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सरकारी ‘पंच’ से हारी विदेशियों को चित करने वाली ‘रेवाड़ी की मैरीकॉम’
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Sat, 24 Dec 2016 11:54 PM IST
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सरकारी महकमों के आगे चक्कर काट रहीं हैं रेनू
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कभी रिंग में विदेशी खिलाडिय़ों को अपने पंच से जमीन पर चित करने वाली ‘रेवाड़ी की मैरीकॉम’ सरकारी सिस्टम के पंच के आगे घुटने टेेकने को मजबूर है। बात हो रही है भिवानी साई में कई साल विजेंदर सिंह वाले ग्रुप में बॉक्सिंग प्रैक्टिस करने वाली रेवाड़ी की बॉक्सर रेनू की। नेशनल, एशियन और वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी भारत के साथ-साथ हरियाणा और रेवाड़ी का लोहा मनवाने वाली रेवाड़ी की रेनू स्पोर्ट कोटे के लिहाज से सरकारी नौकरी के लिए खुद को योग्य बताते हुए दस साल से सरकारी महकमों के आगे चक्कर काट रहीं हैं।
सरकारी उपेक्षा को देखते हुए अपने टॉप से ही उन्होंने रिंग में उतरना छोड़ा। इसके बाद से नौकरी के लिए सरकारी महकमों के चक्कर लगाए लेकिन सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। मूल रूप से रेवाड़ी के आशियाकी गोरावास और अब गोकलपुर में बने छोटे से घर में रह रहीं रेनू को भाजपा सरकार से कुछ आस है कि जूनियर कोच के तौर पर ही उसे सरकारी नौकरी मिल जाए।
2006 में वर्ल्ड वूमेन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में पाया था कांस्य
रेनू ने जूनियर कोच के लिए एक बार फिर से आवेदन किया है। आंखों में सरकारी उपेक्षा का दर्द लिये रेनू दर्द भरी आवाज में कहती हैं कि 2006 में वर्ल्ड वूमेन बॉक्सिंग चैंपियनशिप जीतने के बाद जो सरकारी नौकरी(डीएसपी) खुद ही सरकार को देनी चाहिए थी वो तो मिली ही नहीं सरकारी नॉर्म्स के हिसाब से और भी कोई नौकरी नहीं दी गई। इसके अलावा पिछली सरकार में कई बार अप्लाई किया लेकिन नौकरी नहीं मिली। अब एक बार फिर से उम्मीद है।
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नेशनल और एशियन समेत दर्जन भर हैं पदक
बकौल रेनू उन्होंने 2001 में सेकेंड सीनियर वुमेन नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया। इसके अलावा 2002 में हुए 32वें नेशनल गेम्स में कांस्य और 33वें नेशनल गेम्स में सिल्वर पदक हासिल किया। 2003 में तीसरी सीनियर वुमेन नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक मिला। जिसके बाद 2009 तक सीनियर वुमेन नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक हासिल किये थे।
उपेक्षा न होती तो ओलंपिक में भी लाती पदक
नम आंखों से रेनू बताती हैं कि लगातार सरकारी उपेक्षा के चलते ही उन्होंने इनफॉर्म होने के बावजूद बॉक्सिंग छोड़ी। उनका आखिरी बड़ा मैच 2010 के नेशनल गेम्स था, जिसमें उन्हें स्वर्ण पदक मिला था। उस समय ओलंपिक में महिला बॉक्सिंग नहीं थी। रेनू कहती हैं कि अगर सरकारी उपेक्षा नहीं हुई होती तो वे 2012 में ओलंपिक में शुरू हुए महिला बॉक्सिंग में भारत का प्रतिनिधित्व करतीं और पदक भी लातीं।
इंटरनेशनल चैंपियनशिप पदक
2 एशियन वुमेन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2003 कांस्य
फोर्थ वर्ल्ड वूमेन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2006 कांस्य
अहमेट कमेट बॉक्सिंग टूर्नामेंट, तुर्की 2007 कांस्य
फोर्थ एशियन वुमेन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2008 सिल्वर
स्वीडन ड्यूल मैच्स बॉक्सिंग टूर्नामेंट 2009 सिल्वर
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सरकारी उपेक्षा को देखते हुए अपने टॉप से ही उन्होंने रिंग में उतरना छोड़ा। इसके बाद से नौकरी के लिए सरकारी महकमों के चक्कर लगाए लेकिन सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। मूल रूप से रेवाड़ी के आशियाकी गोरावास और अब गोकलपुर में बने छोटे से घर में रह रहीं रेनू को भाजपा सरकार से कुछ आस है कि जूनियर कोच के तौर पर ही उसे सरकारी नौकरी मिल जाए।
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2006 में वर्ल्ड वूमेन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में पाया था कांस्य
रेनू ने जूनियर कोच के लिए एक बार फिर से आवेदन किया है। आंखों में सरकारी उपेक्षा का दर्द लिये रेनू दर्द भरी आवाज में कहती हैं कि 2006 में वर्ल्ड वूमेन बॉक्सिंग चैंपियनशिप जीतने के बाद जो सरकारी नौकरी(डीएसपी) खुद ही सरकार को देनी चाहिए थी वो तो मिली ही नहीं सरकारी नॉर्म्स के हिसाब से और भी कोई नौकरी नहीं दी गई। इसके अलावा पिछली सरकार में कई बार अप्लाई किया लेकिन नौकरी नहीं मिली। अब एक बार फिर से उम्मीद है।
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नेशनल और एशियन समेत दर्जन भर हैं पदक
बकौल रेनू उन्होंने 2001 में सेकेंड सीनियर वुमेन नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया। इसके अलावा 2002 में हुए 32वें नेशनल गेम्स में कांस्य और 33वें नेशनल गेम्स में सिल्वर पदक हासिल किया। 2003 में तीसरी सीनियर वुमेन नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक मिला। जिसके बाद 2009 तक सीनियर वुमेन नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक हासिल किये थे।
उपेक्षा न होती तो ओलंपिक में भी लाती पदक
नम आंखों से रेनू बताती हैं कि लगातार सरकारी उपेक्षा के चलते ही उन्होंने इनफॉर्म होने के बावजूद बॉक्सिंग छोड़ी। उनका आखिरी बड़ा मैच 2010 के नेशनल गेम्स था, जिसमें उन्हें स्वर्ण पदक मिला था। उस समय ओलंपिक में महिला बॉक्सिंग नहीं थी। रेनू कहती हैं कि अगर सरकारी उपेक्षा नहीं हुई होती तो वे 2012 में ओलंपिक में शुरू हुए महिला बॉक्सिंग में भारत का प्रतिनिधित्व करतीं और पदक भी लातीं।
इंटरनेशनल चैंपियनशिप पदक
2 एशियन वुमेन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2003 कांस्य
फोर्थ वर्ल्ड वूमेन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2006 कांस्य
अहमेट कमेट बॉक्सिंग टूर्नामेंट, तुर्की 2007 कांस्य
फोर्थ एशियन वुमेन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2008 सिल्वर
स्वीडन ड्यूल मैच्स बॉक्सिंग टूर्नामेंट 2009 सिल्वर