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Rewari News: शहर में बढ़ी कुत्तों की संख्या, रोज डॉग बाइट के 40 मरीज आ रहे

Sat, 15 Feb 2025 12:26 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Sat, 15 Feb 2025 12:26 AM IST
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Number of dogs increased in the city, 40 dog bite patients are coming every day.
संवाद न्यूज एजेंसी
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रेवाड़ी। शहर में बेसहारा कुत्तों की संख्या बढ़ने से डॉग बाइट की घटनाएं भी बढ़ी हैं। जिला अस्पताल में हर रोज डॉग बाइट के 40 मरीज आ रहे हैं। पिछले एक वर्ष 1100 से 1200 के करीब मरीजों को एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई जा चुकी है।
जिले में कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कहीं बेसहारा कुत्ते तो पालतू कुत्ते भी लोगों पर हमला कर रहे हैं। यही कारण है कि जिला अस्पताल में कमरा नंबर 11 के बाहर कुत्ते के काटने के मरीजों की लंबी कतार लगी रहती है। इन दिनों शहर से लेकर गांवों तक में आवारा कुत्ते झुंड में दिखाई देते हैं। प्रशासन की ओर से कुत्तों की नसबंदी पर जोर नहीं दिया जा रहा है, जिससे इनकी तादाद ओर बढ़ती जा रही है। अधिकारी जिम्मेदारी से कतरा रहे हैं। मेडिसिन स्टोर इंचार्ज धर्मेंद्र ने बताया कि छह महीने कुत्ते के काटने के ज्यादा मरीज आते हैं। इसलिए बरसात और सर्दियों के दिनों में एंटी रेबीज वैक्सीन की खपत बढ़ जाती है। जिला अस्पताल में रोजाना 40 से अधिक कुत्ते के काटने इंजेक्शन लगते हैं।
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पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विनोद यादव ने बताया कि साल में छह महीने कुत्तों के प्रजनन के होते हैं। बरसात और सर्दियों के दिनों में कुत्ते हीट पर होते हैं। जिसकी वजह से कुत्ते झुंड में दिखाई देते हैं। इस समय अगर इन्हें कोई छेड़ता है तो यह हमला कर देते हैं। यही वजह है सर्दियों के दिनों में कुत्ते के काटने के केस बढ़ जाते हैं। हालांकि वैसे कुत्ते हमला नहीं करते, अगर कोई कुत्ता पागल हो जाए तो वह काटता है।
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भारी पड़ सकती है थोड़ी सी लापरवाही
रेबीज जानलेवा बीमारी है। किसी व्यक्ति में रेबीज के वायरस होते हैं तो लक्षण दिखने तक इलाज का समय निकल चुका होता है। कुत्ते, बिल्ली, बंदर आदि कई जानवरों के काटने से लार का संपर्क जब व्यक्ति के खून से होता है तो ये वायरस फैलता है। रेबीज से ग्रसित व्यक्ति में लक्षण बहुत दिनों के बाद उभरते हैं। रेबीज के आम लक्षण में बुखार आना, सिरदर्द, घबराहट या बेचैनी, खाना-पीना निगलने में कठिनाई, बहुत अधिक लार निकलना, पानी से डर लगना, पागलपन के लक्षण, अनिद्रा, एक अंग में लकवा होना आदि प्रमुख हैं।

जानवर की निगरानी जरूरी

ज्यादातर लोगों में रेबीज के लक्षण चार से आठ सप्ताह में विकसित होने लगते हैं। रेबीज से संक्रमित जानवर किसी की गर्दन या सिर के आसपास काटता है तो लक्षण तेजी से उभरते हैं क्योंकि वायरस व्यक्ति के दिमाग तक जल्दी पहुंच जाते हैं। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को जानवर ने काटा है, तो उसे जल्द से जल्द चिकित्सक से मिलना चाहिए और एंटीरेबीज टीके लगवाने चाहिए। काटने वाले पशु की निगरानी करनी चाहिए। 14 दिन के अंदर वह पशु मर जाता है तो स्थिति खतरनाक साबित होगी।


वर्जन:
रेबीज को लेकर लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। एंटी रेबीज टीकों की कोई कमी नहीं है। किसी जानवर के काटने पर तुरंत व्यक्ति को प्राथमिक उपचार घर पर कर लेना चाहिए ताकि जहर फैलने से रोका जा सके। 24 घंटे के अंदर टिटनेस का टीका जरूर लगवा लें।-डॉ. धर्मेंद्र, एसएमओ, नागरिक अस्पताल।
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