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Rewari News: कोमल की कहानी हमारा अपना परिवार प्रथम पुरस्कार के लिए चयनित
Sat, 07 Jun 2025 12:41 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 07 Jun 2025 12:41 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से आयोजित कहानी प्रतियोगिता के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। प्रतियोगिता में लड़कियों का दबदबा रहा। जैन पब्लिक स्कूल की छात्रा कोमल की कहानी हमारा अपना परिवार प्रथम पुरस्कार के लिए चुनी गई।
कहानी प्रतियोगिता की संयोजक व परिषद की अध्यक्ष श्रुति शर्मा ने बताया कि प्रतियोगिता में स्कूल, काॅलेज के विद्यार्थियों के साथ साहित्यकारों एवं सामान्य जनमानस से भी कहानियां आमंत्रित की गई थीं।
कुटुंब विषय पर आधारित कहानी की शब्द सीमा 800 से 2500 शब्द रखी गई थी। संयुक्त परिवार के साथ परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम, त्याग, सहयोग व समर्पण की भावना पर आधारित कहानी लिखनी थी। निर्णायक के रूप में परिषद के प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. रमेश चंद्र शर्मा ने कहानी के मर्म को समझकर परिणाम घोषित किए।
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विश्वकर्मा वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की छात्रा चंचल की भूलो मत मां को.. कहानी को दूसरा स्थान प्राप्त हुआ। इस कहानी में बूढ़ी मां को छोड़ विदेश में बसे बेटे की उदासीनता के कारण वृद्धाश्रम पहुंची मां की पीड़ा व्यक्त की गई है।
जैन पब्लिक स्कूल की छात्रा खुशी एवं सैनी पब्लिक स्कूल के छात्र हार्दिक की कहानी संयुक्त रूप से तृतीय और विश्वकर्मा स्कूल के छात्र प्रियांशु की कहानी को सांत्वना पुरस्कार के लिए चुना गया।
गोपाल शर्मा की कहानी पोस्टमास्टर साहब का बंगला प्रथम
साहित्यकार वर्ग में शब्द सीमा व विषय के आधार पर गोपाल शर्मा की कहानी पोस्टमास्टर साहब का बंगला को प्रथम घोषित किया गया। इस कहानी में संयुक्त परिवार की ओर से संस्कृति संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण एवं जीव संरक्षण की त्रिवेणी दिखाई दी।
वहीं परिवार बिखरने पर वीरान बंगले का दर्द बयां हुआ है। निर्णायक प्रो. शर्मा का मानना है कि मुंशी प्रेमचंद की कहानियां ही कहानी विधा की कसौटी हैं। आज मूल्य आधारित कहानियों का अभाव है। कहानी लेखन के प्रति भी उदासीनता है।
उन्होंने बताया कि विजेताओं को परिषद् की ओर से प्रमाणपत्र व पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
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रेवाड़ी। अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से आयोजित कहानी प्रतियोगिता के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। प्रतियोगिता में लड़कियों का दबदबा रहा। जैन पब्लिक स्कूल की छात्रा कोमल की कहानी हमारा अपना परिवार प्रथम पुरस्कार के लिए चुनी गई।
कहानी प्रतियोगिता की संयोजक व परिषद की अध्यक्ष श्रुति शर्मा ने बताया कि प्रतियोगिता में स्कूल, काॅलेज के विद्यार्थियों के साथ साहित्यकारों एवं सामान्य जनमानस से भी कहानियां आमंत्रित की गई थीं।
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कुटुंब विषय पर आधारित कहानी की शब्द सीमा 800 से 2500 शब्द रखी गई थी। संयुक्त परिवार के साथ परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम, त्याग, सहयोग व समर्पण की भावना पर आधारित कहानी लिखनी थी। निर्णायक के रूप में परिषद के प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. रमेश चंद्र शर्मा ने कहानी के मर्म को समझकर परिणाम घोषित किए।
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विश्वकर्मा वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की छात्रा चंचल की भूलो मत मां को.. कहानी को दूसरा स्थान प्राप्त हुआ। इस कहानी में बूढ़ी मां को छोड़ विदेश में बसे बेटे की उदासीनता के कारण वृद्धाश्रम पहुंची मां की पीड़ा व्यक्त की गई है।
जैन पब्लिक स्कूल की छात्रा खुशी एवं सैनी पब्लिक स्कूल के छात्र हार्दिक की कहानी संयुक्त रूप से तृतीय और विश्वकर्मा स्कूल के छात्र प्रियांशु की कहानी को सांत्वना पुरस्कार के लिए चुना गया।
गोपाल शर्मा की कहानी पोस्टमास्टर साहब का बंगला प्रथम
साहित्यकार वर्ग में शब्द सीमा व विषय के आधार पर गोपाल शर्मा की कहानी पोस्टमास्टर साहब का बंगला को प्रथम घोषित किया गया। इस कहानी में संयुक्त परिवार की ओर से संस्कृति संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण एवं जीव संरक्षण की त्रिवेणी दिखाई दी।
वहीं परिवार बिखरने पर वीरान बंगले का दर्द बयां हुआ है। निर्णायक प्रो. शर्मा का मानना है कि मुंशी प्रेमचंद की कहानियां ही कहानी विधा की कसौटी हैं। आज मूल्य आधारित कहानियों का अभाव है। कहानी लेखन के प्रति भी उदासीनता है।
उन्होंने बताया कि विजेताओं को परिषद् की ओर से प्रमाणपत्र व पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।