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Rewari News: रामसिंहपुरा डंपिंग यार्ड बना कूड़े का पहाड़, नहीं हुआ निस्तारण
Sat, 11 Jan 2025 01:07 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 11 Jan 2025 01:07 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। दिल्ली-जयपुर नेशनल हाईवे-48 पर स्थित रामसिंहपुरा डंपिंग यार्ड में कूड़े का पहाड़ बन गया है लेकिन इसका निस्तारण की प्रक्रिया धीमी गति से चल रही है। इसके लिए नगर परिषद ने तीन माह में दूसरी बार टेंडर लगाया था।
कूड़ा निस्तारण के लिए पहले सितंबर 2024 में टेंडर लगाया गया था। फिर दिसंबर 2025 में टेंडर की प्रक्रिया शुरू की गई थी। करीब 24.23 करोड़ रुपये से कचरे के निस्तारण का कार्य होना है। रामसिंहपुरा में नगर परिषद की जमीन है। यहां अगस्त 2023 में नई फर्म को टेंडर दिया गया था। इस टेंडर के अनुसार गारबेज (कचरा) कलेक्शन और इसकी प्रोसेसिंग (निस्तारण) का इसी फर्म का है। शहर का कूड़ा नगर परिषद के एमआरएफ सेंटर आदि डंपिंग यार्ड पर एकत्र कर रामसिंहपुरा भेजा जा रहा है। यहां ट्रॉमेल से प्रोसेस के बाद सीएनडी वेस्ट यानी पत्थर, मिट्टी, रिसाइकल वेस्ट यानी प्लास्टिक बॉटल व आदि अलग किया जा रहा है। खाद बनाने की प्रक्रिया सिरे नहीं चढ़ पाई है।
डंपिंग यार्ड बावल व धारूहेड़ा नगर निकाय क्षेत्रों के लिए बनाया गया था। बाद में धारूहेड़ा व बावल के लिए अलग टेंडर किए गए, ताकि सभी रामसिंहपुरा पर निर्भर न रहें। रामसिंहपुरा में रेवाड़ी जिले के शहरी क्षेत्र के साथ ही मानेसर व एचएसआईआईडीसी तक का कूड़ा डाला गया है। यहां निस्तारण का काम साथ-साथ होना चाहिए था, लेकिन यह नहीं हो पाया। निस्तारण नहीं होने से यहां कचरे का पहाड़ बन गया है।
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डंपिंग यार्ड में डाले जा रहे कूड़े से क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों के लोगोें को परेशानी हो रही है। हवा चलने पर बदबू फैल जाती है जिससे लोगों का सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इससे बीमारी फैलने की आशंका है। अगस्त 2023 में गांव रामसिंहपुरा के समीप बनाए गए डंपिंग यार्ड को लेकर 20 से अधिक गांवों के ग्रामीणों ने रामसिंहपुरा के मंदिर में महापंचायत की थी। ग्रामीणों के विरोध के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने मौके पर पहुंच जनसुनवाई की थी।
यार्ड में मानेसर का भी कूड़ा डाला जाता है
यहां पर मानेसर तक से कचरा लाकर डाला गया है। कई निकायों का कूड़ा यहां डाले जाने से कूड़े का पहाड़ बन गया है। रेवाड़ी नगर परिषद अब कचरा डालने वाली निकायों से कचरा निस्तारण का खर्च देने की आस लगाए बैठी है। सोनीपत स्थित मुरथल यूनिवर्सिटी (दीनबंधु छोटू राम विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय) की ओर से कराई गई गणना में यहां 2 लाख 85 हजार टन (एक टन का मतलब 1 हजार किलोग्राम) से अधिक का कचरा मिला था। रेवाड़ी, नारनौल, अटेली, धारूहेड़ा, बावल, महेंदगढ़ मानेसर से कूड़ा आता रहा है।
वर्जन
24.23 करोड़ का एस्टीमेट बनाकर मुख्यालय भेजा गया था। रामसिंहपुरा डंपिंग साइट पर कचरे का निस्तारण करने की अनुमति मिल गई है। इसके बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू की गई है।-पूनम यादव, चेयरपर्सन, नगर परिषद रेवाड़ी।
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रेवाड़ी। दिल्ली-जयपुर नेशनल हाईवे-48 पर स्थित रामसिंहपुरा डंपिंग यार्ड में कूड़े का पहाड़ बन गया है लेकिन इसका निस्तारण की प्रक्रिया धीमी गति से चल रही है। इसके लिए नगर परिषद ने तीन माह में दूसरी बार टेंडर लगाया था।
कूड़ा निस्तारण के लिए पहले सितंबर 2024 में टेंडर लगाया गया था। फिर दिसंबर 2025 में टेंडर की प्रक्रिया शुरू की गई थी। करीब 24.23 करोड़ रुपये से कचरे के निस्तारण का कार्य होना है। रामसिंहपुरा में नगर परिषद की जमीन है। यहां अगस्त 2023 में नई फर्म को टेंडर दिया गया था। इस टेंडर के अनुसार गारबेज (कचरा) कलेक्शन और इसकी प्रोसेसिंग (निस्तारण) का इसी फर्म का है। शहर का कूड़ा नगर परिषद के एमआरएफ सेंटर आदि डंपिंग यार्ड पर एकत्र कर रामसिंहपुरा भेजा जा रहा है। यहां ट्रॉमेल से प्रोसेस के बाद सीएनडी वेस्ट यानी पत्थर, मिट्टी, रिसाइकल वेस्ट यानी प्लास्टिक बॉटल व आदि अलग किया जा रहा है। खाद बनाने की प्रक्रिया सिरे नहीं चढ़ पाई है।
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डंपिंग यार्ड बावल व धारूहेड़ा नगर निकाय क्षेत्रों के लिए बनाया गया था। बाद में धारूहेड़ा व बावल के लिए अलग टेंडर किए गए, ताकि सभी रामसिंहपुरा पर निर्भर न रहें। रामसिंहपुरा में रेवाड़ी जिले के शहरी क्षेत्र के साथ ही मानेसर व एचएसआईआईडीसी तक का कूड़ा डाला गया है। यहां निस्तारण का काम साथ-साथ होना चाहिए था, लेकिन यह नहीं हो पाया। निस्तारण नहीं होने से यहां कचरे का पहाड़ बन गया है।
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डंपिंग यार्ड में डाले जा रहे कूड़े से क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों के लोगोें को परेशानी हो रही है। हवा चलने पर बदबू फैल जाती है जिससे लोगों का सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इससे बीमारी फैलने की आशंका है। अगस्त 2023 में गांव रामसिंहपुरा के समीप बनाए गए डंपिंग यार्ड को लेकर 20 से अधिक गांवों के ग्रामीणों ने रामसिंहपुरा के मंदिर में महापंचायत की थी। ग्रामीणों के विरोध के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने मौके पर पहुंच जनसुनवाई की थी।
यार्ड में मानेसर का भी कूड़ा डाला जाता है
यहां पर मानेसर तक से कचरा लाकर डाला गया है। कई निकायों का कूड़ा यहां डाले जाने से कूड़े का पहाड़ बन गया है। रेवाड़ी नगर परिषद अब कचरा डालने वाली निकायों से कचरा निस्तारण का खर्च देने की आस लगाए बैठी है। सोनीपत स्थित मुरथल यूनिवर्सिटी (दीनबंधु छोटू राम विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय) की ओर से कराई गई गणना में यहां 2 लाख 85 हजार टन (एक टन का मतलब 1 हजार किलोग्राम) से अधिक का कचरा मिला था। रेवाड़ी, नारनौल, अटेली, धारूहेड़ा, बावल, महेंदगढ़ मानेसर से कूड़ा आता रहा है।
वर्जन
24.23 करोड़ का एस्टीमेट बनाकर मुख्यालय भेजा गया था। रामसिंहपुरा डंपिंग साइट पर कचरे का निस्तारण करने की अनुमति मिल गई है। इसके बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू की गई है।-पूनम यादव, चेयरपर्सन, नगर परिषद रेवाड़ी।