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Rewari News: सरकारी स्कूलों में ग्रांट खर्च पर अब अभिभावक और ग्रामीण रख सकेंगे नजर

Wed, 15 Jul 2026 11:40 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Wed, 15 Jul 2026 11:40 PM IST
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Parents and villagers will now be able to monitor grant expenditure in government schools.
रेवाड़ी। जिले के सरकारी विद्यालयों में अब विकास कार्यों के लिए मिलने वाली सरकारी ग्रांट के खर्च पर अभिभावक और ग्रामीण भी नजर रख सकेंगे। हरियाणा विद्यालय शिक्षा परियोजना परिषद ने ग्रांट के उपयोग में पारदर्शिता लाने करने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत विद्यालयों को मिलने वाली 10 हजार से एक लाख रुपये तक की ग्रांट का पूरा विवरण विद्यालय के सूचना पट्ट पर सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा।
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नई व्यवस्था के अनुसार विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) की अनुमति के बिना ग्रांट की राशि खर्च नहीं की जा सकेगी। एसएमसी की बैठक में यह तय किया जाएगा कि राशि किस कार्य पर खर्च की जाएगी।
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बैठक की कार्रवाई रजिस्टर में दर्ज करना और सभी सदस्यों के हस्ताक्षर कराना भी अनिवार्य रहेगा। इसके अलावा प्रत्येक खरीद का रिकॉर्ड स्टॉक रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा तथा खर्च का ऑडिट भी कराया जाएगा।
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शिक्षा विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से ग्रांट के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ेगी और अनियमितताओं पर रोक लगेगी। साथ ही अभिभावकों और ग्रामीणों की निगरानी से विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं में भी सुधार होगा।
विभाग हर वर्ष विद्यालयों को भवन मरम्मत, पेयजल, बिजली, शौचालयों के रखरखाव, दिव्यांगजन अनुकूल सुविधाओं, परिसर की सफाई, पौधारोपण, खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों, स्टेशनरी और शिक्षण-अधिगम सामग्री सहित अन्य आवश्यक कार्यों के लिए ग्रांट उपलब्ध कराता है। नई व्यवस्था से इन कार्यों की जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों बढ़ेंगी।
छात्र संख्या के आधार पर मिलेगी विद्यालयों को ग्रांट
सरकारी विद्यालयों को अब विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर अनुदान राशि जारी की जाएगी। एक से 30 विद्यार्थियों वाले विद्यालयों को 10 हजार, 31 से 100 तक को 25 हजार, 101 से 250 तक को 50 हजार, 251 से 1000 तक को 75 हजार और 1000 से अधिक विद्यार्थियों वाले विद्यालयों को एक लाख रुपये की ग्रांट मिलेगी। प्राथमिक विद्यालयों में राशि का 10 प्रतिशत स्वच्छता और 20 प्रतिशत शिक्षण सामग्री पर खर्च करना अनिवार्य होगा। माध्यमिक व वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में अन्य विषयों की सामग्री और आधारभूत सुविधाओं पर अधिक राशि खर्च की जाएगी।

वर्जन :
नई व्यवस्था से विद्यालयों को मिलने वाली ग्रांट के खर्च में पारदर्शिता आएगी। अब ग्रामीण और अभिभावक भी देख सकेंगे कि विद्यालय में मिली ग्रांट का उपयोग किस कार्य में किया गया है। सोशल ऑडिट के दौरान भी अभिभावकों और ग्रामीणों को ग्रांट खर्च की जानकारी दी जाती थी। सूचना पट्ट पर विवरण सार्वजनिक करने से विद्यालयों में वित्तीय व्यवस्था और अधिक स्पष्ट होगी तथा लोगों की भागीदारी भी बढ़ेगी।-संतोष तंवर, जिला परियोजना समन्वयक, समग्र शिक्षा।
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