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Rewari News: एनजीटी में साहबी नदी से जुड़ी याचिका पर अब सुनवाई 26 को, सरकार ने दाखिल किया जवाब
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फोटो : 10साहबी नदी की मौजूदा स्थिति। स्रोत : ग्रामीण
धारूहेड़ा। खरखड़ा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश यादव की तरफ से साहबी नदी में प्रदूषित पानी छोड़े जाने के मामले में दाखिल याचिका पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण में सुनवाई हुई। मामले में हरियाणा सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने एनजीटी के आदेशानुसार जवाब और शपथपत्र दाखिल किया है।
प्रकाश यादव ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि जिले के खरखड़ा और खालियावास क्षेत्र में साहबी नदी के खाली भाग में गंदा पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे आसपास जलभराव हो रहा है और भूमिगत जलस्तर भी दूषित हो रहा है। यह याचिका मई 2022 में भेजी गई थी, जिस पर एनजीटी ने सितंबर 2022 में संज्ञान लिया था।
एनजीटी ने 12 फरवरी 2025 को हुई सुनवाई में हरियाणा सरकार से नदी की सीमाओं, रास्ते और वर्तमान स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी थी। विभाग द्वारा प्रस्तुत उत्तर में बताया गया कि साहबी नदी हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली से होकर गुजरती है। इसके हरियाणा वाले हिस्से को फिलहाल औरंगपुर लिंक ड्रेन और आउटफॉल ड्रेन नंबर 8 के नाम से जाना जाता है।
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विभाग ने यह भी जानकारी दी है कि इन नालों का नाम दोबारा साहबी नदी रखने के लिए एक प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है, जिस पर 1 मई को अंतिम रूप से कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया था। साथ ही नदी के पूरे रूट की पुष्टि के लिए सर्वे आफ इंडिया से नक्शा मांगा गया है। यह जवाब अधीक्षण अभियंता जयप्रकाश तंवर द्वारा 13 मई को रेवाड़ी में शपथपूर्वक दाखिल किया गया।
प्रदूषण से जूझ रही साहबी नदी को बचाने की दिशा में यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब देखना होगा कि एनजीटी इस पर आगे क्या कदम उठाता है।
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प्रकाश यादव ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि जिले के खरखड़ा और खालियावास क्षेत्र में साहबी नदी के खाली भाग में गंदा पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे आसपास जलभराव हो रहा है और भूमिगत जलस्तर भी दूषित हो रहा है। यह याचिका मई 2022 में भेजी गई थी, जिस पर एनजीटी ने सितंबर 2022 में संज्ञान लिया था।
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एनजीटी ने 12 फरवरी 2025 को हुई सुनवाई में हरियाणा सरकार से नदी की सीमाओं, रास्ते और वर्तमान स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी थी। विभाग द्वारा प्रस्तुत उत्तर में बताया गया कि साहबी नदी हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली से होकर गुजरती है। इसके हरियाणा वाले हिस्से को फिलहाल औरंगपुर लिंक ड्रेन और आउटफॉल ड्रेन नंबर 8 के नाम से जाना जाता है।
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विभाग ने यह भी जानकारी दी है कि इन नालों का नाम दोबारा साहबी नदी रखने के लिए एक प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है, जिस पर 1 मई को अंतिम रूप से कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया था। साथ ही नदी के पूरे रूट की पुष्टि के लिए सर्वे आफ इंडिया से नक्शा मांगा गया है। यह जवाब अधीक्षण अभियंता जयप्रकाश तंवर द्वारा 13 मई को रेवाड़ी में शपथपूर्वक दाखिल किया गया।
प्रदूषण से जूझ रही साहबी नदी को बचाने की दिशा में यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब देखना होगा कि एनजीटी इस पर आगे क्या कदम उठाता है।