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कार्यस्थलों पर महिलाओं को दे सुरक्षित माहौल : सीजेएम
Mon, 04 Aug 2025 12:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 04 Aug 2025 12:20 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से एडीआर सेंटर में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम पर कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी व सहसचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अमित वर्मा ने कहा कि कार्यस्थलों पर महिलाओं को सुरक्षित माहौल दें।
प्रथम सत्र पैनल अधिवक्ताओं, पैरा लीगल वालंटियर्स, लीगल एड डिफेंस काउंसिल अधिवक्ताओं एवं मध्यस्थों के लिए था जिसमें पीओएसएच अधिनियम की प्रमुख धाराओं के साथ-साथ किशोर न्याय अधिनियम और मेडिएशन फॉर नेशन बारे में बताया गया।
दूसरा सत्र जिला न्यायालय एवं डीएलएसए रेवाड़ी के स्टाफ सदस्यों के लिए आयोजित किया गया, जिसमें कार्यस्थलों पर आंतरिक शिकायत समिति की भूमिका, शिकायत की प्रक्रिया, समयसीमा, गोपनीयता, एवं संस्थागत जिम्मेदारियों को विस्तार से बताया गया।
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वक्ताओं ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम के तहत यौन उत्पीड़न की परिभाषा, पीड़िता के अधिकार, शिकायत की प्रक्रिया और संस्थागत जिम्मेदारियों पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
वक्ताओं ने यह भी बताया कि किस प्रकार संस्थानों में आईसीसी का गठन अनिवार्य है और शिकायत प्राप्त होने पर 90 दिनों में निष्कर्ष देना तथा 10 दिनों में रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है।
कार्यशाला में संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने प्रश्नों के उत्तर विशेषज्ञों से प्राप्त किए।
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रेवाड़ी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से एडीआर सेंटर में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम पर कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी व सहसचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अमित वर्मा ने कहा कि कार्यस्थलों पर महिलाओं को सुरक्षित माहौल दें।
प्रथम सत्र पैनल अधिवक्ताओं, पैरा लीगल वालंटियर्स, लीगल एड डिफेंस काउंसिल अधिवक्ताओं एवं मध्यस्थों के लिए था जिसमें पीओएसएच अधिनियम की प्रमुख धाराओं के साथ-साथ किशोर न्याय अधिनियम और मेडिएशन फॉर नेशन बारे में बताया गया।
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दूसरा सत्र जिला न्यायालय एवं डीएलएसए रेवाड़ी के स्टाफ सदस्यों के लिए आयोजित किया गया, जिसमें कार्यस्थलों पर आंतरिक शिकायत समिति की भूमिका, शिकायत की प्रक्रिया, समयसीमा, गोपनीयता, एवं संस्थागत जिम्मेदारियों को विस्तार से बताया गया।
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वक्ताओं ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम के तहत यौन उत्पीड़न की परिभाषा, पीड़िता के अधिकार, शिकायत की प्रक्रिया और संस्थागत जिम्मेदारियों पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
वक्ताओं ने यह भी बताया कि किस प्रकार संस्थानों में आईसीसी का गठन अनिवार्य है और शिकायत प्राप्त होने पर 90 दिनों में निष्कर्ष देना तथा 10 दिनों में रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है।
कार्यशाला में संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने प्रश्नों के उत्तर विशेषज्ञों से प्राप्त किए।