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रेवाड़ी: चर्च और मंदिर की जमीन पर भूमाफिया की नजर, बेचने की तैयारी, एनडीसी जारी
Thu, 16 Feb 2023 11:59 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 16 Feb 2023 11:59 PM IST
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रेवाड़ी। शहर की सार्वजनिक संपत्ति पर भूमाफिया की नजरें लगी हैं। इन्हें हड़पने के नए मामलों का खुलासा हुआ है। सर्कुलर रोड स्थित चर्च की 196 गज जमीन और कालका रोड स्थित मंदिर की करीब 500 गज जमीन का अदेय प्रमाणपत्र (एनडीसी) जारी कर दिया गया। चर्च की जमीन की अनुमानित कीमत चार करोड़ और मंदिर की जमीन की कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये आंकी जा रही है। भूमाफिया का तंत्र इतना सक्रिय है कि मामला उजागर होने के बाद अधिकारी जांच का लॉलीपॉप देकर मामले को दबाने में जुटे हैं। वहीं कार्रवाई के नाम पर एनडीसी जारी करने वाले एक कर्मचारी का सात दिन पहले तबादला धारूहेड़ा कर दिया गया।
रेवाड़ी नगर परिषद में संपत्ति पहचानपत्र (प्रॉपर्टी आईडी) के सिस्टम में भूमाफिया की सेंधमारी जारी है। नियमों को ताक पर रख अधिकारियों ने चर्च व मंदिर तक की अदेय प्रमाणपत्र (एनडीसी) जारी किया और इनमें जिला नगरायुक्त (डीएमसी) की स्वीकृति तक नहीं ली गई। नियम के मुताबिक चर्च को संरक्षक कभी बेच नहीं सकता, लेकिन यहां पर व्यक्तिगत रूप से रजिस्ट्री भी कर दी गई है। इसके बाद उसका संपत्ति पहचानपत्र भी जारी कर दिया गया। रेवाड़ी नगर परिषद पर पिछले कई दिनों से एनडीसी के नाम पर भ्रष्टाचार के तमाम आरोप लगे हैं। लंबे समय से एनडीसी को लेकर नगर परिषद सुर्खियों में रहा है। इन्हीं आरोपों के चलते कुछ कर्मचारियों के जांच के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए। वहीं कुछ को उनकी कुर्सियों से हटाते में ट्रांसफर कर दिया गया था।
केस 1
रेवाड़ी शहर के सर्कुलर रोड पर पुराने समय का चर्च है। यहां पर 2015 के आसपास मिलीभगत कर पांच महिलाओं के नाम पर ऑफलाइन माध्यम से रजिस्ट्री कराई गई। इसके बाद नगर परिषद में प्रॉपर्टी आईडी के लिए आवेदन किया गया। तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी ने नियमों का हवाला देते हुए इसे रिजेक्ट कर दिया था। अब फरवरी में दोबारा एनडीसी के लिए ऑनलाइन आवेदन किया गया तो संबंधित अधिकारी ने इसकी एनडीसी जारी कर दी। सूत्रों के मुताबिक जब कुछ दिन पहले स्थानांतरित होकर ईओ रेवाड़ी आए तो उन्होंने प्रॉपर्टी आईडी को जारी कर दिया। मामला सामने आने के बाद जांच की बात कही जा रही है जबकि यह मामला 2016 से कोर्ट में विचाराधीन है।
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केस 2
रेवाड़ी शहर के कालका रोड पर एक मंदिर है। यहां भी 2015 में एक व्यक्ति ने रजिस्ट्री अपने नाम करा ली। दूसरे व्यक्ति को बेचने के लिए मिलीभगत कर एनडीसी भी जारी करा ली। ऐसे में समझा जा सकता है किस तरह से चर्च व मंदिर को बेच दिया गया। हालांकि यह मामला भी 2015 कोर्ट में चल रहा है।
धार्मिक स्थल की एनडीसी व्यक्ति विशेष के नाम पर नहीं
नियम के अनुसार चर्च हो या मंदिर इनकी एनडीसी जारी की जा सकती है, लेकिन यह किसी व्यक्ति विशेष के नाम से जारी नहीं की जा सकती है। ऐसे में सवाल यह है कि चर्च या फिर मंदिर की प्रॉपर्टी आईडी किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर कैसे बनाई जा सकती है। रेवाड़ी में चर्च व मंदिर के मामले में ये ही हुआ है।
रजिस्ट्री के लिए एनडीसी जरूरी
राजस्व विभाग के नए नियमों के मुताबिक रजिस्ट्री कराने के लिए नगर परिषद की एनडीसी अर्थात नो ड्यूज सर्टिफिकेट लेना जरूरी है। नो ड्यूज सर्टिफिकेट से पहले प्रॉपर्टी की आईडी बनवाई जाती है। नो ड्यूज सर्टिफिकेट से मतलब होता है कि संपत्ति मालिक ने डेवलपमेंट चार्ज व प्रॉपर्टी टैक्स सभी नगर परिषद में जमा करा दिया है। उसका नप में कोई भी शुल्क बकाया नहीं है। एनडीसी जारी होने के बाद आसानी से प्रॉपर्टी को बेचा जा सकता है। मंदिर व चर्च में भी ऐसा ही खेल खेला गया।
वर्जन
एनडीसी जारी होने के मामले की सूचना मिली थी। इसके बाद जांच के आदेश दिए गए हैं। जिसने भी नियमों को ताक पर रखकर एनडीसी जारी की है। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। चाहे वह कितना भी बड़ा उच्च अधिकारी क्यों न हो।
-सुभीता ढाका, नगरायुक्त रेवाड़ी।
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रेवाड़ी नगर परिषद में संपत्ति पहचानपत्र (प्रॉपर्टी आईडी) के सिस्टम में भूमाफिया की सेंधमारी जारी है। नियमों को ताक पर रख अधिकारियों ने चर्च व मंदिर तक की अदेय प्रमाणपत्र (एनडीसी) जारी किया और इनमें जिला नगरायुक्त (डीएमसी) की स्वीकृति तक नहीं ली गई। नियम के मुताबिक चर्च को संरक्षक कभी बेच नहीं सकता, लेकिन यहां पर व्यक्तिगत रूप से रजिस्ट्री भी कर दी गई है। इसके बाद उसका संपत्ति पहचानपत्र भी जारी कर दिया गया। रेवाड़ी नगर परिषद पर पिछले कई दिनों से एनडीसी के नाम पर भ्रष्टाचार के तमाम आरोप लगे हैं। लंबे समय से एनडीसी को लेकर नगर परिषद सुर्खियों में रहा है। इन्हीं आरोपों के चलते कुछ कर्मचारियों के जांच के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए। वहीं कुछ को उनकी कुर्सियों से हटाते में ट्रांसफर कर दिया गया था।
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केस 1
रेवाड़ी शहर के सर्कुलर रोड पर पुराने समय का चर्च है। यहां पर 2015 के आसपास मिलीभगत कर पांच महिलाओं के नाम पर ऑफलाइन माध्यम से रजिस्ट्री कराई गई। इसके बाद नगर परिषद में प्रॉपर्टी आईडी के लिए आवेदन किया गया। तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी ने नियमों का हवाला देते हुए इसे रिजेक्ट कर दिया था। अब फरवरी में दोबारा एनडीसी के लिए ऑनलाइन आवेदन किया गया तो संबंधित अधिकारी ने इसकी एनडीसी जारी कर दी। सूत्रों के मुताबिक जब कुछ दिन पहले स्थानांतरित होकर ईओ रेवाड़ी आए तो उन्होंने प्रॉपर्टी आईडी को जारी कर दिया। मामला सामने आने के बाद जांच की बात कही जा रही है जबकि यह मामला 2016 से कोर्ट में विचाराधीन है।
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केस 2
रेवाड़ी शहर के कालका रोड पर एक मंदिर है। यहां भी 2015 में एक व्यक्ति ने रजिस्ट्री अपने नाम करा ली। दूसरे व्यक्ति को बेचने के लिए मिलीभगत कर एनडीसी भी जारी करा ली। ऐसे में समझा जा सकता है किस तरह से चर्च व मंदिर को बेच दिया गया। हालांकि यह मामला भी 2015 कोर्ट में चल रहा है।
धार्मिक स्थल की एनडीसी व्यक्ति विशेष के नाम पर नहीं
नियम के अनुसार चर्च हो या मंदिर इनकी एनडीसी जारी की जा सकती है, लेकिन यह किसी व्यक्ति विशेष के नाम से जारी नहीं की जा सकती है। ऐसे में सवाल यह है कि चर्च या फिर मंदिर की प्रॉपर्टी आईडी किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर कैसे बनाई जा सकती है। रेवाड़ी में चर्च व मंदिर के मामले में ये ही हुआ है।
रजिस्ट्री के लिए एनडीसी जरूरी
राजस्व विभाग के नए नियमों के मुताबिक रजिस्ट्री कराने के लिए नगर परिषद की एनडीसी अर्थात नो ड्यूज सर्टिफिकेट लेना जरूरी है। नो ड्यूज सर्टिफिकेट से पहले प्रॉपर्टी की आईडी बनवाई जाती है। नो ड्यूज सर्टिफिकेट से मतलब होता है कि संपत्ति मालिक ने डेवलपमेंट चार्ज व प्रॉपर्टी टैक्स सभी नगर परिषद में जमा करा दिया है। उसका नप में कोई भी शुल्क बकाया नहीं है। एनडीसी जारी होने के बाद आसानी से प्रॉपर्टी को बेचा जा सकता है। मंदिर व चर्च में भी ऐसा ही खेल खेला गया।
वर्जन
एनडीसी जारी होने के मामले की सूचना मिली थी। इसके बाद जांच के आदेश दिए गए हैं। जिसने भी नियमों को ताक पर रखकर एनडीसी जारी की है। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। चाहे वह कितना भी बड़ा उच्च अधिकारी क्यों न हो।
-सुभीता ढाका, नगरायुक्त रेवाड़ी।