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बाल भवन में लिफ्ट नहीं, कागजों में लिफ्ट ऑपरेटर.

Thu, 26 May 2016 12:40 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला
ब्यूरो /अमर उजाला Updated Thu, 26 May 2016 12:40 AM IST
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lift in not fix in bal bhawan,  lift oprater appoint in paper
बाल भवन में कहीं लिफ्ट लगी ही नहीं है - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
 दो मंजिल के बाल भवन में सालों से लिफ्ट ऑपरेटर की पोस्ट है और पेमेंट देने के साथ ही ऑपरेटर की पोस्ट बकायदा एक्सटेंड भी होती है, लेकिन ये सब कागजों में है। हकीकत में बाल भवन में कहीं लिफ्ट लगी ही नहीं है। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ने इस मामले के साथ ही अन्य मामलों में लाखों के गबन की शिकायत करते हुए राज्य बाल कल्याण परिषद के महासचिव को साक्ष्य समेत शिकायत भेजते हुए कार्रवाई की मांग की है।
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दिसंबर 2015 तक बढ़ाई गई नियुक्ति
जनवरी 2015 में जिला बाल कल्याण अधिकारी की ओर से भेजे गए नियुक्ति पत्र के मुताबिक नंगली गोधा निवासी रिसाल सिंह की लिफ्ट ऑपरेटर के पद पर नियुक्ति 5 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2015 तक बढ़ाई गई है। जिसकी प्रति भी उपायुक्त को भेजी गई थी। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि बाल भवन में लिफ्ट न होने के बावजूद लिफ्ट ऑपरेटर कहां रखा गया।
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कंप्यूटर सेंटर के नाम पर भी बड़ा गोलमाल
-इसके अलावा 2007-08 में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा योजना के तहत बकायदा बालभवन में कंप्यूटर सेंटर भी खोला गया। आर्थिक रूप से पिछड़े बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा निशुल्क नहीं दी जा रही बल्कि उनसे 1200 रुपए प्रतिमाह की फीस वसूली जा रही है। शुरूआत से ही धारूहेड़ा की एक फर्म प्राप्त फीस को साझेदारी करार के तहत वसूल करती है। यह एजेंसी बाल कल्याण परिषद को फीस का मात्र 30 प्रतिशत हिस्सा देती है जबकि कंप्यूटर शिक्षक, बिजली व भवन का खर्चा बाल कल्याण परिषद वहन करता है।
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25 मई तक रिपोर्ट भेजने के थे निर्देश
मामले की शिकायत तत्कालीन भाजपा जिलाध्यक्ष सतीश खोला ने हरियाणा राज्य  बाल कल्याण परिषद से की थी। जिसके बाद जनरल सेकेट्री ने 16 मई 2016 को उपायुक्त को भेजे पत्र में पूर्व जिलाध्यक्ष सतीश खोला को जांच में शामिल कर 25 मई तक रिपोर्ट मांगी थी। शिकायतकर्ता सतीश खोला का आरोप है कि जांच में उन्हें शामिल ही नहीं किया गया।


शिकायतें मेरे कार्यकाल से पहले की हैं। बावजूद इनके हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद की ओर से आए पत्र के बाबत जांच एडीसी के पास थी। उनका ट्रांसफर होने के बाद अब वह खुद जांच कर रहे हैं। जल्द ही रिपोर्ट भेज दी जाएगी। वहीं लिफ्ट न होने के बावजूद लिफ्ट ऑपरेटर होने की शिकायत मेरे संज्ञान में ही नहीं है।
-डॉ.यश गर्ग, उपायुक्त, जिला रेवाड़ी।
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