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Rewari News: राजकीय महाविद्यालयों में स्नातक में अब भी सीटें खाली, फिजिकल काउंसिलिंग से होंगे दाखिले

Sat, 08 Aug 2026 11:45 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Sat, 08 Aug 2026 11:45 PM IST
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Seats for undergraduate courses in government colleges are still vacant.
रेवाड़ी। दो मेरिट सूची जारी होने के बाद भी जिले के 11 राजकीय महाविद्यालयों में स्नातक प्रथम वर्ष में बड़ी संख्या में सीटें खाली हैं। इन रिक्त सीटों पर अब फिजिकल काउंसिलिंग से दाखिले लिए जाएंगे।
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बीए में करीब 50 फीसदी सीटें ही भरी हैं। बीएससी और बीकॉम में 40 फीसदी सीटों पर दाखिले नहीं हुए हैं। 9 अगस्त को पोर्टल दोबारा खुलेगा, जबकि 10 से 16 अगस्त तक 100 रुपये लेट फीस के साथ और 17 से 23 अगस्त तक 100 रुपये लेट फीस के अलावा प्रतिदिन 100 रुपये अतिरिक्त शुल्क के साथ फिजिकल काउंसलिंग होगी।
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जिले के 11 सरकारी कॉलेजों में बीए में ही औसतन करीब 50 प्रतिशत तक दाखिले हुए हैं। इसके विपरीत बीएससी और बीकॉम में दाखिलों की स्थिति कमजोर है। इन दोनों संकायों में सीटें खाली हैं और दाखिले का आंकड़ा 40 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच सका है। ग्रामीण क्षेत्र के कई कॉलेजों में तो दूसरी मेरिट लिस्ट के लिए आवेदन ही नहीं बचे। ऐसे में दूसरी सूची में भी दाखिलों की संख्या कम रही।
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कॉलेजों में दाखिलों की स्थिति से विद्यार्थियों के बदलते रुझान का भी पता चल रहा है। अब विद्यार्थी पारंपरिक स्नातक पाठ्यक्रमों के बजाय प्रोफेशनल, तकनीकी और रोजगारपरक कोर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं।
जिले के सेक्टर-18 स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय और राजकीय कॉलेज कंवाली में संचालित बीसीए कोर्स में अन्य पाठ्यक्रमों की तुलना में बेहतर दाखिले हुए हैं। दोनों कॉलेजों में बीसीए की 60-60 सीटें हैं और आधे से अधिक सीटों पर दाखिले हो चुके हैं।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी वजह
राजकीय कॉलेज कोसली के सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. सुधीर यादव का कहना है कि वर्तमान में विद्यार्थियों का रुझान प्रतियोगी परीक्षाओं की ओर अधिक है। विद्यार्थी स्नातक की पढ़ाई के साथ ही सरकारी नौकरी की तैयारी करना चाहते हैं। इसके अलावा दिल्ली और अन्य प्रतिष्ठित कॉलेजों में दाखिले के लिए भी विद्यार्थी प्रयास करते हैं। उन्होंने बताया कि रेडियोग्राफर, डीएमएलटी, आंखों से संबंधित कोर्स, पॉलीटेक्निक और आईटीआई जैसे तकनीकी एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की ओर भी विद्यार्थियों का रुझान बढ़ा है। इन संस्थानों में दाखिला नहीं मिलने पर ही कई विद्यार्थी स्थानीय सरकारी कॉलेजों में दाखिला लेते हैं। यही कारण है कि पहली दो मेरिट लिस्ट के बाद सीटें खाली रह जाती हैं और ओपन या फिजिकल काउंसलिंग के दौरान दाखिलों में तेजी आती है।


पिछले तीन साल से यही ट्रेंड
कॉलेजों के अनुसार पिछले करीब तीन वर्षों से यूजी दाखिलों में इसी तरह का ट्रेंड देखने को मिल रहा है। पहली दो मेरिट लिस्ट के बाद बड़ी संख्या में सीटें खाली रहती हैं। इसके बाद ओपन अथवा फिजिकल काउंसलिंग शुरू होने पर दाखिलों की संख्या बढ़ती है। पिछले वर्षों में फिजिकल काउंसलिंग के दौरान करीब 70 प्रतिशत तक सीटें भरने की स्थिति बनी है। इस बार भी कॉलेजों को फिजिकल काउंसलिंग से खाली सीटों के भरने की उम्मीद है।
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