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Rewari News: बिगड़ी टीबी के मरीजों का अब लंबा इलाज नहीं चलेगा
Thu, 30 Jan 2025 11:23 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 30 Jan 2025 11:23 PM IST
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फोटो : 01नागरिक अस्पताल रेवाड़ी। संवाद
- फोटो : बकेवर में कानपुर आगरा सिक्सलेन हाईवे घटना के बाद लगी भीड़।
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रेवाड़ी। बहुऔषधि प्रतिरोधी तपेदिक (एमडीआर-टीबी) या बिगड़ी टीबी के मरीजों का अब इलाज लंबा नहीं चलेगा। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से नए बदलाव किए गए हैं। जहां पहले मरीजों को 9 से 18 माह तक दवाई लेनी पड़ती थी, मगर अब उन्हें सिर्फ 6 से 9 माह ही दवाई खानी पड़ेगी। मरीजों पर बेहतर प्रभाव मिलने के बाद दवाइयों में बदलाव किया गया है।
इससे पहले स्वास्थ्य विभाग की तरफ से बिगड़ी टीबी के मरीजों का ट्रायल लिया गया था। साथ ही यह जानने की कोशिश की गई थी कि आखिर कैसे लंबा चलने वाला इलाज कम किया जा सकता है। उसके बाद कुछ मरीजों पर इसके ट्रायल के रूप में लिया गया। अब इसके बेहतर परिणाम आए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अब बिगड़ी टीबी के मरीजों के इलाज के दौरान की समय सीमा को काफी हद तक कम कर दिया है। इससे इन मरीजों को यह फायदा होगा कि समय सीमा काफी कम हो जाएगी और बीच में दवाई भी नहीं छोड़नी पड़ेगी। मौजूदा समय में बिगड़ी टीबी के 80 मरीजों की दवा चल रही है। नई दवा के बाद इन मरीजों को भी काफी हद तक राहत हो जाएगी।
दवा छोड़ने की नहीं पड़ेगी जरूरत
उपचार लंबा चलने के कारण काफी मरीज बीच में दवा छोड़ देते थे, जिससे उनको कई परेशानियां उठानी पड़ती थी। बीच में दवा छोड़ने के बाद फिर दोबारा से समस्या होती थी तो उसके बाद रिकवर कर पाना भी काफी मुश्किल हो जाता था। इसे देखते हुए ही स्वास्थ्य विभाग ने मरीज को बेहतर सुविधा देने के लिए नई व्यवस्था लागू की है।
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थोड़ी राहत के बाद दवा बंद करना ठीक नहीं
चिकित्सकों का कहना है कि एमडीआर टीबी उन मरीजों में पनपती है, जो सामान्य टीबी की दवाएं दो-तीन महीने लेने के बाद थोड़ी राहत मिलने पर दवा बंद कर देते हैं। इस स्थिति में रोगी का शरीर टीबी की दवाओं के प्रति रजिस्टेंट (प्रतिरोध) विकसित करने लगता है। इस स्थिति में टीबी की दवाएं रोगी के संक्रमण को नियंत्रित करने में विफल हो जाती है। बिगड़ी टीबी के मरीजों के संपर्क में आने से भी समस्या हो सकती है।
14 साल से अधिक आयु के पीड़ितों को दी जाएगी
रोहतक में नोडल अधिकारियों को ट्रेनिंग भी दी गई है, इसमें रेवाड़ी से टीबी नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. दीपक वर्मा ने भाग लिया था। डॉ. दीपक ने बताया कि नए उपचार में जो भविष्य में इस तरह के पीड़ित आएंगे, उनको इससे फायदा होगा। उनको 6 से 9 माह तक ही दवाई खानी पड़ेगी। नई दवाइयां 14 साल से अधिक आयु के पीड़ितों को दी जाएगी। 14 साल से कम और गर्भवती को यह दवा नहीं दी जाएगी।
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इससे पहले स्वास्थ्य विभाग की तरफ से बिगड़ी टीबी के मरीजों का ट्रायल लिया गया था। साथ ही यह जानने की कोशिश की गई थी कि आखिर कैसे लंबा चलने वाला इलाज कम किया जा सकता है। उसके बाद कुछ मरीजों पर इसके ट्रायल के रूप में लिया गया। अब इसके बेहतर परिणाम आए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अब बिगड़ी टीबी के मरीजों के इलाज के दौरान की समय सीमा को काफी हद तक कम कर दिया है। इससे इन मरीजों को यह फायदा होगा कि समय सीमा काफी कम हो जाएगी और बीच में दवाई भी नहीं छोड़नी पड़ेगी। मौजूदा समय में बिगड़ी टीबी के 80 मरीजों की दवा चल रही है। नई दवा के बाद इन मरीजों को भी काफी हद तक राहत हो जाएगी।
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दवा छोड़ने की नहीं पड़ेगी जरूरत
उपचार लंबा चलने के कारण काफी मरीज बीच में दवा छोड़ देते थे, जिससे उनको कई परेशानियां उठानी पड़ती थी। बीच में दवा छोड़ने के बाद फिर दोबारा से समस्या होती थी तो उसके बाद रिकवर कर पाना भी काफी मुश्किल हो जाता था। इसे देखते हुए ही स्वास्थ्य विभाग ने मरीज को बेहतर सुविधा देने के लिए नई व्यवस्था लागू की है।
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थोड़ी राहत के बाद दवा बंद करना ठीक नहीं
चिकित्सकों का कहना है कि एमडीआर टीबी उन मरीजों में पनपती है, जो सामान्य टीबी की दवाएं दो-तीन महीने लेने के बाद थोड़ी राहत मिलने पर दवा बंद कर देते हैं। इस स्थिति में रोगी का शरीर टीबी की दवाओं के प्रति रजिस्टेंट (प्रतिरोध) विकसित करने लगता है। इस स्थिति में टीबी की दवाएं रोगी के संक्रमण को नियंत्रित करने में विफल हो जाती है। बिगड़ी टीबी के मरीजों के संपर्क में आने से भी समस्या हो सकती है।
14 साल से अधिक आयु के पीड़ितों को दी जाएगी
रोहतक में नोडल अधिकारियों को ट्रेनिंग भी दी गई है, इसमें रेवाड़ी से टीबी नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. दीपक वर्मा ने भाग लिया था। डॉ. दीपक ने बताया कि नए उपचार में जो भविष्य में इस तरह के पीड़ित आएंगे, उनको इससे फायदा होगा। उनको 6 से 9 माह तक ही दवाई खानी पड़ेगी। नई दवाइयां 14 साल से अधिक आयु के पीड़ितों को दी जाएगी। 14 साल से कम और गर्भवती को यह दवा नहीं दी जाएगी।