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Rewari News: ऑफर का छूट न देने पर एक मेगा मार्ट को 25 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश

Sat, 21 Dec 2024 11:31 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Sat, 21 Dec 2024 11:31 PM IST
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Order to pay compensation of Rs 25 thousand to a mega mart for not discounting the offer
फोटो : 01जिला उपभोक्ता आयोग रेवाड
संवाद न्यूज एजेंसी
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रेवाड़ी। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष एसके खंडूजा ने ऑफर का छूट न देने पर ब्रास मार्केट स्थित एक मेगा मार्ट को 25 हजार रुपये मुआवजा और छूट की राशि ब्याज समेत शिकायतकर्ता को देने का आदेश दिया है। मामले में मेगा मार्ट की तरफ से कोई पेश नहीं हुआ। इसके चलते आयोग ने एकतरफा फैसला सुनाया।
शिकायतकर्ता शहर निवासी नितेश अग्रवाल ने बताया कि 27 अगस्त 2023 को वह रेवाड़ी के ब्रास मार्केट स्थित एक मेगा मार्ट में खरीदारी के लिए गए थे। वहां उन्होंने चिपकाए गए विशेष राखी ऑफर पंफलेट को देखा। पंफलेट पर 299 रुपये व 329 एमआरपी की दो टी-शर्ट खरीदने पर 150 रुपये की छूट का ऑफर था। उन्होंने 299 रुपये एमआरपी वाली दो जोड़ी टी-शर्ट ब्रिंक रेगुलर खरीदी। चारों टी-शर्ट की कुल कीमत 1196 रुपये एमआरपी बनती थी। 150 रुपये प्रति जोड़ी टी-शर्ट की छूट के हिसाब से कुल 300 रुपये की छूट थी लेकिन एक मेगा मार्ट ने 1076 रुपये लिए और 300 रुपये की छूट की बजाय मात्र 120 रुपये की छूट दी, जो 180 रुपये की अधिक राशि वसूली गई। इस संबंध में अपने अधिवक्ता मोहित जैन के माध्यम से शिकायत दर्ज करवाई थी जिसमें 180 रुपये की राशि ब्याज सहित लौटाने और मुआवजे की मांग की गई। उपभोक्ता आयोग के नोटिस भेजने पर भी एक मेगा मार्ट की ओर से कोई पेश हुआ और ना ही मेगा मार्ट के रजिस्टर्ड ऑफिस से कोई पेश हुआ।
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जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष एसके खंडूजा ने पीड़ित के पक्ष में फैसला सुनाते हुए मेगा मार्ट को 180 रुपये की राशि शिकायत दर्ज करने की तिथि से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 30 दिनों के अंदर लौटाने का आदेश दिया। साथ ही 25 हजार रुपये मानसिक पीड़ा, उत्पीड़न व वाद खर्च के रूप में शिकायतकर्ता को 30 दिनों के अंदर देने के आदेश दिए। उन्होंने फैसले में कहा है कि उपरोक्त 180 रुपये ब्याज सहित व 25 हजार की मुआवजा राशि 30 दिनों के अंदर न देने पर शिकायतकर्ता को अधिकार होगा कि वह मुकदमे में 9 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज भी लगेगा और इस आयोग के आदेश का अनुपालन न करने के लिए 1 लाख रुपये तक का जुर्माना व 3 साल तक की सजा या दोनों सजा का प्रावधान है।
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