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Rewari News: मुआवजा नहीं मिला तो हाईवे की जमीन पर कब्जा लेने की चेतावनी, डिवाइडर पर लगाया बोर्ड

Thu, 12 Mar 2026 11:38 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 12 Mar 2026 11:38 PM IST
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If compensation is not received, a board is placed on the divider warning of taking over the highway land.
एनएच 11 के डिवाइडर पर लगाया गया चेतावनी बोर्ड। स्रोत : वीडियो ग्रैब
रेवाड़ी। शहर से गुजर रहे एनएच-11 (रेवाड़ी-नारनौल) हाईवे पर जमीन अधिग्रहण को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। जमीन मालिक ने मुआवजा नहीं मिलने पर हाईवे के लिए अधिग्रहित की गई जमीन पर दो दिन में कब्जा लेने की चेतावनी दी है। इसके लिए हाईवे के डिवाइडर पर सार्वजनिक सूचना का बोर्ड लगाकर विभाग और सरकार तक अपना संदेश पहुंचाया है।
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गांव पिथड़ावास निवासी प्रताप सिंह यादव ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2015 में खोरी के पास सीएलयू लेकर इंडियन ऑयल का पेट्रोल पंप स्थापित किया था। पांच वर्ष पहले एनएचएआई ने एनएच-11 के निर्माण के लिए उनके पेट्रोल पंप की जमीन का अधिग्रहण कर लिया।
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उस समय विभाग ने जमीन को कॉमर्शियल की बजाय कृषि भूमि मानते हुए 1225 वर्ग मीटर (करीब 1465 वर्ग गज) जमीन का मुआवजा 23 लाख 49 हजार 373 रुपये तय किया था।
प्रताप सिंह यादव ने इस मुआवजे को कम बताते हुए कोर्ट में चुनौती दी। उनका आरोप है कि मामला कोर्ट में लंबित होने के बावजूद जुलाई 2022 में पेट्रोल पंप को तोड़कर जमीन पर कब्जा ले लिया गया। इसके बाद उन्होंने न्याय के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखी।
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उन्होंने बताया कि आर्बिट्रेटर और उपायुक्त ने 11 फरवरी, 1 जुलाई और 6 अगस्त 2025 को दिए गए आदेशों में जमीन को वाणिज्यिक श्रेणी का मानते हुए उसी आधार पर ब्याज सहित मुआवजा देने के निर्देश दिए थे।

हाल ही में अदालत ने 2 मार्च को आर्बिट्रेटर के फैसले पर अपनी सहमति की मुहर लगा दी। इसके बाद भी मुआवजा जारी नहीं होने से नाराज प्रताप सिंह यादव ने हाईवे के डिवाइडर पर बोर्ड लगाकर चेतावनी दी है कि यदि दो दिन के भीतर मुआवजा नहीं दिया गया तो वे अधिग्रहित 1225 वर्ग मीटर जमीन पर दोबारा कब्जा ले लेंगे।
प्रताप सिंह का कहना है कि पेट्रोल पंप और वाणिज्यिक भूमि के अधिग्रहण से उन्हें करीब 1 करोड़ 59 लाख 65 हजार 966 रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।
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