{"_id":"573dfddb4f1c1b5758ac7477","slug":"hemlata-become-heart-specilist-for-help-of-poor","type":"story","status":"publish","title_hn":"हार्ट स्पेशलिस्ट बनकर करना चाहती हैं गरीबों की मदद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हार्ट स्पेशलिस्ट बनकर करना चाहती हैं गरीबों की मदद
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Fri, 20 May 2016 12:51 AM IST
विज्ञापन
बारहवीं में अव्वल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में 484 अंक हासिल कर मसीत गांव निवासी रेवाड़ी के नांगलमूंदी स्थितभारतीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा हेमलता ने प्रदेश में चौथा स्थान हासिल किया है। वह अब कोटा से मेडिकल की तैयारी कर हार्ट स्पेशलिस्ट बनना चाहती है। उसका डाक्टर बनने का उद्देश्य गरीबों को सस्ता और सुलभ इलाज देकर उनकी सेवा करना है। हेमलता ने ये सफलता अपनी दादी की प्रेरणा और कड़ी मेहनत से हासिल की है। हेमलता की दादी इलायची देवी पोती को सफेद एप्रेन पहने डॉक्टर के रूप में देखना चाहती हैं।
खून में है सफलता के गुण
हेमलता के पिता महेंद्र सिंह सरकारी स्कूल में साइंस के अध्यापक हैं। वहीं मां दुर्गा देवी आंगनबाड़ी वर्कर हैं और 2015 में बेस्ट वर्कर के तौर पर स्टेट में प्रथम आईं और सम्मानित भी हुई थीं। भारतीय स्कूल के प्रिंसिपल कमल सिंह यादव भी हेमलता की सफलता को दूसरे स्टूडेंट्स के लिए सीख मानते हैं, वहीं खुद हेमलता अपनी सफलता का श्रेय दादी के अलावा स्कूल प्रशासन, स्टाफ और माता-पिता को देती हैं।
जितना पढ़ो, मन से पढ़ो
किरन बेदी को आइडल सेलीब्रेटी मानने वाली हेमलता कहती हैं कि वह दूसरों की तरह आधे-आधे दिन तक पढ़ाई नहीं करती हैं। बल्कि दिन में 8-9 घंटे में ही कॉलेज स्टडी के अलावा रेगुलर होमवर्क और सेल्फ स्टडी को ही पढ़ाई के लिए ठीक मानती हैं। हेमलता कहती हैं कि सफलता के लिए जरूरी है कि जितना पढ़ो मन से पढ़ो। हेमलता ने दसवीं कक्षा भी 98 फीसदी अंकों के साथ उत्तीर्ण की थी।
विज्ञापन
फिर लिखी सफलता की इबारत
भारतीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल पिछले दो साल से स्टेट टॉपर नहीं दे पाया था। इस बात को लेकर स्कूल के प्रबंधक और प्रिंसिपल कमल सिंह यादव खासा परेशान थे। इस बार हेमलता के टॉप फाइव में शुमार होने के बाद स्कूल एक बार फिर पटरी पर लौटा है। बता दें कि इससे पहले कई बार भारतीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल ने स्टेट टॉपर दिये हैं। यही नहीं एक बार तो स्टेट में 100 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले पांच स्टूडेंट इसी स्कूल के ही थे।
विज्ञापन
खून में है सफलता के गुण
हेमलता के पिता महेंद्र सिंह सरकारी स्कूल में साइंस के अध्यापक हैं। वहीं मां दुर्गा देवी आंगनबाड़ी वर्कर हैं और 2015 में बेस्ट वर्कर के तौर पर स्टेट में प्रथम आईं और सम्मानित भी हुई थीं। भारतीय स्कूल के प्रिंसिपल कमल सिंह यादव भी हेमलता की सफलता को दूसरे स्टूडेंट्स के लिए सीख मानते हैं, वहीं खुद हेमलता अपनी सफलता का श्रेय दादी के अलावा स्कूल प्रशासन, स्टाफ और माता-पिता को देती हैं।
विज्ञापन
जितना पढ़ो, मन से पढ़ो
किरन बेदी को आइडल सेलीब्रेटी मानने वाली हेमलता कहती हैं कि वह दूसरों की तरह आधे-आधे दिन तक पढ़ाई नहीं करती हैं। बल्कि दिन में 8-9 घंटे में ही कॉलेज स्टडी के अलावा रेगुलर होमवर्क और सेल्फ स्टडी को ही पढ़ाई के लिए ठीक मानती हैं। हेमलता कहती हैं कि सफलता के लिए जरूरी है कि जितना पढ़ो मन से पढ़ो। हेमलता ने दसवीं कक्षा भी 98 फीसदी अंकों के साथ उत्तीर्ण की थी।
विज्ञापन
फिर लिखी सफलता की इबारत
भारतीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल पिछले दो साल से स्टेट टॉपर नहीं दे पाया था। इस बात को लेकर स्कूल के प्रबंधक और प्रिंसिपल कमल सिंह यादव खासा परेशान थे। इस बार हेमलता के टॉप फाइव में शुमार होने के बाद स्कूल एक बार फिर पटरी पर लौटा है। बता दें कि इससे पहले कई बार भारतीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल ने स्टेट टॉपर दिये हैं। यही नहीं एक बार तो स्टेट में 100 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले पांच स्टूडेंट इसी स्कूल के ही थे।