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52 करोड़ से होगा सीवरेज समस्या का समाधान
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Mon, 02 Jan 2017 12:46 AM IST
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रेवाड़ी में लगेगा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शहर के लोगों को तीन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले ट्रीटिड (गंदे) पानी की समस्या से निजात मिल सकती है। पब्लिक हेल्थ अभियांत्रिकी विभाग रेवाड़ी से साबी नदी तक करीब 17 किमी. लंबी एचडीपीई पाइप लाइन डालकर समस्या का समाधान करने की तैयारी में है। पूरी परियोजना पर करीब 52 करोड़ रुपये खर्च आएंगे। विभाग ने प्रोजेक्ट को मंजूरी के लिए मंत्रालय भेज दिया है।
जानकारी के अनुसार नसियाजी रोड स्थित 16 एवं आठ एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) एवं गांव कालूवास स्थित साढ़े छह एमएलडी एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) से प्रतिदिन लाखों लीटर गंदा पानी निकलता है। कालूवास स्थित प्लांट से निकलने वाला गंदा पानी आसपास के खेतों एवं रेलवे लाइन के पास डाला जाता रहा है। स्थानीय लोग इसकी शिकायत सीएम तक कर चुके हैं। गंदे पानी को प्लांट से बाहर नहीं फेंके जाने से प्लांट की इनपुट क्षमता घट जाती है। इससे सीवर ओवरफ्लो होने लगते हैं।
नसियाजी रोड पर बनेगा बड़ा टैंक
साढ़े तीस एमएलडी वाले तीनों प्लांटों से प्रतिदिन लाखों लीटर गंदा पानी निकलता है। शहर में कहीं पर भी गंदे पानी को डालने की जगह नहीं मिलने से ओवरफ्लो एवं खेतों में पानी डालने की समस्या खड़ी होती है। बरसात के दिनों में समस्या विकराल रूप ले लेती है। दो लाख से अधिक आबादी वाले शहर में थोड़ी भी बरसात होती है तो शहर तालाब नजर आता है। योजना के मुताबिक तीन प्लांट से निकलने वाले ट्रीटिड पानी को एक बड़ा टैंक बनाकर एकत्रित किया जाएगा। इस एकत्रित पानी को धारूहेड़ा स्थित साबी नदी में डाला जाएगा। इसके तहत नसियाजी रोड से साबी नदी तक करीब 17 किमी. लंबी पाइप लाइन बिछाई जाएगी।
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पानी का उठान नहीं होने से हो रही है बड़ी समस्या
शहर के 31 वार्डों मेें से प्रतिदिन कहीं न कहीं से सीवर ओवरफ्लो को लेकर प्रदर्शन एवं शिकायतें दर्ज कराई जाती रही हैं। ओवरफ्लो का बड़ा कारण एसटीपी पर पानी का उठान नहीं होना है। यदि प्लांट से समय से ट्रीटिड पानी पाइप के माध्यम से जाता रहेगा तो ओवरफ्लो की समस्या से निजात आसानी से मिल जाएगी। हालांकि शहर में छोटी परिमाप की पाइप लाइन में ओवरफ्लो का बड़ा कारण है।
वर्जन- 52 करोड़ की लागत से 17 किमी. लंबी पाइप लाइन बिछाकर ट्रीटिड़ पानी को साबी नदी तक पहुुंचाने की है। इससे बरसाती पानी एवं सीवर ओवरफ्लो की समस्या से शहरवासियों को फायदा होगा। प्रोजेक्ट बनाकर मंत्री और उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही अप्रूवल मिलने के बाद काम शुरू होगा।
दलबीर सिंह, एसई पब्लिक हेल्थ
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जानकारी के अनुसार नसियाजी रोड स्थित 16 एवं आठ एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) एवं गांव कालूवास स्थित साढ़े छह एमएलडी एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) से प्रतिदिन लाखों लीटर गंदा पानी निकलता है। कालूवास स्थित प्लांट से निकलने वाला गंदा पानी आसपास के खेतों एवं रेलवे लाइन के पास डाला जाता रहा है। स्थानीय लोग इसकी शिकायत सीएम तक कर चुके हैं। गंदे पानी को प्लांट से बाहर नहीं फेंके जाने से प्लांट की इनपुट क्षमता घट जाती है। इससे सीवर ओवरफ्लो होने लगते हैं।
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नसियाजी रोड पर बनेगा बड़ा टैंक
साढ़े तीस एमएलडी वाले तीनों प्लांटों से प्रतिदिन लाखों लीटर गंदा पानी निकलता है। शहर में कहीं पर भी गंदे पानी को डालने की जगह नहीं मिलने से ओवरफ्लो एवं खेतों में पानी डालने की समस्या खड़ी होती है। बरसात के दिनों में समस्या विकराल रूप ले लेती है। दो लाख से अधिक आबादी वाले शहर में थोड़ी भी बरसात होती है तो शहर तालाब नजर आता है। योजना के मुताबिक तीन प्लांट से निकलने वाले ट्रीटिड पानी को एक बड़ा टैंक बनाकर एकत्रित किया जाएगा। इस एकत्रित पानी को धारूहेड़ा स्थित साबी नदी में डाला जाएगा। इसके तहत नसियाजी रोड से साबी नदी तक करीब 17 किमी. लंबी पाइप लाइन बिछाई जाएगी।
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पानी का उठान नहीं होने से हो रही है बड़ी समस्या
शहर के 31 वार्डों मेें से प्रतिदिन कहीं न कहीं से सीवर ओवरफ्लो को लेकर प्रदर्शन एवं शिकायतें दर्ज कराई जाती रही हैं। ओवरफ्लो का बड़ा कारण एसटीपी पर पानी का उठान नहीं होना है। यदि प्लांट से समय से ट्रीटिड पानी पाइप के माध्यम से जाता रहेगा तो ओवरफ्लो की समस्या से निजात आसानी से मिल जाएगी। हालांकि शहर में छोटी परिमाप की पाइप लाइन में ओवरफ्लो का बड़ा कारण है।
वर्जन- 52 करोड़ की लागत से 17 किमी. लंबी पाइप लाइन बिछाकर ट्रीटिड़ पानी को साबी नदी तक पहुुंचाने की है। इससे बरसाती पानी एवं सीवर ओवरफ्लो की समस्या से शहरवासियों को फायदा होगा। प्रोजेक्ट बनाकर मंत्री और उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही अप्रूवल मिलने के बाद काम शुरू होगा।
दलबीर सिंह, एसई पब्लिक हेल्थ