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Rewari News: गुप्त नवरात्र में पूजा-अर्चना से मां भगवती की बनी रहती है कृपा
Sat, 17 Jun 2023 11:54 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 17 Jun 2023 11:54 PM IST
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रेवाड़ी। आषाढ़ महीने के गुप्त नवरात्र 19 जून पड़वा के दिन से शुरू हो रहे हैं, जो 27 जून भड़ली नवमी तक रहेंगे। इन नौ दिनों के दौरान आदिशक्ति की पूजा-अर्चना के साथ जगन्नाथ रथयात्रा और विनायकी चतुर्थी पर्व भी मनाए जाएंगे। नवरात्र का समापन भड़ली नवमी पर होगा। यह दिन अबूझ मुहूर्त वाला है। विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए शुभ योग रहेंगे। इस दौरान पूजा अर्चना से मां भगवती की कृपा बनी रहती है।
शहर के धारूहेड़ा चुंगी स्थित ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री ने बताया कि इस नवरात्र में गुप्त अनुष्ठान करने से सिद्धि प्राप्त होती है। साथ ही मां भगवती की कृपा बनी रहती है।
नवरात्र में दुर्गासप्तशती का पाठ, दुर्गा चालीसा, देवी मंत्र का जप करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। दुर्गा सप्तशती व्यास जी द्वारा रचित मार्कंडेय पुराण से ली गई है। इसमें 700 श्लोक व 13 अध्यायों का समावेश होने के कारण इसे सप्तशती का नाम दिया गया है। उन्होंने कहा कि तंत्र शास्त्रों में इसका सर्वाधिक महत्व प्रतिपादित है और तांत्रिक क्रियाओं का इसके पाठ में बहुधा उपयोग होता है। दुर्गा सप्तशती में 360 शक्तियों का वर्णन है। शास्त्री ने बताया है कि शक्ति पूजन के साथ भैरव पूजन भी अनिवार्य है। दुर्गा सप्तशती का हर मंत्र ब्रह्म वशिष्ठ विश्वामित्र ने साबित किया है, शापोद्धार के बिना पाठ का फल नहीं मिलता दुर्गासप्तशती के 6 अंगों सहित पाठ करना चाहिए। कवच, अर्गला, कीलक और तीनों रहस्य महाकाली महालक्ष्मी व महासरस्वती का रहस्य बताया गया है। दुर्गा सप्तशती के चरित्र का क्रमानुसार पाठ करने से शत्रुनाश और लक्ष्मी की प्राप्ति व सर्वदा विजय होती है, सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है।
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ज्योतिषाचार्य के अनुसार कलश-घटस्थापना देवीपुराण में द्विस्वभाव लग्नयुक्त प्रात:काल देवी का आह्वान व पूजन करने का विधान है। द्विस्वभाव मिथुनलग्न प्रात: अमृतकाल 5:16 से 7:30 तक, शुभ चौघड़िया प्रात: 8:55 से 10:40 तक रहेगी।
नवरात्रि में देवी मां को शृंगार का समान चढ़ाना चाहिए। नारियल और गुड़हल का फूल चढ़ाने से मां भगवती प्रसन्न हो जाती हैं। सभी मनोकामना पूर्ण करती हैं।
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शहर के धारूहेड़ा चुंगी स्थित ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री ने बताया कि इस नवरात्र में गुप्त अनुष्ठान करने से सिद्धि प्राप्त होती है। साथ ही मां भगवती की कृपा बनी रहती है।
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नवरात्र में दुर्गासप्तशती का पाठ, दुर्गा चालीसा, देवी मंत्र का जप करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। दुर्गा सप्तशती व्यास जी द्वारा रचित मार्कंडेय पुराण से ली गई है। इसमें 700 श्लोक व 13 अध्यायों का समावेश होने के कारण इसे सप्तशती का नाम दिया गया है। उन्होंने कहा कि तंत्र शास्त्रों में इसका सर्वाधिक महत्व प्रतिपादित है और तांत्रिक क्रियाओं का इसके पाठ में बहुधा उपयोग होता है। दुर्गा सप्तशती में 360 शक्तियों का वर्णन है। शास्त्री ने बताया है कि शक्ति पूजन के साथ भैरव पूजन भी अनिवार्य है। दुर्गा सप्तशती का हर मंत्र ब्रह्म वशिष्ठ विश्वामित्र ने साबित किया है, शापोद्धार के बिना पाठ का फल नहीं मिलता दुर्गासप्तशती के 6 अंगों सहित पाठ करना चाहिए। कवच, अर्गला, कीलक और तीनों रहस्य महाकाली महालक्ष्मी व महासरस्वती का रहस्य बताया गया है। दुर्गा सप्तशती के चरित्र का क्रमानुसार पाठ करने से शत्रुनाश और लक्ष्मी की प्राप्ति व सर्वदा विजय होती है, सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है।
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ज्योतिषाचार्य के अनुसार कलश-घटस्थापना देवीपुराण में द्विस्वभाव लग्नयुक्त प्रात:काल देवी का आह्वान व पूजन करने का विधान है। द्विस्वभाव मिथुनलग्न प्रात: अमृतकाल 5:16 से 7:30 तक, शुभ चौघड़िया प्रात: 8:55 से 10:40 तक रहेगी।
नवरात्रि में देवी मां को शृंगार का समान चढ़ाना चाहिए। नारियल और गुड़हल का फूल चढ़ाने से मां भगवती प्रसन्न हो जाती हैं। सभी मनोकामना पूर्ण करती हैं।