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पॉक्सो के बारे में दी जानकारी : डॉ. रेनू सोलखे
Sat, 18 Jul 2026 11:55 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 18 Jul 2026 11:55 PM IST
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कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेते लोग। स्रोत : प्रशासन
रेवाड़ी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से पोक्सो व किशोर न्याय अधिनियम जागरूकता कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव डॉ. रेनू सोलखे ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा सभी हितधारकों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इन कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन तभी संभव है, जब संबंधित अधिकारी इनके प्रावधानों और अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह अवगत हों।
उन्होंने प्रतिभागियों से बाल हितैषी दृष्टिकोण अपनाने और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का आह्वान किया। प्रथम सत्र में उप मुख्य लीगल एड डिफेंस काउंसिल यशपाल शर्मा और अधिवक्ता विवेक तंवर ने पोक्सो अधिनियम के प्रावधानों, बाल यौन अपराधों की पहचान, शिकायत प्रक्रिया, पीड़ित बच्चों के अधिकार और जांच प्रक्रिया की जानकारी दी।
दूसरे सत्र में किशोर न्याय बोर्ड की प्रधान न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अर्चना ने किशोर न्याय अधिनियम के तहत कानून से संघर्षरत बच्चों और देखरेख की आवश्यकता वाले बच्चों से संबंधित प्रक्रियाओं, पुनर्वास और विभिन्न संस्थाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला।
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कार्यशाला में अधिकारियों ने कानूनों के क्रियान्वयन में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने केस आधारित उदाहरणों के माध्यम से प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान किया। डॉ. रेनू सोलखे ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम बच्चों को त्वरित, संवेदनशील और प्रभावी न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव डॉ. रेनू सोलखे ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा सभी हितधारकों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इन कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन तभी संभव है, जब संबंधित अधिकारी इनके प्रावधानों और अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह अवगत हों।
उन्होंने प्रतिभागियों से बाल हितैषी दृष्टिकोण अपनाने और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का आह्वान किया। प्रथम सत्र में उप मुख्य लीगल एड डिफेंस काउंसिल यशपाल शर्मा और अधिवक्ता विवेक तंवर ने पोक्सो अधिनियम के प्रावधानों, बाल यौन अपराधों की पहचान, शिकायत प्रक्रिया, पीड़ित बच्चों के अधिकार और जांच प्रक्रिया की जानकारी दी।
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दूसरे सत्र में किशोर न्याय बोर्ड की प्रधान न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अर्चना ने किशोर न्याय अधिनियम के तहत कानून से संघर्षरत बच्चों और देखरेख की आवश्यकता वाले बच्चों से संबंधित प्रक्रियाओं, पुनर्वास और विभिन्न संस्थाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला।
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कार्यशाला में अधिकारियों ने कानूनों के क्रियान्वयन में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने केस आधारित उदाहरणों के माध्यम से प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान किया। डॉ. रेनू सोलखे ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम बच्चों को त्वरित, संवेदनशील और प्रभावी न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।