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माता-पिता बच्चों को नैतिक शिक्षा दें : बुद्धदेव
Sat, 20 Apr 2024 02:45 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 20 Apr 2024 02:45 AM IST
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रेवाड़ी। आर्य समाज के पदाधिकारीगण संगोष्ठी में भाग लेते हुए। स्रोत : संस्था
रेवाड़ी। शहर के सेक्टर-3 स्थित आर्य समाज भवन में संस्कार को लेकर मंथन किया गया। समाज के संरक्षक पूर्व जिला न्यायवादी बुद्धदेव यादव की अध्यक्षता में संगोष्ठी का आयोजन हुआ। बुद्धदेव यादव ने कहा कि भौतिक विकास के साथ-साथ समाज का नैतिक पतन भी हो रहा है। माता-पिता को बच्चों को नैतिक शिक्षा देना चाहिए।
प्रधान सुखदेव आर्य ने कहा कि बच्चे की प्रथम शिक्षिका होने के नाते अच्छे संस्कार देना भी मां का दायित्व है। महासचिव श्रीभगवान ने युवाओं को दी गई अनावश्यक स्वतंत्रता को संस्कारहीनता का कारण बताया। कोषाध्यक्ष ओम प्रकाश कालरा ने पाठशालाओं में नैतिक शिक्षा को अनिवार्य करने पर बल दिया।
प्रवक्ता सरोज यादव ने याद दिलाया कि संयुक्त परिवारों में बच्चे दादा-दादी, चाचा-चाची, नाना-नानी और चचेरे बड़े भाई-बहनों की निगरानी और मार्गदर्शन में रहते थे। परिवार के बुजुर्ग बच्चों को शिक्षाप्रद कहानियां सुनाते थे। अब एकल परिवार के बच्चों को अपेक्षाकृत संस्कार नहीं मिल रहा है। सचिव सुभाषचंद्र अरोड़ा ने बताया कि बच्चों द्वारा चंपक, पराग, बाल प्रभात, बेसिक बाल शिक्षा आदि बाल साहित्यिक पत्रिकाओं से मुंह मोड़ लेना भी नैतिक शिक्षा के अभाव का कारण है।
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प्रधान सुखदेव आर्य ने कहा कि बच्चे की प्रथम शिक्षिका होने के नाते अच्छे संस्कार देना भी मां का दायित्व है। महासचिव श्रीभगवान ने युवाओं को दी गई अनावश्यक स्वतंत्रता को संस्कारहीनता का कारण बताया। कोषाध्यक्ष ओम प्रकाश कालरा ने पाठशालाओं में नैतिक शिक्षा को अनिवार्य करने पर बल दिया।
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प्रवक्ता सरोज यादव ने याद दिलाया कि संयुक्त परिवारों में बच्चे दादा-दादी, चाचा-चाची, नाना-नानी और चचेरे बड़े भाई-बहनों की निगरानी और मार्गदर्शन में रहते थे। परिवार के बुजुर्ग बच्चों को शिक्षाप्रद कहानियां सुनाते थे। अब एकल परिवार के बच्चों को अपेक्षाकृत संस्कार नहीं मिल रहा है। सचिव सुभाषचंद्र अरोड़ा ने बताया कि बच्चों द्वारा चंपक, पराग, बाल प्रभात, बेसिक बाल शिक्षा आदि बाल साहित्यिक पत्रिकाओं से मुंह मोड़ लेना भी नैतिक शिक्षा के अभाव का कारण है।
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