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Rewari News: कन्या पूजन के साथ संपन्न हुए नवरात्र
Tue, 20 Oct 2026 12:34 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 20 Oct 2026 12:34 AM IST
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कन्याओं को भोजन कराकर आशीर्वाद लेते दिनेश सोनी। संवाद
रेवाड़ी। नवरात्र के अंतिम दिन शहर में श्रद्धालुओं ने कन्या पूजन कर व्रत का समापन किया। लोगों ने घरों में कन्याओं को आमंत्रित कर उनके पैर धोए, तिलक लगाया और भोजन कराकर आशीर्वाद लिया। इसी के साथ नौ दिन तक चलने वाले नवरात्र पर्व का समापन हो गया।
शहर के विभिन्न मंदिरों में भी सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ रही। भक्तों ने मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की और व्रत खोले। आदर्श नगर स्थित मंदिर में भंडारे का आयोजन भी किया गया।
आदर्श नगर मंदिर के पंडित वेद प्रकाश ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कन्या पूजन के बिना नवरात्र व्रत अधूरा माना जाता है। नवमी तिथि पर मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ श्रद्धालु छोटी कन्याओं को देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक मानकर पूजन करते हैं।
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कन्या पूजन के साथ भैरव बाबा की पूजा की भी परंपरा है। कुछ श्रद्धालु दो बालकों को भोजन कराते हैं और उन्हें भैरव बाबा तथा भगवान गणेश का स्वरूप मानते हैं। मान्यता है कि कन्या पूजन और भैरव पूजन से व्रत पूर्ण होता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
श्रद्धालु मधु, कविता और सोनिया ने बताया कि वे हर साल नवरात्र में व्रत रखती हैं और नवमी पर कन्या पूजन करती हैं। इस परंपरा से उन्हें खुशी मिलती है। रानी ने बताया कि उन्होंने भी हर साल की तरह इस बार कन्या पूजन कर व्रत पूरा किया। वहीं सुनीता ने कहा कि कन्या पूजन नवरात्र की परंपरा का अहम हिस्सा है। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा से परिवार की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना की।
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शहर के विभिन्न मंदिरों में भी सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ रही। भक्तों ने मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की और व्रत खोले। आदर्श नगर स्थित मंदिर में भंडारे का आयोजन भी किया गया।
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आदर्श नगर मंदिर के पंडित वेद प्रकाश ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कन्या पूजन के बिना नवरात्र व्रत अधूरा माना जाता है। नवमी तिथि पर मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ श्रद्धालु छोटी कन्याओं को देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक मानकर पूजन करते हैं।
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कन्या पूजन के साथ भैरव बाबा की पूजा की भी परंपरा है। कुछ श्रद्धालु दो बालकों को भोजन कराते हैं और उन्हें भैरव बाबा तथा भगवान गणेश का स्वरूप मानते हैं। मान्यता है कि कन्या पूजन और भैरव पूजन से व्रत पूर्ण होता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
श्रद्धालु मधु, कविता और सोनिया ने बताया कि वे हर साल नवरात्र में व्रत रखती हैं और नवमी पर कन्या पूजन करती हैं। इस परंपरा से उन्हें खुशी मिलती है। रानी ने बताया कि उन्होंने भी हर साल की तरह इस बार कन्या पूजन कर व्रत पूरा किया। वहीं सुनीता ने कहा कि कन्या पूजन नवरात्र की परंपरा का अहम हिस्सा है। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा से परिवार की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना की।