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Rewari News: बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे लोग, दो दशक पुरानी समस्या चुनावी वादों में उलझी

Thu, 07 May 2026 01:11 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 07 May 2026 01:11 AM IST
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People struggle for every drop of water, a two-decade-old problem entangled in election promises
रेवाड़ी से गुजरती जेएलएन नहर। संवाद
रेवाड़ी। शहर में पिछले करीब दो दशकों से चली आ रही पानी की किल्लत आज भी जस की तस बनी हुई है। स्थिति यह है कि करीब पौने तीन लाख की आबादी वाले शहर में लोगों को आज भी राशनिंग सिस्टम के तहत पानी की आपूर्ति पर निर्भर रहना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि पिछले दो दशकों से चुनावों में वादे किए जा रहे हैं लेकिन समस्या आज भी बनी हुई है।
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लोग पानी खत्म होने पर बूंद-बूंद के लिए तरस जाते हैं। गर्मी के मौसम में यह समस्या विकराल हो जाती है जिससे आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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लोगों को अपने दैनिक कार्यों के लिए पानी का संग्रह पहले से करना पड़ता है। शेड्यूल के अनुसार नहर में 16 दिन में पानी आता है और 24 दिन बंद रहता है। वर्तमान में कालाका में पांच और लिसाना में तीन वाटर टैंक बने हुए हैं। इन्हीं टैंकों में नहरी पानी का भंडारण कर पूरे शहर में आपूर्ति की जाती है।
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शहर में प्रतिदिन करीब 27.82 मिलियन लीटर पानी की खपत होती है। लिसाना वाटर वर्क्स से प्रतिदिन 5.32 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति की जाती है। कालाका वाटर वर्क्स से प्रतिदिन 22.5 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति होती है। जन स्वास्थ्य विभाग के पास स्टोरेज क्षमता कम होने के कारण शहर को पर्याप्त पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले 20 वर्षों में कई बार इस समस्या के समाधान के दावे किए गए योजनाएं भी बनीं लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस सुधार नजर नहीं आया। बढ़ती आबादी के मुकाबले जलापूर्ति के संसाधनों में पर्याप्त वृद्धि नहीं हो पाई है जिसके चलते समस्या लगातार गहराती जा रही है।


बड़ा टैंक बने तो पेयजल की समस्या हो सकती है ठीक


भाड़ावास गेट निवासी रोहित यादव का कहना है कि एक और बड़ा वाटर टैंक बन जाए तो पेयजल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अतिरिक्त स्टोरेज क्षमता होने से नहर बंद रहने के दिनों में भी नियमित आपूर्ति संभव हो सकेगी।
शास्त्री नगर निवासी विवेक कुमार ने बताया कि वर्तमान में कालाका में पांच और लिसाना में तीन वाटर टैंक बने हैं। इन्हीं टैंकों में नहरी पानी का भंडारण कर पूरे शहर में आपूर्ति की जाती है। बढ़ती आबादी के सामने यह व्यवस्था अपर्याप्त साबित हो रही है।

चुनाव पानी के मुद्दे को लेकर भी लड़ा जा रहा
बता दें कि इस बार चुनाव पानी के मुद्दे को लेकर भी लड़ा जा रहा है। पार्टियां संकल्प पत्र में पानी की समस्या का ऐलान कर चुकी हैं। किसी ने वाटर टैंक बनवाने की बात तो किसी ने पूरी व्यवस्था को सही करने की बात कही है। लोगों का कहना है कि हमेशा से पानी के मुद्दे पर सियासत होती रही है।

नहर में खूबडू हेड से पानी का चलना हुआ बंद:
अभी जवाहरलाल नेहरू नहर में खूबडू हेड से पानी का चलना बंद हो गया है। नहर में पानी रुकने से आने वाले दिनों में शहर की पेयजल व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है। हालांकि, जनस्वास्थ्य विभाग ने स्थिति को संभालने के लिए वैकल्पिक पुख्ता इंतजाम शुरू कर दिए हैं।




वर्जन:
बैकअप स्टॉक से शहर में पानी की सप्लाई दी जा रही है। जरूरत पड़ी तो ही अगले सप्ताह से पानी की आपूर्ति एक दिन छोड़कर या निर्धारित समय सीमा में कटौती के साथ की जा सकती है। शहरवासियों से अपील की है कि वे पानी का सदुपयोग करें ताकि स्टोरेज टैंकों का पानी लंबे समय तक चल सके। नहर में फिलहाल 24 दिन पानी बंद रहता है और 14 दिन पानी चलने का शेड्यूल है।

हेमंत कुमार, कनिष्ठ अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग
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