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‘हवा’ न हो जाए कचरा प्रबंधन का प्लांट
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Mon, 09 Jan 2017 12:47 AM IST
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महत्वाकांक्षी योजना अधर में लटकी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिला प्रशासन और नगर परिषद की सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर चल रही महत्वाकांक्षी योजना एक बार फिर से अधर में लटकी दिख रही है। अगर जल्द ही हल नहीं ढूंढा गया तो शहर को कचरामुक्त करने के लिए सालों से चल रही योजनाएं एक बार फिर से जमींदोज हो जाएंगी और शहर के डंपिंग प्वाइंट पर कचरों का ढेर लगता ही रहेगा। नगर परिषद को रामसिंहपुरा में ठोस कचरा प्रबंधन के लिए प्रस्तावित जगह के लिए सिंचाई विभाग को मोटी रकम देनी थी लेकिन रेवाड़ी की ही दो नगर पालिकाओं के अलावा महेंद्रगढ़ जिले का भी कचरा रामसिंहपुरा में ही पड़ना है। मामला अब नगर परिषद रेवाड़ी के थमे रुख के बाद सरकार के पास जा पहुंचा है। ऐसे में ठोस कचरा प्रबंधन का प्लांट लगा शहर को साफ-सुथरा करने की सालों से चल रही कवायद एक बार फिर से हवा होती दिख रही है।
धारूहेड़ा, बावल और महेंद्रगढ़ का भी पड़ना है कूड़ा
दरअसल सालों की कोशिश के बाद ठोस कचरा प्रबंधन के लिए रामसिंहपुरा गांव में सिंचाई विभाग की प्रस्तावित पांच एकड़ जमीन लेने के लिए नगर परिषद को मोटी रकम चुकानी है। काफी प्रोसीडिंग पूरी भी हो गई थी। जब नप को यह पता चला कि उस जगह पर जिले के ही कस्बों धारूहेड़ा और बावल का भी कूड़ा पड़ना है। दोनों ही जगहों में खुद की नगर पालिकाएं हैं। इसके अलावा महेंद्रगढ़ का भी कूड़ा रामसिंहपुरा में ही पड़ना प्रस्तावित है।
15 करोड़ के बजाए अब देने हैं 4.55 करोड़ रुपये
रामसिंहपुरा में पांच एकड़ जमीन के लिए पहले सिंचाई विभाग ने 15 करोड़ रुपये की डिमांड की थी। इसके बाद काफी जद्दोजहद हुई और डीसी डॉ. यश गर्ग के पास मामला पहुंचा। डीसी ने सरकार को एक पत्र लिखकर सिंचाई विभाग से जमीन खरीदने के लिए जरूरी 15 करोड़ रुपये नगर परिषद को देने की प्रार्थना की। जवाब में सरकार ने सिंचाई विभाग की जमीन की कीमत तिहाई कर दी। सरकार ने जमीन लेने की स्थिति में 15 करोड़ रुपये की बजाए 4.55 करोड़ रुपये सिंचाई विभाग को अदा करने के लिए नगर परिषद को लिखा।
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विधायक का चुनाव के पहले से ही है ड्रीम प्रोजेक्ट
रेवाड़ी से भाजपा विधायक रणधीर सिंह कापड़ीवास ने चुनाव लडने से पहले शहर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की कोई व्यवस्था न होने के चलते तत्कालीन विधायक कप्तान अजय सिंह यादव को खूब कोसा था। साथ ही सरकार में आने पर सबसे पहले शहर की इस बड़ी समस्या को जल्द से जल्द सुलझाने का आश्वासन लगभग हर मीटिंग में रखा था। विधायक बनने के बाद नगर परिषद में हुई एक हाउस मीटिंग के दौरान भी उन्होंने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को शहर के लिए जरूरी बताते हुए तत्काल अमलीजामा पहनाने को कहा था। बावजूद इसके तीन साल बीत गए पर योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका।
बावल और धारूहेड़ा नपा के पास है अच्छी इनकम
बावल और धारूहेड़ा नगर पालिका दोनों के क्षेत्र औद्योगिक भी हैं। लिहाजा यहां दोनों ही नगर पालिकाओं की कमाई खासी अच्छी है। ऐसे में अगर सरकार और प्रशासन को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को अमलीजामा पहनाना है तो कुल देय रकम यानी 4.55 करोड़ रुपये को चार हिस्सों में बांटकर रेवाड़ी नगर परिषद, बावल और धारूहेड़ा नगर पालिकाओं के साथ ही महेंद्रगढ़ नप से भी रकम लेनी होगी। इससे हर हाउस पर बोझ भी कम होगा और समस्या का निस्तारण भी जल्द हो जाएगा।
लंबे समय से शहरवासी उठा रहे हैं खामियाजा
ठोस कचरा प्रबंधन का प्लांट अभी तक न बन पाने का खामियाजा शहर को ही उठाना पड़ रहा है। शहर में तमाम गलियों से कचरा उठने के बाद शहर के ही दर्जन भर से ज्यादा मोहल्लों में बने डंपिंग प्वाइंट में डाल दिया जाता है। यहां से काफी समय बाद कूड़ा दोबारा उठा बाहर डाला जाता है। लेकिन इस बीच कचरे की दुर्गंध से आसपास का माहौल पूरी तरह दुर्गंधयुक्त हो जाता है। इसके अलावा मक्खी-मच्छर पनपने के चलते बीमारियों का खतरा भी बना रहता है।
सरकार ले पॉजिटिव फैसला तब बने बात
रेवाड़ी मेें सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनना सीएम के अनाउंसटमेंट में शामिल हो गया है। ऐेसे में सरकार के लेवल पर अगर काम हो तो प्लांट बनने की बात पूरी हो सकती है। क्योंकि रेवाड़ी में पूरे जिले के कूड़े के साथ ही महेंद्रगढ़, नारनौल, कनीना, नांगल चौधरी का भी कूड़ा पड़ना है। डीसी इस बाबत कमिश्नर को पत्र भी लिख चुके हैं। अब सरकार ही ठोस कचरा प्रबंधन के प्लांट पर अंतिम फैसला लेगी।
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यह सही है कि अब 4.55 करोड़ रुपये सिंचाई विभाग को देने के लिए कहा गया है। बावल और धारूहेड़ा नगर पालिका के अलावा महेंद्रगढ़ जिले का भी कचरा रामसिंहपुरा में प्रस्तावित प्लांट में पड़ना है। ऐसे में सीएम की घोषणा होने के चलते सरकार ही इस पर आगे काम करेगी। - मनोज यादव, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद
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अभी फिलहाल प्रक्रिया प्रोसेस में है। लोकल बॉडीज ट्रांसफर का काम चल रहा है। इसे शीघ्र ही पूरा कर लिया जाएगा। मामले में कोई अड़चन नहीं है।
- रणधीर सिंह कापड़ीवास, विधायक, रेवाड़ी
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धारूहेड़ा, बावल और महेंद्रगढ़ का भी पड़ना है कूड़ा
दरअसल सालों की कोशिश के बाद ठोस कचरा प्रबंधन के लिए रामसिंहपुरा गांव में सिंचाई विभाग की प्रस्तावित पांच एकड़ जमीन लेने के लिए नगर परिषद को मोटी रकम चुकानी है। काफी प्रोसीडिंग पूरी भी हो गई थी। जब नप को यह पता चला कि उस जगह पर जिले के ही कस्बों धारूहेड़ा और बावल का भी कूड़ा पड़ना है। दोनों ही जगहों में खुद की नगर पालिकाएं हैं। इसके अलावा महेंद्रगढ़ का भी कूड़ा रामसिंहपुरा में ही पड़ना प्रस्तावित है।
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15 करोड़ के बजाए अब देने हैं 4.55 करोड़ रुपये
रामसिंहपुरा में पांच एकड़ जमीन के लिए पहले सिंचाई विभाग ने 15 करोड़ रुपये की डिमांड की थी। इसके बाद काफी जद्दोजहद हुई और डीसी डॉ. यश गर्ग के पास मामला पहुंचा। डीसी ने सरकार को एक पत्र लिखकर सिंचाई विभाग से जमीन खरीदने के लिए जरूरी 15 करोड़ रुपये नगर परिषद को देने की प्रार्थना की। जवाब में सरकार ने सिंचाई विभाग की जमीन की कीमत तिहाई कर दी। सरकार ने जमीन लेने की स्थिति में 15 करोड़ रुपये की बजाए 4.55 करोड़ रुपये सिंचाई विभाग को अदा करने के लिए नगर परिषद को लिखा।
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विधायक का चुनाव के पहले से ही है ड्रीम प्रोजेक्ट
रेवाड़ी से भाजपा विधायक रणधीर सिंह कापड़ीवास ने चुनाव लडने से पहले शहर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की कोई व्यवस्था न होने के चलते तत्कालीन विधायक कप्तान अजय सिंह यादव को खूब कोसा था। साथ ही सरकार में आने पर सबसे पहले शहर की इस बड़ी समस्या को जल्द से जल्द सुलझाने का आश्वासन लगभग हर मीटिंग में रखा था। विधायक बनने के बाद नगर परिषद में हुई एक हाउस मीटिंग के दौरान भी उन्होंने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को शहर के लिए जरूरी बताते हुए तत्काल अमलीजामा पहनाने को कहा था। बावजूद इसके तीन साल बीत गए पर योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका।
बावल और धारूहेड़ा नपा के पास है अच्छी इनकम
बावल और धारूहेड़ा नगर पालिका दोनों के क्षेत्र औद्योगिक भी हैं। लिहाजा यहां दोनों ही नगर पालिकाओं की कमाई खासी अच्छी है। ऐसे में अगर सरकार और प्रशासन को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को अमलीजामा पहनाना है तो कुल देय रकम यानी 4.55 करोड़ रुपये को चार हिस्सों में बांटकर रेवाड़ी नगर परिषद, बावल और धारूहेड़ा नगर पालिकाओं के साथ ही महेंद्रगढ़ नप से भी रकम लेनी होगी। इससे हर हाउस पर बोझ भी कम होगा और समस्या का निस्तारण भी जल्द हो जाएगा।
लंबे समय से शहरवासी उठा रहे हैं खामियाजा
ठोस कचरा प्रबंधन का प्लांट अभी तक न बन पाने का खामियाजा शहर को ही उठाना पड़ रहा है। शहर में तमाम गलियों से कचरा उठने के बाद शहर के ही दर्जन भर से ज्यादा मोहल्लों में बने डंपिंग प्वाइंट में डाल दिया जाता है। यहां से काफी समय बाद कूड़ा दोबारा उठा बाहर डाला जाता है। लेकिन इस बीच कचरे की दुर्गंध से आसपास का माहौल पूरी तरह दुर्गंधयुक्त हो जाता है। इसके अलावा मक्खी-मच्छर पनपने के चलते बीमारियों का खतरा भी बना रहता है।
सरकार ले पॉजिटिव फैसला तब बने बात
रेवाड़ी मेें सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनना सीएम के अनाउंसटमेंट में शामिल हो गया है। ऐेसे में सरकार के लेवल पर अगर काम हो तो प्लांट बनने की बात पूरी हो सकती है। क्योंकि रेवाड़ी में पूरे जिले के कूड़े के साथ ही महेंद्रगढ़, नारनौल, कनीना, नांगल चौधरी का भी कूड़ा पड़ना है। डीसी इस बाबत कमिश्नर को पत्र भी लिख चुके हैं। अब सरकार ही ठोस कचरा प्रबंधन के प्लांट पर अंतिम फैसला लेगी।
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यह सही है कि अब 4.55 करोड़ रुपये सिंचाई विभाग को देने के लिए कहा गया है। बावल और धारूहेड़ा नगर पालिका के अलावा महेंद्रगढ़ जिले का भी कचरा रामसिंहपुरा में प्रस्तावित प्लांट में पड़ना है। ऐसे में सीएम की घोषणा होने के चलते सरकार ही इस पर आगे काम करेगी। - मनोज यादव, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद
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अभी फिलहाल प्रक्रिया प्रोसेस में है। लोकल बॉडीज ट्रांसफर का काम चल रहा है। इसे शीघ्र ही पूरा कर लिया जाएगा। मामले में कोई अड़चन नहीं है।
- रणधीर सिंह कापड़ीवास, विधायक, रेवाड़ी