहली या इससे पूर्व की कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटों पर कमजोर वर्ग से संबंधित विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करने का अलग से प्रावधान किया गया है।
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