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भगवान के लिए कार्य किए जाएं तो व्यक्ति की बुद्धि होती है शुद्ध : आचार्य प्रद्युम्न
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फोटो : 21आर्य समाज मंदिर में पहुंचे समाज के लोग। स्रोत : समाज
रेवाड़ी। सब्जी मंडी स्थित आर्य समाज मंदिर में वार्षिक उत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आचार्य प्रद्युम्न मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक पथ पर चलने का संदेश दिया।
आचार्य प्रद्युम्न ने मन के नियंत्रण और एकाग्रता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि व्यक्ति की सभी बाधाओं का मूल कारण अहंकार है। महाभारत के युधिष्ठिर-यक्ष संवाद का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि अहंकार को त्याग कर ही मनुष्य भगवान और समाज का प्रिय बनता है।
उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रार्थना और सभी कार्यों को भगवान को अर्पित करने की प्रेरणा दी। उनके अनुसार, भोजन, भजन, दान, व्यापार और गो सेवा जैसे सभी कार्य जब भगवान के लिए किए जाएं तो व्यक्ति की बुद्धि शुद्ध होती है और कर्मों में पवित्रता आती है।
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कार्यक्रम में आचार्य रामतीर्थ, आचार्य विजयपाल, आचार्य सोमदेव स्वामी समर्पणानंद, महात्मा यश देव, रामकिशन शास्त्री के प्रवचन और भजन सत्संग आयोजित हुए। धर्मपाल, जयप्रकाश, लोकेश, सुरजीत, नरोत्तम, सतीश, मीरा, प्रभु दयाल, आर्य भरपूर सहित अनेक स्वयंसेवकों ने सेवा में योगदान दिया।
आचार्य प्रद्युम्न ने लोगों को यह भी प्रेरित किया कि कानों और आंखों से केवल भली चीजें ग्रहण करें और जीवन में अच्छाई के मार्ग पर चलें। सुंदर भजन और प्रवचन के माध्यम से यह कार्यक्रम आध्यात्मिक अनुभव और भक्ति भाव से परिपूर्ण रहा।
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आचार्य प्रद्युम्न ने मन के नियंत्रण और एकाग्रता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि व्यक्ति की सभी बाधाओं का मूल कारण अहंकार है। महाभारत के युधिष्ठिर-यक्ष संवाद का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि अहंकार को त्याग कर ही मनुष्य भगवान और समाज का प्रिय बनता है।
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उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रार्थना और सभी कार्यों को भगवान को अर्पित करने की प्रेरणा दी। उनके अनुसार, भोजन, भजन, दान, व्यापार और गो सेवा जैसे सभी कार्य जब भगवान के लिए किए जाएं तो व्यक्ति की बुद्धि शुद्ध होती है और कर्मों में पवित्रता आती है।
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कार्यक्रम में आचार्य रामतीर्थ, आचार्य विजयपाल, आचार्य सोमदेव स्वामी समर्पणानंद, महात्मा यश देव, रामकिशन शास्त्री के प्रवचन और भजन सत्संग आयोजित हुए। धर्मपाल, जयप्रकाश, लोकेश, सुरजीत, नरोत्तम, सतीश, मीरा, प्रभु दयाल, आर्य भरपूर सहित अनेक स्वयंसेवकों ने सेवा में योगदान दिया।
आचार्य प्रद्युम्न ने लोगों को यह भी प्रेरित किया कि कानों और आंखों से केवल भली चीजें ग्रहण करें और जीवन में अच्छाई के मार्ग पर चलें। सुंदर भजन और प्रवचन के माध्यम से यह कार्यक्रम आध्यात्मिक अनुभव और भक्ति भाव से परिपूर्ण रहा।