{"_id":"68dc231330779f6c8005acda","slug":"on-ashtami-worship-the-girl-child-and-praise-the-goddess-rewari-news-c-198-1-rew1001-226621-2025-10-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: अष्टमी पर कन्या पूजन कर की देवी की स्तुति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: अष्टमी पर कन्या पूजन कर की देवी की स्तुति
Wed, 01 Oct 2025 12:06 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 01 Oct 2025 12:06 AM IST
विज्ञापन
फोटो : 29सरस्वती विहार में प्रसाद ग्रहण करने पहुंचीं कंजक। संवाद
रेवाड़ी। दुर्गा अष्टमी पर मंगलवार को घर-घर देवी स्वरूप कन्याओं का पूजन (कंजक पूजन) कर देवी दुर्गा की स्तुति की गई। इससे पहले श्रद्धालुओं ने मंदिरों में मां की पूजा कर सुख समृद्धि की कामना की।
दुर्गा अष्टमी पर मंदिरों में दर्शन पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। श्रद्धालुओं ने देवी को चुनरी और नारियल चढ़ाया। महिलाओं ने कड़ाही चढ़ाई ।
कंजक पूजन शुरू करने के लिए सबसे पहले महिलाओं ने कन्याओं का पैर धोकर उन्हें साफ तौलिये से जरूर पोछा। इसके बाद उनके पैरों में लाल रंग लगाकर शृंगार किया। इसके बाद फूल-माला चढ़ाया गया। इसके साथ ही रोली-अक्षत, दीप दिखाना चाहिए कन्याओं को भोजन कराया गया।
विज्ञापन
व्रत के दौरान उपस्थित लोगों को प्रसाद वितरित किया गया। उन्होंने जरूरतमंदों को दान और दक्षिणा भी दी। व्रत के शुभारंभ के अवसर पर उपहार वितरण भी किया गया, जिससे माहौल और भी पावन और सजीव बन गया। सरस्वती विहार निवासी उर्मिला वशिष्ठ ने बताया कि
आयोजन में बच्चे विशेष रूप से शामिल हुए। उन्होंने व्रत की महत्ता और देवी दुर्गा के महत्व को समझने के लिए पूजा-अर्चना में भाग लिया। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से परिवारों और समुदाय में भाईचारे और सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत करने का प्रयास किया गया।
उर्मिला वशिष्ठ ने बताया कि दुर्गा अष्टमी पर यह व्रत मनाना पारंपरिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि इस पर्व पर माता की पूजा-अर्चना के साथ दान-पुण्य और सामाजिक सहयोग का भी विशेष ध्यान रखा जाए।
इस प्रकार, अष्टमी व्रत का आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को जीवित रखने का माध्यम बना, बल्कि समाज में आपसी सहयोग और सांस्कृतिक जागरूकता को भी बढ़ावा दिया।
विज्ञापन
दुर्गा अष्टमी पर मंदिरों में दर्शन पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। श्रद्धालुओं ने देवी को चुनरी और नारियल चढ़ाया। महिलाओं ने कड़ाही चढ़ाई ।
विज्ञापन
कंजक पूजन शुरू करने के लिए सबसे पहले महिलाओं ने कन्याओं का पैर धोकर उन्हें साफ तौलिये से जरूर पोछा। इसके बाद उनके पैरों में लाल रंग लगाकर शृंगार किया। इसके बाद फूल-माला चढ़ाया गया। इसके साथ ही रोली-अक्षत, दीप दिखाना चाहिए कन्याओं को भोजन कराया गया।
विज्ञापन
व्रत के दौरान उपस्थित लोगों को प्रसाद वितरित किया गया। उन्होंने जरूरतमंदों को दान और दक्षिणा भी दी। व्रत के शुभारंभ के अवसर पर उपहार वितरण भी किया गया, जिससे माहौल और भी पावन और सजीव बन गया। सरस्वती विहार निवासी उर्मिला वशिष्ठ ने बताया कि
आयोजन में बच्चे विशेष रूप से शामिल हुए। उन्होंने व्रत की महत्ता और देवी दुर्गा के महत्व को समझने के लिए पूजा-अर्चना में भाग लिया। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से परिवारों और समुदाय में भाईचारे और सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत करने का प्रयास किया गया।
उर्मिला वशिष्ठ ने बताया कि दुर्गा अष्टमी पर यह व्रत मनाना पारंपरिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि इस पर्व पर माता की पूजा-अर्चना के साथ दान-पुण्य और सामाजिक सहयोग का भी विशेष ध्यान रखा जाए।
इस प्रकार, अष्टमी व्रत का आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को जीवित रखने का माध्यम बना, बल्कि समाज में आपसी सहयोग और सांस्कृतिक जागरूकता को भी बढ़ावा दिया।