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रेफर के चक्कर में बेंच पर ही हुई महिला की डिलीवरी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 23 Oct 2016 12:11 AM IST
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ज्यादातर अपने को ऑपरेटिव नेचर के लिए पहचान रखने वाले नागरिक अस्पताल में शनिवार को संवेदनहीनता का मामला सामने आया है। नाहड़ से रेफर होकर कोसली के सरकारी अस्पताल और वहां से रेफर होकर जिले के नागरिक अस्पताल में आने के बाद एक प्रसूता ने स्त्री रोग एवं प्रसूती विभाग के हॉल में बनी बेंच पर ही अपने बच्चे को जन्म दे दिया। नागरिक अस्पताल में डिलीवरी पेन से कराह रही प्रसूता और उसके परिजनों को करीब आधे घंटे तक टरकाया गया। घटना के बाद प्रशासन ने आनन-फानन में जच्चा और बच्चा दोनों को भर्ती किया। दोनों की हालत सामान्य है।
पश्चिम बंगाल से आकर कर रहे मजदूरी
पश्चिम बंगाल के कुशनगर निवासी विपुल पिछले कुछ समय से अपने परिवार के साथ रेवाड़ी जिले के गांव झाड़ोदा में एक ईंट भट्ठे पर मजदूरी करता है। शनिवार सुबह विपुल की पत्नी रोशना (21) को डिलीवरी पेन हुआ। विपुल साले हमीद उल के साथ रोशना को लेकर नाहड़ के अस्पताल में गया। लेकिन चिकित्सकों ने उसकी हालत को देखते हुए कोसली भेज दिया। कोसली के चिकित्सकों ने भी अपना पल्ला झाड़ते हुए उसे रेवाड़ी के नागरिक अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
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आधे घंटे तक नागरिक अस्पताल में टरकाया
रोशना के भाई हमीद उल ने बताया कि उसकी गर्भवती बहन रोशना दर्द से कराह रही थी। करीब नौ बजे अस्पताल पहुंचने के बाद हॉस्पिटल स्टाफ से बहन को तुरंत भर्ती करने के लिए कहा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बल्कि कमरे से बाहर करते हुए लाइन में लगने को कहा। आधे घंटे बाद रोशना ने अस्पताल की बेंच पर ही अपने बच्चे को जन्म दे दिया।
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डिलीवरी पीरियड फुल टाइम था। इसलिए मरीज के आते ही डिलीवरी हो गई। जहां तक डाक्टरों की लापरवाही का सवाल है तो मामले की जांच कराई जाएगी ओर जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ.सुदर्शन पंवार, एसएमओ, नागरिक अस्पताल
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पश्चिम बंगाल से आकर कर रहे मजदूरी
पश्चिम बंगाल के कुशनगर निवासी विपुल पिछले कुछ समय से अपने परिवार के साथ रेवाड़ी जिले के गांव झाड़ोदा में एक ईंट भट्ठे पर मजदूरी करता है। शनिवार सुबह विपुल की पत्नी रोशना (21) को डिलीवरी पेन हुआ। विपुल साले हमीद उल के साथ रोशना को लेकर नाहड़ के अस्पताल में गया। लेकिन चिकित्सकों ने उसकी हालत को देखते हुए कोसली भेज दिया। कोसली के चिकित्सकों ने भी अपना पल्ला झाड़ते हुए उसे रेवाड़ी के नागरिक अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
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आधे घंटे तक नागरिक अस्पताल में टरकाया
रोशना के भाई हमीद उल ने बताया कि उसकी गर्भवती बहन रोशना दर्द से कराह रही थी। करीब नौ बजे अस्पताल पहुंचने के बाद हॉस्पिटल स्टाफ से बहन को तुरंत भर्ती करने के लिए कहा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बल्कि कमरे से बाहर करते हुए लाइन में लगने को कहा। आधे घंटे बाद रोशना ने अस्पताल की बेंच पर ही अपने बच्चे को जन्म दे दिया।
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डिलीवरी पीरियड फुल टाइम था। इसलिए मरीज के आते ही डिलीवरी हो गई। जहां तक डाक्टरों की लापरवाही का सवाल है तो मामले की जांच कराई जाएगी ओर जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ.सुदर्शन पंवार, एसएमओ, नागरिक अस्पताल