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Rewari News: कोसली-कनीना सड़क मार्ग पर बसों का टोटा
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रेवाड़ी। कोसली बस स्टैंड। संवाद
कोसली। कोसली-कनीना सड़क मार्ग पर राज्य परिवहन की बस सेवा न के बराबर होने से रोजाना 20 गांव के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीण लक्षमण, गोपी राम, सुरेंद्र, रोशन लाल, संजय, सतीश, विजेंद्र, महावीर का कहना है कि इस मार्ग पर कुछ वर्ष पहले तक पर्याप्त रोडवेज बसें चलती थीं, लेकिन अब राज्य परिवहन की दो बसें सुबह शाम चलती है। इस वजह से नौकरीपेशा और काॅलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं को काफी समस्या होती है। लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर पर्याप्त रोडवेज बसों के संचालन की मांग लंबे समय से करते आ रहे हैं, लेकिन लोगों की मांग पर आज तक परिवहन विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इनका कहना है कि कम से कम छह बसें चलनी चाहिए।
दूसरी तरफ लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर निजी वाहन चालक यातायात नियमों को नजरअंदाज कर रहे हैं। नियम की बात की जाए तो निर्धारित सीटों से अधिक यात्री नहीं बैठ सकते हैं। मार्ग पर ऐसे वाहनों की संख्या 20 से 25 है। इसमें टेंपो, मालवाहक, पिकअप आदि शामिल हैं। इन वाहनों के पास में न तो राज्य सरकार द्वारा जारी परमिट और ना ही अन्य प्रकार की परिवहन संबंधी दस्तावेज होते हैं।
इंसेट
महिलाओं को होती है ज्यादा परेशानी
सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना छात्राओं और महिला को होती है। स्कूली बच्चों को बस पास होते हुए भी निजी वाहनों में किराया देकर लटक कर स्कूल कॉलेज जाना पड़ता है। सवारी चाहे महिला अथवा कोई बुजुर्ग हो उन्हें भी अंदर बैठने की बजाय लटक कर गंतव्य जाना पड़ता है। पर्याप्त सवारियां न मिलने पर यात्रियों को बीच मार्ग में ही उतार कर समस्या पैदा कर देते हैं। कोसली, नाहड़, झाल, जुडड़ी, सुधराना, गुजरवास, लूखी, कारौली, बिसोवा सहित अन्य गांव यातायात सुविधा से वंचित हैं।
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इंसेट
विद्यार्थियों ने किया था प्रदर्शन
इस रूट के अंतर्गत आने वाले गांव के लोगों और शिक्षण संस्थानों से जुड़े विद्यार्थियों ने सड़कों पर प्रदर्शन किया था। तब अधिकारियों ने आश्वासन देकर शांत तो कर दिया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया। अभिभावकों का कहना है कि बेटियों को रोजाना शिक्षण संस्थानों तक छोड़ने और लाना उनके लिए संभव नहीं है। इस मार्ग पर सुबह और शाम दो रोडवेज बसें चलती हैं, लेकिन बसों की टाइमिंग विद्यार्थियों के लिए ठीक नहीं है। वर्तमान में इन गांव की बेटियां करीब 25 किलोमीटर दूर कनीना और नाहड़ कोसली के कॉलेजो में आ जा रही हैं।
इंसेट
2 साल से बनी परेशानी
करीब 2 साल पहले तक यहां सब कुछ ठीक था। इस मार्ग पर कनीना, रोहतक, झज्जर और नारनौल डिपो की बसें चलती थी। धीरे-धीरे बसें बंद होती चली गईं। इसके अतिरिक्त चार बसें सहकारी समिति की भी चलती थीं। वह भी बंद हो गईं। बसों के बंद होने का सर्वाधिक प्रभाव बेटियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
इंसेट
परिवहन मंत्री को लिखा पत्र
कोसली के सामाजिक संगठन एकता मंच ने परिवहन मंत्री को पत्र लिखकर इस मार्ग पर पर्याप्त बसों के संचालन मांग की है। संगठन के संयोजक डॉक्टर राव ने बताया कि कोसली कनीना मार्ग पर नाहड़ में काफी स्कूल कॉलेज और शिक्षण संस्थाएं हैं, लेकिन इस मार्ग पर बस सेवा बहुत कम है। पहले जो बसें चलती थीं उन्हें भी बंद कर दिया गया है।
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ग्रामीण लक्षमण, गोपी राम, सुरेंद्र, रोशन लाल, संजय, सतीश, विजेंद्र, महावीर का कहना है कि इस मार्ग पर कुछ वर्ष पहले तक पर्याप्त रोडवेज बसें चलती थीं, लेकिन अब राज्य परिवहन की दो बसें सुबह शाम चलती है। इस वजह से नौकरीपेशा और काॅलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं को काफी समस्या होती है। लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर पर्याप्त रोडवेज बसों के संचालन की मांग लंबे समय से करते आ रहे हैं, लेकिन लोगों की मांग पर आज तक परिवहन विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इनका कहना है कि कम से कम छह बसें चलनी चाहिए।
दूसरी तरफ लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर निजी वाहन चालक यातायात नियमों को नजरअंदाज कर रहे हैं। नियम की बात की जाए तो निर्धारित सीटों से अधिक यात्री नहीं बैठ सकते हैं। मार्ग पर ऐसे वाहनों की संख्या 20 से 25 है। इसमें टेंपो, मालवाहक, पिकअप आदि शामिल हैं। इन वाहनों के पास में न तो राज्य सरकार द्वारा जारी परमिट और ना ही अन्य प्रकार की परिवहन संबंधी दस्तावेज होते हैं।
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महिलाओं को होती है ज्यादा परेशानी
सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना छात्राओं और महिला को होती है। स्कूली बच्चों को बस पास होते हुए भी निजी वाहनों में किराया देकर लटक कर स्कूल कॉलेज जाना पड़ता है। सवारी चाहे महिला अथवा कोई बुजुर्ग हो उन्हें भी अंदर बैठने की बजाय लटक कर गंतव्य जाना पड़ता है। पर्याप्त सवारियां न मिलने पर यात्रियों को बीच मार्ग में ही उतार कर समस्या पैदा कर देते हैं। कोसली, नाहड़, झाल, जुडड़ी, सुधराना, गुजरवास, लूखी, कारौली, बिसोवा सहित अन्य गांव यातायात सुविधा से वंचित हैं।
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विद्यार्थियों ने किया था प्रदर्शन
इस रूट के अंतर्गत आने वाले गांव के लोगों और शिक्षण संस्थानों से जुड़े विद्यार्थियों ने सड़कों पर प्रदर्शन किया था। तब अधिकारियों ने आश्वासन देकर शांत तो कर दिया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया। अभिभावकों का कहना है कि बेटियों को रोजाना शिक्षण संस्थानों तक छोड़ने और लाना उनके लिए संभव नहीं है। इस मार्ग पर सुबह और शाम दो रोडवेज बसें चलती हैं, लेकिन बसों की टाइमिंग विद्यार्थियों के लिए ठीक नहीं है। वर्तमान में इन गांव की बेटियां करीब 25 किलोमीटर दूर कनीना और नाहड़ कोसली के कॉलेजो में आ जा रही हैं।
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2 साल से बनी परेशानी
करीब 2 साल पहले तक यहां सब कुछ ठीक था। इस मार्ग पर कनीना, रोहतक, झज्जर और नारनौल डिपो की बसें चलती थी। धीरे-धीरे बसें बंद होती चली गईं। इसके अतिरिक्त चार बसें सहकारी समिति की भी चलती थीं। वह भी बंद हो गईं। बसों के बंद होने का सर्वाधिक प्रभाव बेटियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
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परिवहन मंत्री को लिखा पत्र
कोसली के सामाजिक संगठन एकता मंच ने परिवहन मंत्री को पत्र लिखकर इस मार्ग पर पर्याप्त बसों के संचालन मांग की है। संगठन के संयोजक डॉक्टर राव ने बताया कि कोसली कनीना मार्ग पर नाहड़ में काफी स्कूल कॉलेज और शिक्षण संस्थाएं हैं, लेकिन इस मार्ग पर बस सेवा बहुत कम है। पहले जो बसें चलती थीं उन्हें भी बंद कर दिया गया है।