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Rewari News: त्रिवेणी के संगम से मिलेगी ऑक्सीजन, ब्रह्म शक्ति का होगा वास
Fri, 30 Jun 2023 12:39 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 30 Jun 2023 12:39 AM IST
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फोटो : 6
हरियाली को बढ़ावा देने के लिए जिले के 642 सरकारी स्कूलों में लगाए जाएंगे त्रिवेणी के पौधे
-विद्यार्थी और शिक्षक करेंगे खुद देखभाल, स्कूल मुखिया को पत्र भेजकर दिए गए निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। हरियाली को बढ़ावा देने के लिए जिले के 642 सरकारी स्कूलों में न केवल विद्यार्थी बल्कि अध्यापक भी त्रिवेणी लगाकर उसकी देखभाल करेंगे। त्रिवेणी के संगम से आसपास के लोगों भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन मिलेगी। साथ ही ब्रह्म शक्ति का वास भी होगा। एक जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र में स्कूलों में 10 हजार त्रिवेणी लगाने का लक्ष्य रखा गया है। शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में सभी स्कूल मुखिया को पत्र भेजकर निर्देश दिए गए हैं। वहीं, सभी विद्यार्थियों को परिवार में होने वाले किसी भी उत्सव में त्रिवेणी अवश्य लगाने की शपथ भी दिलाई जाएगी।
गर्मियों की छुटि्टयों के बाद एक जुलाई से स्कूल खुल जाएंगे। ऐसे में शिक्षा विभाग ने मानसून सत्र के दौरान सभी स्कूलों में त्रिवेणी के पौधे लगाने का निर्णय लिया है। इसके तीन प्रकार के पौधे होते हैं। बताया जा रहा है कि त्रिवेणी अध्यात्मिकता, ज्ञान, भाई चारा एवं एकता का प्रतीक माना जाता है। स्कूलों में त्रिवेणी यानी पीपल, बरगद व नीम के पौधे लगाने काे लेकर एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए शिक्षक बच्चों को प्रेरित करेंगे। बच्चों को अपने जन्मदिन पर पौधे लगाकर उसकी देखभाल करने का संकल्प भी दिलवाएंगे। इसके साथ शिक्षकों को भी त्रिवेणी लगाने के लिए कहा गया है।
31 जुलाई तक भेजनी होगी रिपोर्ट
शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों में त्रिवेणी लगाने के लिए जिला शिक्षा अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। त्रिवेणी लगाने के बाद शिक्षा निदेशालय को 31 जुलाई तक रिपोर्ट इसकी भेजनी होगी।
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त्रिवेणी लगाने का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व
त्रिवेणी के पेड़ों के धार्मिक व वैज्ञानिक महत्व हैं। धर्म शास्त्र के अनुसार कहा जाता है कि जब इन तीनों का संगम होता और जहां भी होता है तो वहां ब्रह्म शक्ति का निवास होता है। उस स्थान को पवित्र स्थान माना जाता है। ऐसे ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण के हिसाब से ये पेड़ पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन छोड़ते हैं। इनकी छाया भी गहरी होती है। ये पेड़ पर्यावरण की दृष्टि से लाभदायक माने जाते हैं।
वर्जन
-जिले के सभी राजकीय विद्यालयों के मुखिया को त्रिवेणी कार्यक्रम को लेकर निर्देश दे दिए गए हैं। इसको लेकर वन विभाग की ओर से पौधे उपलब्ध करवाये जाएंगे।
-वीरेन्द्र सिंह नारा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
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हरियाली को बढ़ावा देने के लिए जिले के 642 सरकारी स्कूलों में लगाए जाएंगे त्रिवेणी के पौधे
-विद्यार्थी और शिक्षक करेंगे खुद देखभाल, स्कूल मुखिया को पत्र भेजकर दिए गए निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। हरियाली को बढ़ावा देने के लिए जिले के 642 सरकारी स्कूलों में न केवल विद्यार्थी बल्कि अध्यापक भी त्रिवेणी लगाकर उसकी देखभाल करेंगे। त्रिवेणी के संगम से आसपास के लोगों भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन मिलेगी। साथ ही ब्रह्म शक्ति का वास भी होगा। एक जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र में स्कूलों में 10 हजार त्रिवेणी लगाने का लक्ष्य रखा गया है। शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में सभी स्कूल मुखिया को पत्र भेजकर निर्देश दिए गए हैं। वहीं, सभी विद्यार्थियों को परिवार में होने वाले किसी भी उत्सव में त्रिवेणी अवश्य लगाने की शपथ भी दिलाई जाएगी।
गर्मियों की छुटि्टयों के बाद एक जुलाई से स्कूल खुल जाएंगे। ऐसे में शिक्षा विभाग ने मानसून सत्र के दौरान सभी स्कूलों में त्रिवेणी के पौधे लगाने का निर्णय लिया है। इसके तीन प्रकार के पौधे होते हैं। बताया जा रहा है कि त्रिवेणी अध्यात्मिकता, ज्ञान, भाई चारा एवं एकता का प्रतीक माना जाता है। स्कूलों में त्रिवेणी यानी पीपल, बरगद व नीम के पौधे लगाने काे लेकर एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए शिक्षक बच्चों को प्रेरित करेंगे। बच्चों को अपने जन्मदिन पर पौधे लगाकर उसकी देखभाल करने का संकल्प भी दिलवाएंगे। इसके साथ शिक्षकों को भी त्रिवेणी लगाने के लिए कहा गया है।
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31 जुलाई तक भेजनी होगी रिपोर्ट
शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों में त्रिवेणी लगाने के लिए जिला शिक्षा अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। त्रिवेणी लगाने के बाद शिक्षा निदेशालय को 31 जुलाई तक रिपोर्ट इसकी भेजनी होगी।
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त्रिवेणी लगाने का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व
त्रिवेणी के पेड़ों के धार्मिक व वैज्ञानिक महत्व हैं। धर्म शास्त्र के अनुसार कहा जाता है कि जब इन तीनों का संगम होता और जहां भी होता है तो वहां ब्रह्म शक्ति का निवास होता है। उस स्थान को पवित्र स्थान माना जाता है। ऐसे ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण के हिसाब से ये पेड़ पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन छोड़ते हैं। इनकी छाया भी गहरी होती है। ये पेड़ पर्यावरण की दृष्टि से लाभदायक माने जाते हैं।
वर्जन
-जिले के सभी राजकीय विद्यालयों के मुखिया को त्रिवेणी कार्यक्रम को लेकर निर्देश दे दिए गए हैं। इसको लेकर वन विभाग की ओर से पौधे उपलब्ध करवाये जाएंगे।
-वीरेन्द्र सिंह नारा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी