{"_id":"57aa256b4f1c1b3a1cee49e3","slug":"rewari-strike-health-worker-hospital-protest","type":"story","status":"publish","title_hn":"रेवाड़ी में 400 एनएचएम कर्मचारी हड़ताल पर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रेवाड़ी में 400 एनएचएम कर्मचारी हड़ताल पर
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Wed, 10 Aug 2016 12:39 AM IST
विज्ञापन
धरने पर बैठे स्वास्थ्य कमचारी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एनएचएम कर्मियों की राज्यव्यापी हड़ताल के पहले दिन मंगलवार को जिले के अस्पतालों की व्यवस्था चरमरा गई। अस्पतालों में इलाज के लिए आए मरीजों को इससे खासी परेशानी हुई। एनएचएम कर्मियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मंगलवार से दो दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल घोषित कर रखी थी। इसका सीधा असर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी देखा गया। जिले में 400 से अधिक एनएचएमकर्मी हैं। कर्मचारियों के एक साथ हड़ताल पर चले से जिले के सभी अस्पतालों की व्यवस्था प्रभावित हो गई। हड़ताल का सर्वाधिक असर गायनी एवं एंबुलेंस सेवा पर पड़ा।
जानकारी के अनुसार एनएचएम स्कीम के तहत जिले में चार सौ से अधिक स्वास्थ्य कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के सभी विभाग इन्हीं कर्मचारियों के भरोसे चलते हैं। प्रदेश सरकार ने बीते दिनों प्रदेश में एनएचएम स्कीम के तहत लगे कर्मचारियों में बीस फीसदी तक की कमी करने का निर्णय लिया था। इसी के विरोध में प्रदेश के एनएचएम कर्मचारी मंगलवार से दो दिन की हड़ताल पर बैठे हुए हैं।
नेशनल हेल्थ मिशन यूनियन के जिला संयोजक मनीष यादव ने कहा कि सरकार का यह निर्णय कर्मचारी विरोधी है। उन्होंने कहा कि सरकार एनएचएम कर्मियों को भी आउटसोर्स के तहत लगाना चाहती है। जो कि गलत है। उन्होंने कहा कि सरकार जब तक कर्मचारियों को रेगुलर नहीं करती है, उन्हें समान वेतन समान पर काम की नीति अपनानी चाहिए। इस मौके पर यूनियन प्रधान पंकज यादव, उप-प्रधान संतोष यादव, सुनीता यादव, जयपाल, सतबीर, सतेंद्र एवं प्रवीन सहित सैकड़ों कर्मचारी मौजूद थे।
विज्ञापन
500 में से महज 15 महिलाओं की जांच
हड़ताल के चलते शहर के नागरिक अस्पताल में हर माह की नौ तारीख को होने वाली जांच में 500 में से महज 15 महिलाएं ही पहुंची। इन गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाने का जिम्मा एनएचएमकर्मियों का ही होता है। इनके हड़ताल पर चले जाने से अधिकांश गर्भवती महिलाएं भी अस्पताल तक नहीं पहुंच सकी। जांच में गर्भवती महिलाओं का बीपी, गर्भ में पल रहे बच्चे की पोजीशन, ग्रोथ, ब्लड़ जांच, टीकारण जैसी अनेक जांच की जाती है। नाम नहीं लिखने की शर्त पर यहीं पर मौजूद एक डॉक्टर ने बताया कि इन जांचों के अभाव महिला की जान तक जा सकती है। उन्होंने बताया कि जुलाई माह की नौ तारीख को लगभग छह सौ गर्भवती महिलाएं जांच के लिए पहुंची थी, जिनमें से बीस फीसदी से ज्यादा महिलाओं को परेशानी थी,जिनका उपचार चल रहा है। क्रिटीकल केसों में गर्भवती महिलाओं को लगने वाले हाई रिस्क के टीके लगाने के लिए भी छह में से दो स्वास्थ्य कर्मचारी उपस्थित थे। ऐसे ही हालात एसएनसीयू वार्ड के थे। यहां पर नवजात बच्चों की सुरक्षा भी महज एक स्वास्थ्य कर्मी के भरोसे थी। जबकि यहां पर रूटीन में नौ स्वास्थ्य कर्मी ड्यूटी पर तैनात रहते हैं।
एंबुलेंस की घंटी बजी, जवाब मिला हड़ताल है
जिले में डिलीवरी एवं अन्य आपात स्थिति में लगी एंबुलेंस सेवाएं भी हड़ताल केे चलते सर्वाधिक प्रभावित रही। जिले में 16 एंबुलेंस हैं। इनमें से केवल 9 एंबुलेंस ही चल रही हैं। ऐसे में पांच एंबुलेंस जहां सीएचएसी एवं पीएचसी के पास तो नागरिक अस्पताल के पास चार एंबुलेंस सेवाओं के लिए उपलब्ध है। मंगलवार को हड़ताल के दौरान रेवाड़ी नागरिक अस्पताल स्थित कंट्रोल रूम में डिलीवरी के लिए दस कॉल, रैफर एवं अन्य केस के लिए 15 कॉल एवं एक्सीडेंट के लिए चार कॉल आई। लेकिन एनएचएम कर्मचारियों ने केवल एक्सीडेंट के लिए ही एंबुलेंस को भेजा।
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र लगा ताला, डिप्टी सीएमओ ने संभाला मोर्चा
नागरिक अस्पताल में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने वाले प्रथम तल पर बने कार्यालय में एनएमच कर्मचारियों ने ताला लटकाया हुआ था। कार्यालय के बाहर बढ़ती भीड़ को देखते हुए डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. जेके सैनी ने स्वयं मोर्चा संभाला और लोगों के काम करवाए। गौरतलब है कि इस विभाग में अधिकतर कर्मचारी एनएचएम स्कीम के तहत लगे हुए हैं।
सीएचसी एवं पीएचसी में हालात बद्तर
जिले की सीएचसी एवं पीएचसी में डॉक्टर हो या फिर स्टॉफ नर्स अधिकतर स्टॉफ एनएचएम स्कीम के तहत लगे हुए हैं। यहां पर होने वाली डिलीवरी एवं अन्य अधिकतर केस नागरिक अस्पताल के लिए ही रैफर किए जा रहे थे।
सीएमओ को बुलानी पड़ी प्राइवेट एंबुलेंस
अस्पताल की एंबुलेंस के कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के चलते बिगड़ते हालातों से निपटने के लिए सीएमओ ने प्राइवेट एंबुलेंस को नागरिक अस्पताल में तैनात करवाया। डिलीवरी केसों को देखते हुए सीएमओ को यह व्यवस्था करनी पड़ी।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार एनएचएम स्कीम के तहत जिले में चार सौ से अधिक स्वास्थ्य कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के सभी विभाग इन्हीं कर्मचारियों के भरोसे चलते हैं। प्रदेश सरकार ने बीते दिनों प्रदेश में एनएचएम स्कीम के तहत लगे कर्मचारियों में बीस फीसदी तक की कमी करने का निर्णय लिया था। इसी के विरोध में प्रदेश के एनएचएम कर्मचारी मंगलवार से दो दिन की हड़ताल पर बैठे हुए हैं।
विज्ञापन
नेशनल हेल्थ मिशन यूनियन के जिला संयोजक मनीष यादव ने कहा कि सरकार का यह निर्णय कर्मचारी विरोधी है। उन्होंने कहा कि सरकार एनएचएम कर्मियों को भी आउटसोर्स के तहत लगाना चाहती है। जो कि गलत है। उन्होंने कहा कि सरकार जब तक कर्मचारियों को रेगुलर नहीं करती है, उन्हें समान वेतन समान पर काम की नीति अपनानी चाहिए। इस मौके पर यूनियन प्रधान पंकज यादव, उप-प्रधान संतोष यादव, सुनीता यादव, जयपाल, सतबीर, सतेंद्र एवं प्रवीन सहित सैकड़ों कर्मचारी मौजूद थे।
विज्ञापन
500 में से महज 15 महिलाओं की जांच
हड़ताल के चलते शहर के नागरिक अस्पताल में हर माह की नौ तारीख को होने वाली जांच में 500 में से महज 15 महिलाएं ही पहुंची। इन गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाने का जिम्मा एनएचएमकर्मियों का ही होता है। इनके हड़ताल पर चले जाने से अधिकांश गर्भवती महिलाएं भी अस्पताल तक नहीं पहुंच सकी। जांच में गर्भवती महिलाओं का बीपी, गर्भ में पल रहे बच्चे की पोजीशन, ग्रोथ, ब्लड़ जांच, टीकारण जैसी अनेक जांच की जाती है। नाम नहीं लिखने की शर्त पर यहीं पर मौजूद एक डॉक्टर ने बताया कि इन जांचों के अभाव महिला की जान तक जा सकती है। उन्होंने बताया कि जुलाई माह की नौ तारीख को लगभग छह सौ गर्भवती महिलाएं जांच के लिए पहुंची थी, जिनमें से बीस फीसदी से ज्यादा महिलाओं को परेशानी थी,जिनका उपचार चल रहा है। क्रिटीकल केसों में गर्भवती महिलाओं को लगने वाले हाई रिस्क के टीके लगाने के लिए भी छह में से दो स्वास्थ्य कर्मचारी उपस्थित थे। ऐसे ही हालात एसएनसीयू वार्ड के थे। यहां पर नवजात बच्चों की सुरक्षा भी महज एक स्वास्थ्य कर्मी के भरोसे थी। जबकि यहां पर रूटीन में नौ स्वास्थ्य कर्मी ड्यूटी पर तैनात रहते हैं।
एंबुलेंस की घंटी बजी, जवाब मिला हड़ताल है
जिले में डिलीवरी एवं अन्य आपात स्थिति में लगी एंबुलेंस सेवाएं भी हड़ताल केे चलते सर्वाधिक प्रभावित रही। जिले में 16 एंबुलेंस हैं। इनमें से केवल 9 एंबुलेंस ही चल रही हैं। ऐसे में पांच एंबुलेंस जहां सीएचएसी एवं पीएचसी के पास तो नागरिक अस्पताल के पास चार एंबुलेंस सेवाओं के लिए उपलब्ध है। मंगलवार को हड़ताल के दौरान रेवाड़ी नागरिक अस्पताल स्थित कंट्रोल रूम में डिलीवरी के लिए दस कॉल, रैफर एवं अन्य केस के लिए 15 कॉल एवं एक्सीडेंट के लिए चार कॉल आई। लेकिन एनएचएम कर्मचारियों ने केवल एक्सीडेंट के लिए ही एंबुलेंस को भेजा।
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र लगा ताला, डिप्टी सीएमओ ने संभाला मोर्चा
नागरिक अस्पताल में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने वाले प्रथम तल पर बने कार्यालय में एनएमच कर्मचारियों ने ताला लटकाया हुआ था। कार्यालय के बाहर बढ़ती भीड़ को देखते हुए डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. जेके सैनी ने स्वयं मोर्चा संभाला और लोगों के काम करवाए। गौरतलब है कि इस विभाग में अधिकतर कर्मचारी एनएचएम स्कीम के तहत लगे हुए हैं।
सीएचसी एवं पीएचसी में हालात बद्तर
जिले की सीएचसी एवं पीएचसी में डॉक्टर हो या फिर स्टॉफ नर्स अधिकतर स्टॉफ एनएचएम स्कीम के तहत लगे हुए हैं। यहां पर होने वाली डिलीवरी एवं अन्य अधिकतर केस नागरिक अस्पताल के लिए ही रैफर किए जा रहे थे।
सीएमओ को बुलानी पड़ी प्राइवेट एंबुलेंस
अस्पताल की एंबुलेंस के कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के चलते बिगड़ते हालातों से निपटने के लिए सीएमओ ने प्राइवेट एंबुलेंस को नागरिक अस्पताल में तैनात करवाया। डिलीवरी केसों को देखते हुए सीएमओ को यह व्यवस्था करनी पड़ी।