{"_id":"57dc492d4f1c1b447fd481dc","slug":"liesence-industry-rewari-fine-punishment","type":"story","status":"publish","title_hn":"लाइसेंस नहीं लिया तो होगा पांच लाख का जुर्माना, सजा भी होगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लाइसेंस नहीं लिया तो होगा पांच लाख का जुर्माना, सजा भी होगी
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Sat, 17 Sep 2016 01:04 AM IST
विज्ञापन
रजिस्ट्रेशन के लिए लगी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले में खाद्य पदार्थों से जुड़े छोटे-बड़े कारोबारियों ने यदि जल्द ही लाइसेंस नहीं लिया तो ऐसे प्रतिष्ठानों पर पांच लाख तक का जुर्माना एवं एक साल तक की सजा हो सकती है। केंद्र सरकार की ओर से लाइसेंस लेने की समय सीमा में बढ़ोतरी की मांग ठुकराने के बाद हरियाणा स्वास्थ्य विभाग की ओर से कार्रवाई का निर्णय लिया गया है।
गौरतलब है कि भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) एक्ट 2006 के बाद खाद्य पदार्थों से जुड़े सभी कारोबारियों को लिए लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन लेना अनिवार्य किया गया था। लेकिन जिले में इस करोबार से पांच हजार से जुड़े कारोबारियों के बावजूद अभी तक नाम मात्र के व्यापारियों ने ही लाइसेंस एवं रेजिस्ट्रेशन कराया है।
आठ बार के बाद अब नहीं मिलेगा अतिरिक्त समय
2006 में एक्ट बनने के बाद कईं राज्यों के व्यापारिक संगठनों के विरोध के बाद प्रदेश सरकार तीन-तीन महीने करके कार्रवाई की तारीख को आठ बार बढ़ा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार सरकार द्वारा बढ़ाई गई समय सीमा अप्रैल महीने में समाप्त हो चुकी है। केंद्र सरकार की मना के बाद हरियाणा सरकार ने भी व्यापारियों के लिए लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है।
विज्ञापन
इन यूनिटों को लाइसेंस लेेना अनिवार्य
-एफएसएसएआई एक्ट के अनुसार खाद्य पदार्थों को स्वास्थ्य के हिसाब से मानक निर्धारण करने के लिए मैन्यूफैक्चरिंग, स्टोरेज, वितरण, सेल एवं एक्सपोर्ट एवं इंपोर्ट सहित वे सभी चीजें जो लोगों द्वारा खाने-पीने में यूज की जा रही हैं। इन सभी कारोबारियों को लाइसेंस या फिर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। एक्ट के अनुसार 12 लाख तक सेल वाले कारोबारी 100 रुपये एक साल के लिए देकर लाइसेंस ले सकते हैं। वहीं 12 लाख से उपर एवं बीस करोड़ तक की सेल वाले कारोबारी दो हजार रुपये देकर एक साल के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। गौरतलब है कि 12 लाख तक लाइसेंस एवं इससे ऊपर रजिस्ट्रेशन कराने की आवश्यकता पड़ती है।
जिले में महज 300 रजिस्ट्रेशन
एक आंकड़े के अनुसार जिले में करीब साढ़े पांच हजार खाद्य पदार्थों से जुड़े कारोबारी हैं। बावजूद इसके अभी तक महज 300 कारोबारियों ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है। इसी के साथ 300 ने लाइसेंस लिए हुए हैं। अकेले शहर में ही करीब ढाई हजार खाद्य पदार्थों से जुड़े कारोबारी हैं। नियम के मुताबिक रेहड़ी से लेकर बड़े कारोबारियों तक को लाइसेंस या फिर रजिस्ट्रेशन लेने की आवश्यकता पड़ती है।
ये होंगे फायदे
स्वास्थ्य विभाग की ओर से लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन कराने के लिए ऑनलाइन सुविधा की हुई है। पंजीकरण के बाद किसी भी गड़बड़ी के होने पर व्यापारी कोर्ट में अपना पक्ष रख सकते हैं,जबकि लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन नहीं होने पर सीधे कार्रवाई होगी। स्वास्थ्य विभाग के पास डाटा होने पर व्यापारियों पर लोगों को खाद्य पदार्थों की सेफ्टी का जिम्मा बढ़ जाएगा। इसके बाद कोई भी व्यापारी केवल अपने फायदे के लिए लोगों को जहर नहीं खिला सकता,उसे मानकों का पालन करना पड़ेगा।
नमूने फेल होने पर पच्चीस लोगों के खिलाफ कार्रवाई
-जिला फूड सेफ्टी ऑफिसर एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ओर से लिए गए अनेकों सैंपल में से अभी तक केवल 25 लोगों के खिलाफ ही कार्रवाई हो पाई है। जिनमें से एडीसी की कोर्ट की ओर से एक हजार से लेकर 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया है। खाद्य पदार्थों के नमूने सब स्टैंडर्ड मिस ब्रांड पाए जाने पर एडीसी की कोर्ट द्वारा अधिकतम पांच लाख का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं अनसेफ पाए जाने पर मामला सीजीएम कोर्ट में जाएगा।
पांचों सीचएसी कर सकती हैं कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा विभाग में डीलिंग क्लर्क ने बताया कि रेवाड़ी में एफएसओ एवं डीएचओ खाद्य पदार्थ के नमूने लेकर कार्रवाई कर सकते हैं। इसी के साथ जिले की सभी पांच सीएचसी के एसएमओ भी नमूने लेकर कार्रवाई करने के लिए अधिकृत हैं।
-----------
वर्जन
जिले में हजारों की संख्या में खाद्य पदार्थों से जुड़े कारोबारी हैं। बावजूद इसके अभी तक नाम मात्र ने ही लाइसेंस लिए हैं। प्रदेश सरकार के निर्देशों के अनुसार यदि जल्द ही छोटे-बड़े कारोबारियों ने लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन नहीं लिए तो उन पर एफएसएसआई एक्ट के तहत पांच लाख का जुर्माना एवं एक साल तक की सजा की कार्रवाई हो सकती है।
--एनडी शर्मा, डीएफएसओ, रेवाड़ी।
विज्ञापन
गौरतलब है कि भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) एक्ट 2006 के बाद खाद्य पदार्थों से जुड़े सभी कारोबारियों को लिए लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन लेना अनिवार्य किया गया था। लेकिन जिले में इस करोबार से पांच हजार से जुड़े कारोबारियों के बावजूद अभी तक नाम मात्र के व्यापारियों ने ही लाइसेंस एवं रेजिस्ट्रेशन कराया है।
विज्ञापन
आठ बार के बाद अब नहीं मिलेगा अतिरिक्त समय
2006 में एक्ट बनने के बाद कईं राज्यों के व्यापारिक संगठनों के विरोध के बाद प्रदेश सरकार तीन-तीन महीने करके कार्रवाई की तारीख को आठ बार बढ़ा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार सरकार द्वारा बढ़ाई गई समय सीमा अप्रैल महीने में समाप्त हो चुकी है। केंद्र सरकार की मना के बाद हरियाणा सरकार ने भी व्यापारियों के लिए लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है।
विज्ञापन
इन यूनिटों को लाइसेंस लेेना अनिवार्य
-एफएसएसएआई एक्ट के अनुसार खाद्य पदार्थों को स्वास्थ्य के हिसाब से मानक निर्धारण करने के लिए मैन्यूफैक्चरिंग, स्टोरेज, वितरण, सेल एवं एक्सपोर्ट एवं इंपोर्ट सहित वे सभी चीजें जो लोगों द्वारा खाने-पीने में यूज की जा रही हैं। इन सभी कारोबारियों को लाइसेंस या फिर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। एक्ट के अनुसार 12 लाख तक सेल वाले कारोबारी 100 रुपये एक साल के लिए देकर लाइसेंस ले सकते हैं। वहीं 12 लाख से उपर एवं बीस करोड़ तक की सेल वाले कारोबारी दो हजार रुपये देकर एक साल के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। गौरतलब है कि 12 लाख तक लाइसेंस एवं इससे ऊपर रजिस्ट्रेशन कराने की आवश्यकता पड़ती है।
जिले में महज 300 रजिस्ट्रेशन
एक आंकड़े के अनुसार जिले में करीब साढ़े पांच हजार खाद्य पदार्थों से जुड़े कारोबारी हैं। बावजूद इसके अभी तक महज 300 कारोबारियों ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है। इसी के साथ 300 ने लाइसेंस लिए हुए हैं। अकेले शहर में ही करीब ढाई हजार खाद्य पदार्थों से जुड़े कारोबारी हैं। नियम के मुताबिक रेहड़ी से लेकर बड़े कारोबारियों तक को लाइसेंस या फिर रजिस्ट्रेशन लेने की आवश्यकता पड़ती है।
ये होंगे फायदे
स्वास्थ्य विभाग की ओर से लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन कराने के लिए ऑनलाइन सुविधा की हुई है। पंजीकरण के बाद किसी भी गड़बड़ी के होने पर व्यापारी कोर्ट में अपना पक्ष रख सकते हैं,जबकि लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन नहीं होने पर सीधे कार्रवाई होगी। स्वास्थ्य विभाग के पास डाटा होने पर व्यापारियों पर लोगों को खाद्य पदार्थों की सेफ्टी का जिम्मा बढ़ जाएगा। इसके बाद कोई भी व्यापारी केवल अपने फायदे के लिए लोगों को जहर नहीं खिला सकता,उसे मानकों का पालन करना पड़ेगा।
नमूने फेल होने पर पच्चीस लोगों के खिलाफ कार्रवाई
-जिला फूड सेफ्टी ऑफिसर एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ओर से लिए गए अनेकों सैंपल में से अभी तक केवल 25 लोगों के खिलाफ ही कार्रवाई हो पाई है। जिनमें से एडीसी की कोर्ट की ओर से एक हजार से लेकर 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया है। खाद्य पदार्थों के नमूने सब स्टैंडर्ड मिस ब्रांड पाए जाने पर एडीसी की कोर्ट द्वारा अधिकतम पांच लाख का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं अनसेफ पाए जाने पर मामला सीजीएम कोर्ट में जाएगा।
पांचों सीचएसी कर सकती हैं कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा विभाग में डीलिंग क्लर्क ने बताया कि रेवाड़ी में एफएसओ एवं डीएचओ खाद्य पदार्थ के नमूने लेकर कार्रवाई कर सकते हैं। इसी के साथ जिले की सभी पांच सीएचसी के एसएमओ भी नमूने लेकर कार्रवाई करने के लिए अधिकृत हैं।
-----------
वर्जन
जिले में हजारों की संख्या में खाद्य पदार्थों से जुड़े कारोबारी हैं। बावजूद इसके अभी तक नाम मात्र ने ही लाइसेंस लिए हैं। प्रदेश सरकार के निर्देशों के अनुसार यदि जल्द ही छोटे-बड़े कारोबारियों ने लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन नहीं लिए तो उन पर एफएसएसआई एक्ट के तहत पांच लाख का जुर्माना एवं एक साल तक की सजा की कार्रवाई हो सकती है।
--एनडी शर्मा, डीएफएसओ, रेवाड़ी।