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Rewari News: अपराध का रिकार्ड देख कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका
Sun, 13 Jul 2025 12:12 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 13 Jul 2025 12:12 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जेएमआईसी विश्वास खटक की अदालत ने गुलशन बनाम राज्य के केस में आरोपी के आपराधिक रिकार्ड को देखते हुए उसकी जमानत याचिका दूसरी बार नामंजूर की है। अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनीं।
कोर्ट ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद कहा कि आरोपी का आपराधिक रिकार्ड है जिससे वह नियमित जमानत का हकदार नहीं है। उसके ऊपर लगे आरोप गंभीर हैं। उसके द्वारा दोबारा अपराध करने की आशंका है। ऐसे वर्तमान जमानत अर्जी खारिज की जाती है।
अभियुक्त के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उसके मुवक्किल को झूठे केस में फंसाया गया है। वर्तमान मामला छेड़छाड़ और मनगढ़ंत तथ्यों पर आधारित है। ऐसे में उसे नियमित जमानत की राहत प्रदान की जाए। कहा कि उसके मुवक्किल को फंसाया गया है। ऐसे में उसको नियमित जमानत दी जाए।
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राज्य की ओर से पेश अधिवक्ता ने जमानत याचिका का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि आरोपी का आपराधिक इतिहास है। यदि उसे जमानत पर रिहा किया जाता है तो वह फिर अपराध कर सकता है। उन्होंने अभियुक्त को नियमित जमानत देने से इनकार करने का अनुरोध किया।
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रेवाड़ी। जेएमआईसी विश्वास खटक की अदालत ने गुलशन बनाम राज्य के केस में आरोपी के आपराधिक रिकार्ड को देखते हुए उसकी जमानत याचिका दूसरी बार नामंजूर की है। अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनीं।
कोर्ट ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद कहा कि आरोपी का आपराधिक रिकार्ड है जिससे वह नियमित जमानत का हकदार नहीं है। उसके ऊपर लगे आरोप गंभीर हैं। उसके द्वारा दोबारा अपराध करने की आशंका है। ऐसे वर्तमान जमानत अर्जी खारिज की जाती है।
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अभियुक्त के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उसके मुवक्किल को झूठे केस में फंसाया गया है। वर्तमान मामला छेड़छाड़ और मनगढ़ंत तथ्यों पर आधारित है। ऐसे में उसे नियमित जमानत की राहत प्रदान की जाए। कहा कि उसके मुवक्किल को फंसाया गया है। ऐसे में उसको नियमित जमानत दी जाए।
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राज्य की ओर से पेश अधिवक्ता ने जमानत याचिका का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि आरोपी का आपराधिक इतिहास है। यदि उसे जमानत पर रिहा किया जाता है तो वह फिर अपराध कर सकता है। उन्होंने अभियुक्त को नियमित जमानत देने से इनकार करने का अनुरोध किया।