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Rewari News: सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं होली गायन

Thu, 27 Feb 2025 12:02 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 27 Feb 2025 12:02 AM IST
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Holi singing is an invaluable cultural heritage.
गांव नठेड़ा के शिव मंदिर परिसर में आयोजित होली गायन कार्यक्रम। स्रोत : मंदिर - फोटो : औद्योगिक क्षेत्र की एक फैक्टरी के बाद जांच के दौरान मौजूद लोग।
कोसली। गांव नठेड़ा के शिव मंदिर परिसर में महाशिवरात्रि पर्व के पावन अवसर पर होली गायन कार्यक्रम की शुरुआत हुई। यह कार्यक्रम कोसलिया गोत्र के गांव नठेड़ा से प्रारंभ होकर विभिन्न गांवों से गुजरते हुए धुलेंडी के दिन कोसली स्थित बाबा मुक्तेश्वर पुरी धाम पर संपन्न होगा। बाबा मुक्तेश्वर पुरी धाम न केवल कोसलिया गोत्र बल्कि पूरे कोसली क्षेत्र के श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का केंद्र है।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ भाजपा नेता वीर कुमार यादव ने युवा गायकों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि होली गायन के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों पर प्रहार कर जागरूकता उत्पन्न की जाती है। साथ ही यह सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि होली का यह राग-रंग का पर्व वसंत का संदेशवाहक भी है। राग अर्थात संगीत और रंग, दोनों ही इसके प्रमुख तत्व हैं, जो प्रकृति के यौवन के साथ अपने चरम उत्कर्ष पर होते हैं। फाल्गुन माह में मनाए जाने के कारण इसे फाल्गुनी पर्व भी कहा जाता है। होली का उत्सव वसंत पंचमी से ही आरंभ हो जाता है, जब पहली बार गुलाल उड़ाया जाता है और फाग व धमार गायन शुरू होता है। वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि इस समय खेतों में सरसों के पीले फूल खिल उठते हैं, गेहूं की बालियाँ हवा में लहराने लगती हैं, और बाग-बगीचों में रंग-बिरंगे फूलों की छटा बिखर जाती है। प्रकृति के इस उल्लास से बच्चे, बूढ़े और युवा सभी आनंदित हो जाते हैं। लोग ढोलक, झांझ, मंजीरे की धुन पर नृत्य और संगीत में मग्न हो जाते हैं और चारों ओर रंगों की फुहार छा जाती है।
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उन्होंने कहा कि होली के अवसर पर पारंपरिक व्यंजनों का भी विशेष महत्व है। गुझिया, जो मावा (खोया), मैदा और मेवाओं से भरपूर होती है, इस पर्व का मुख्य पकवान है। इसके खाने और खिलाने की हमारे कोसली क्षेत्र में बड़ी परंपरा है। शाम को लोग नए कपड़े पहनकर एक-दूसरे के घर होली मिलने जाते हैं और आपसी प्रेम व सौहार्द का परिचय देते हैं। इस अवसर पर मंदिर कमेटी द्वारा गायन टोलियों को नगद राशि व भेल्ली देकर सम्मानित किया गया।
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इस होली गायन कार्यक्रम में विभिन्न गांवों की गायन टोलियों ने भाग लिया, जिनमें मुख्य रूप से खुशपुरा, कोसली, कान्हड़वास, दड़ौली, जाहिदपुर निशान, जुड्डी, झाड़ौदा, कोटिया, रामपुरी, सुरेहली, भूरथला, भड़प, और नठेड़ा की टीमें शामिल रहीं। इस अवसर पर महेंद्रगढ़ के विधायक कंवर सिंह, जिला पार्षद जीवन हितैषी, ब्लॉक समिति सदस्य लुकस, होशियार और बड़ी संख्या में ग्रामीण श्रद्धालु उपस्थित रहे। होली गायन की यह यात्रा, धुलेंडी पर बाबा मुक्तेश्वर पुरी धाम में समापन के साथ अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंचेगी।

गांव नठेड़ा के शिव मंदिर परिसर में आयोजित होली गायन कार्यक्रम। स्रोत : मंदिर

गांव नठेड़ा के शिव मंदिर परिसर में आयोजित होली गायन कार्यक्रम। स्रोत : मंदिर- फोटो : औद्योगिक क्षेत्र की एक फैक्टरी के बाद जांच के दौरान मौजूद लोग।

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