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शहर की आबादी छह गुना बढ़ी पर सीवर लाइन नहीं बदली
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सीवर ओवरफ्लो होने से मोहल्ले मे भरा गंदा पानी।
- फोटो : Rewari
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तीन साल पहले अमृत योजना के तहत 28 करोड़ रुपये खर्च कर शहर के सीवरेज सिस्टम के कायाकल्प का दावा ढेर हो गया। इतने कम समय में ही शहर का सीवर सिस्टम अलग-अलग स्थानों पर ओवरफ्लो हो रहा है। मॉडल टाउन, कंपनी बाग और सरकुलर रोड जैसे शहर के प्रमुख मोहल्लों समेत अधिकांश स्थानों पर सीवर लाइन ओवर फ्लो होने की समस्या से लोग परेशान हैं। ऐसे में नगर में बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने वाले विभागों के अधिकारियों की कारगुजारी का अंदाजा लगाया जा सकता है।
मालूम हो कि वर्ष 2016 में शहर को सीवर ओवरफ्लो की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए अमृत योजना के तहत 28 करोड़ खर्च किए गए। जबकि बीते छह माह से शहर में सीवर ओवरफ्लो की समस्या फिर पैदा हो गई। मॉडल टाऊन से लेकर कंपनी बाग हो या फिर सरकुलर रोड के अंदर का शहर सभी जगह सीवर ओवरफ्लो की की समस्या एक जैसी है। कर्मचारी शिकायत के बाद लाइन को चलाते हैं, लेकिन एक दिन छोड़कर दूसरे दिन फिर पहले जैसे हालात हो जाते हैं।
क्यों होता है सीवर ओवर फ्लो
शहर में 40 साल पहले नगरीय क्षेत्र की आबादी 30 हजार थी। उस दौरान सीवरेज सिस्टम की योजना बनाते समय 6 इंच की ईंट से बनी सीवर लाइन डाली गई थी। इसके मुकाबले अब नगरीय क्षेत्र की आबादी बढ़कर दो लाख को पार कर चुकी है जबकि सीवर लाइन आज भी 6 इंच ही है। वहीं, दूसरी ओर लाइन पुरानी होने के सीवर लाइन की ईंटें गिर रही है। जिससे सीवर लाइन अक्सर कई स्थानों पर चोक हो जाती हैं। जिसके चलते सीवर ओवरफ्लो की समस्या रहती है। जानकारों का कहना है कि कम से कम 12 इंच की लाइन डाली जाए तो इस समस्या से राहत मिल सकती है।
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सीवर लाइन के रखरखाव में खर्च होते हैं चार करोड़ खर्च
नए व पुराने शहर में कुल 524 किमी. लंबी सीवर लाइन है। वर्ष 2018 से लेकर 2019 तक इसके रख रखाव के नाम पर ही चार करोड़ रुपये खर्च हो गए है। पब्लिक हेल्थ विभाग की माने तो अमृत योजना के तहत 28 करोड़ रुपये केवल बाहरी कॉलोनियों में खर्च किए जा रहे हैं। इसके अलावा शहर के अंदर की करीब 10 किमी. सीवर लाइन को बदल दिया जाए तो हालात सुधर सकते हैं।
नगर परिषद व जन स्वास्थ्य विभाग में समन्वय ही नहीं
जन स्वास्थ्य विभाग की माने तो शहर में नगर परिषद की ओर से गली आदि बनाने के काम के दौरान सीवर लाइन को तोड़ दिया जाता है, इसके चलते लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा गैस पाइल लाइन हो या फिर अन्य काम पेयजल व सीवर लाइन को नुकसान जरूर पहुंचता है। यदि नगर परिषद अधिकारी इस दौरान जनस्वास्थ्य विभाग को जानकारी देकर काम करे तो परेशानी से बचा जा सकता है।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा परेशानी
शहर के सबसे पॉश व्यवसायिक व रिहायशी क्षेत्र में मॉडल टाउन व ब्रॉस मार्केट शामिल हैं। यहां सीवर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। मॉडल टाउन में नागपाल साउंड व सेल्सटैक्स दफ्तर वाली गली से लेकर महाराणा प्रताप चौक के पास वाली रोड पर हर दूसरे दिन लोगों को सीवर ओवरफ्लो की समस्या झेलनी पड़ती है। ब्रॉस मार्केट में तो स्थाई रूप से सीवर ओवरफ्लो की समस्या रहती है। कंपनी बाग में भी सीवर ओवरफ्लो की समस्या है। यहां के लोगों की ओर से कई बार इसके लिए जन स्वास्थ्य विभाग से लेकर डीसी व विधायक तक को शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन समाधान नहीं हो पाया है। जन स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मंडी प्रशासन की ओर से मोटर चलाकर पानी कंपनी बाग वाली लाइन में डाल दिया जाता है, इससे परेशानी रहती है। मंडी को मुख्य लाइन में अपना पानी डालना चाहिए।
अमृत योजना के तहत काम चल रहा है। पुरानी सीवर लाइनें भी बदली जाएंगी। सीवर ओवरफ्लो की समस्या क्यों बढ़ रही हैं, इसकी जांच कराई जाएगी। किसी की लापरवाही पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी।
- बीएस भंकर, एसई, पब्लिक हेल्थ रेवाड़ी सर्किल
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मालूम हो कि वर्ष 2016 में शहर को सीवर ओवरफ्लो की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए अमृत योजना के तहत 28 करोड़ खर्च किए गए। जबकि बीते छह माह से शहर में सीवर ओवरफ्लो की समस्या फिर पैदा हो गई। मॉडल टाऊन से लेकर कंपनी बाग हो या फिर सरकुलर रोड के अंदर का शहर सभी जगह सीवर ओवरफ्लो की की समस्या एक जैसी है। कर्मचारी शिकायत के बाद लाइन को चलाते हैं, लेकिन एक दिन छोड़कर दूसरे दिन फिर पहले जैसे हालात हो जाते हैं।
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क्यों होता है सीवर ओवर फ्लो
शहर में 40 साल पहले नगरीय क्षेत्र की आबादी 30 हजार थी। उस दौरान सीवरेज सिस्टम की योजना बनाते समय 6 इंच की ईंट से बनी सीवर लाइन डाली गई थी। इसके मुकाबले अब नगरीय क्षेत्र की आबादी बढ़कर दो लाख को पार कर चुकी है जबकि सीवर लाइन आज भी 6 इंच ही है। वहीं, दूसरी ओर लाइन पुरानी होने के सीवर लाइन की ईंटें गिर रही है। जिससे सीवर लाइन अक्सर कई स्थानों पर चोक हो जाती हैं। जिसके चलते सीवर ओवरफ्लो की समस्या रहती है। जानकारों का कहना है कि कम से कम 12 इंच की लाइन डाली जाए तो इस समस्या से राहत मिल सकती है।
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सीवर लाइन के रखरखाव में खर्च होते हैं चार करोड़ खर्च
नए व पुराने शहर में कुल 524 किमी. लंबी सीवर लाइन है। वर्ष 2018 से लेकर 2019 तक इसके रख रखाव के नाम पर ही चार करोड़ रुपये खर्च हो गए है। पब्लिक हेल्थ विभाग की माने तो अमृत योजना के तहत 28 करोड़ रुपये केवल बाहरी कॉलोनियों में खर्च किए जा रहे हैं। इसके अलावा शहर के अंदर की करीब 10 किमी. सीवर लाइन को बदल दिया जाए तो हालात सुधर सकते हैं।
नगर परिषद व जन स्वास्थ्य विभाग में समन्वय ही नहीं
जन स्वास्थ्य विभाग की माने तो शहर में नगर परिषद की ओर से गली आदि बनाने के काम के दौरान सीवर लाइन को तोड़ दिया जाता है, इसके चलते लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा गैस पाइल लाइन हो या फिर अन्य काम पेयजल व सीवर लाइन को नुकसान जरूर पहुंचता है। यदि नगर परिषद अधिकारी इस दौरान जनस्वास्थ्य विभाग को जानकारी देकर काम करे तो परेशानी से बचा जा सकता है।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा परेशानी
शहर के सबसे पॉश व्यवसायिक व रिहायशी क्षेत्र में मॉडल टाउन व ब्रॉस मार्केट शामिल हैं। यहां सीवर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। मॉडल टाउन में नागपाल साउंड व सेल्सटैक्स दफ्तर वाली गली से लेकर महाराणा प्रताप चौक के पास वाली रोड पर हर दूसरे दिन लोगों को सीवर ओवरफ्लो की समस्या झेलनी पड़ती है। ब्रॉस मार्केट में तो स्थाई रूप से सीवर ओवरफ्लो की समस्या रहती है। कंपनी बाग में भी सीवर ओवरफ्लो की समस्या है। यहां के लोगों की ओर से कई बार इसके लिए जन स्वास्थ्य विभाग से लेकर डीसी व विधायक तक को शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन समाधान नहीं हो पाया है। जन स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मंडी प्रशासन की ओर से मोटर चलाकर पानी कंपनी बाग वाली लाइन में डाल दिया जाता है, इससे परेशानी रहती है। मंडी को मुख्य लाइन में अपना पानी डालना चाहिए।
अमृत योजना के तहत काम चल रहा है। पुरानी सीवर लाइनें भी बदली जाएंगी। सीवर ओवरफ्लो की समस्या क्यों बढ़ रही हैं, इसकी जांच कराई जाएगी। किसी की लापरवाही पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी।
- बीएस भंकर, एसई, पब्लिक हेल्थ रेवाड़ी सर्किल