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पड़ताल: डिजिटल के दौर में स्कूलों में डिजिटल बोर्ड की खल रही कमी
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रेवाड़ी। डिजिटल के दौर में जिले के राजकीय स्कूलों में डिजिटल बोर्ड की कमी खल रही है। ऐसे करीब 50 से अधिक स्कूल हैं, जिनमें डिजिटल बोर्ड की कमी है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय झाल व लूखी, प्राथमिक पाठशाला नाहड़ व झाडोदा, मिडल स्कूल भड़ंगीं व मुमताजपुर, हाई स्कूल कोहारड, नया गांव मिडल स्कूल, सहादत्तनगर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय व प्राथमिक विद्यालय, गुगोढ़ वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, भाकली वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, जुड्डी प्राथमिक विद्यालय, गुजरवास प्राथमिक विद्यालय में डिजिटल बोर्ड की कमी है। कुछ स्कूल तो ऐसे हैं जिसमें एक या दो डिजिटल बोर्ड हैं, मगर वह पर्याप्त नहीं है। डिजिटल बोर्ड हर क्लासरूम में होना जरूरी है, ताकि बच्चों को पढ़ने में किसी प्रकार की समस्या ना आए। खुद स्कूल में पढ़ने वाले शिक्षक भी चाहते हैं कि हर स्कूलों में डिजिटल बोर्ड लगाया जाए और बच्चे आधुनिकता से जुड़ सकें। लंबे प्रयास के बाद भी हर स्कूलों में डिजिटल बोर्ड नहीं पहुंच पाए हैं। फिलहाल अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल बोर्ड के लिए प्रक्रिया चल रही है, जिन स्कूलों में डिजिटल बोर्ड की कमी है या जहां पर डिजिटल बोर्ड नहीं है जल्द वहां पर व्यवस्था बनवा दी जाएगी।
डिजिटल के दौर में बोर्ड की नहीं होनी चाहिए कमी
अभिभावकों ने बताया कि डिजिटल के दौर में बोर्ड की कमी होना काफी गलत है। बोर्ड होंगे तो विद्यार्थी अच्छे से पढ़ सकेंगे। अगर स्कूल में एक-दो बोर्ड भी हैं तो वह केवल खानापूर्ति करने जैसा है। हर क्लास रूम में बोर्ड होना जरूरी है। मौजूदा समय डिजिटल का है, इस वजह से डिजिटल रूप से सशक्त होना भी विद्यार्थियों को काफी जरूरी है।
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जहां पर डिजिटल बोर्ड की कमी है, उसे दूर किया जाएगा। जैसी डिजिटल बोर्ड की डिमांड आएगी, उस हिसाब से कमी को पूरा किया जाएगा।
सुभाष चंद, जिला शिक्षा अधिकारी
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डिजिटल के दौर में बोर्ड की नहीं होनी चाहिए कमी
अभिभावकों ने बताया कि डिजिटल के दौर में बोर्ड की कमी होना काफी गलत है। बोर्ड होंगे तो विद्यार्थी अच्छे से पढ़ सकेंगे। अगर स्कूल में एक-दो बोर्ड भी हैं तो वह केवल खानापूर्ति करने जैसा है। हर क्लास रूम में बोर्ड होना जरूरी है। मौजूदा समय डिजिटल का है, इस वजह से डिजिटल रूप से सशक्त होना भी विद्यार्थियों को काफी जरूरी है।
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जहां पर डिजिटल बोर्ड की कमी है, उसे दूर किया जाएगा। जैसी डिजिटल बोर्ड की डिमांड आएगी, उस हिसाब से कमी को पूरा किया जाएगा।
सुभाष चंद, जिला शिक्षा अधिकारी