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Rewari News: जय श्रीराम बोलते ही ट्रेन से कर लिया था गिरफ्तार
Thu, 01 Aug 2024 03:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 01 Aug 2024 03:00 AM IST
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रेवाड़ी। रत्नेश बंसल।
रेवाड़ी। अयोध्या में भव्य राम मंदिर की जो परिकल्पना रामभक्तों ने की थी, वह अब साकार हो रही है। राममंदिर आंदोलन में अपना अहम योगदान देने वाले लोगों के मस्तिष्क पटल पर सालों पूर्व की स्मृतियां फिर से सामने आ रही हैं। शहर के प्रतिष्ठित व्यापारी व भाजपा के वरिष्ठ नेता रत्नेश बंसल आज भी 33 साल पूर्व की बातों को याद करके रोमांचित हो उठते हैं।
रत्नेश बंसल ने बताया कि अयोध्या में अक्तूबर 1990 में कारसेवा शुरू हो चुकी थी। देशभर से कारसेवक सेवा के लिए जा रहे थे। रेवाड़ी से मैं अपने साथियों के साथ ट्रेन से अयोध्या जा रहा था। भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष स्व. ओमप्रकाश ग्रोवर, रामकिशन गुप्ता, दुष्यंत कुमार, एडवोकेट मांगेलाल रस्तोगी, मनोहर लाल सैनी आदि पर आधारित मेरी टीम 30 नवंबर 1990 को उत्तर प्रदेश के उन्नाव पहुंची। इसकी सूचना उत्तर प्रदेश पुलिस को मिल चुकी थी कि इस ट्रेन में बड़ी तादाद में कारसेवक आ रहे हैं। उन्नाव के निकट ट्रेन को रुकवा लिया गया। पुलिस टीम ने ट्रेन की बारीकी से तलाशी ली पर कोई पकड़ में नहीं आया। संवाद
ट्रेन चलने लगी तो लगा दिया जयकारा
तलाशी पूरी होने के बाद ट्रेन जब चलने लगी तो मेरे साथ बैठे एक नौजवान ने जय श्रीराम का जयकारा लगा दिया। वह भी कारसेवा के लिए जा रहा था। मैं भी जोर-जोर से जयकारे लगाने शुरू कर दिए। आवाज सुनते ही पुलिस फिर ट्रेन में आ गई और सभी कारसेवकों को गिरफ्तार कर लिया। उन्नाव जेल पूरी तरह से भर चुकी थी, इसलिए हम लोगों को एक कॉलेज में अस्थायी तौर पर बनाई गई जेल में भेज दिया गया। यहां न पीने का पानी था और न बिछाने के लिए दरी। सभी रामभक्त अस्थायी जेल में धरने पर बैठ गए। इसके बाद वहां के डीएम व पुलिस अधिकारी मौके पर आए और पिस्टल दिखाकर हमें डराने की कोशिश की, लेकिन हमारी मांगों को उन्हें मानना पड़ा। पानी और दरी का इंतजाम किया गया। वहां मौजूद कर्मचारियों के साथ बाजार जाकर हम लोग ही खाने का सामान लेकर आए और अस्थायी जेल में ही खाना बनाकर हम लोग खाते थे।
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6 दिसंबर को छोड़ा तो मांगा प्रमाणपत्र
रत्नेश के मुताबिक 6 दिसंबर 1990 को हम लोगों को जेल से रिहा कर दिया गया। इस पर कहा कि 7 दिन तक गिरफ्तार करके रखा गया है, इसका प्रमाण पत्र दिया जाए। हमें वहां के प्रशासन की तरफ से प्रमाण पत्र दिया गया, जिसमें कब से कब तक जेल में रखा गया, इसका पूरा उल्लेख किया गया है। रत्नेश बंसल ने कहा कि मैंने जो सपना 33 साल पहले देखा था वह आज फलीभूत हो रहा है। इससे बड़ी खुशी की बात क्या होगी।
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रत्नेश बंसल ने बताया कि अयोध्या में अक्तूबर 1990 में कारसेवा शुरू हो चुकी थी। देशभर से कारसेवक सेवा के लिए जा रहे थे। रेवाड़ी से मैं अपने साथियों के साथ ट्रेन से अयोध्या जा रहा था। भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष स्व. ओमप्रकाश ग्रोवर, रामकिशन गुप्ता, दुष्यंत कुमार, एडवोकेट मांगेलाल रस्तोगी, मनोहर लाल सैनी आदि पर आधारित मेरी टीम 30 नवंबर 1990 को उत्तर प्रदेश के उन्नाव पहुंची। इसकी सूचना उत्तर प्रदेश पुलिस को मिल चुकी थी कि इस ट्रेन में बड़ी तादाद में कारसेवक आ रहे हैं। उन्नाव के निकट ट्रेन को रुकवा लिया गया। पुलिस टीम ने ट्रेन की बारीकी से तलाशी ली पर कोई पकड़ में नहीं आया। संवाद
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ट्रेन चलने लगी तो लगा दिया जयकारा
तलाशी पूरी होने के बाद ट्रेन जब चलने लगी तो मेरे साथ बैठे एक नौजवान ने जय श्रीराम का जयकारा लगा दिया। वह भी कारसेवा के लिए जा रहा था। मैं भी जोर-जोर से जयकारे लगाने शुरू कर दिए। आवाज सुनते ही पुलिस फिर ट्रेन में आ गई और सभी कारसेवकों को गिरफ्तार कर लिया। उन्नाव जेल पूरी तरह से भर चुकी थी, इसलिए हम लोगों को एक कॉलेज में अस्थायी तौर पर बनाई गई जेल में भेज दिया गया। यहां न पीने का पानी था और न बिछाने के लिए दरी। सभी रामभक्त अस्थायी जेल में धरने पर बैठ गए। इसके बाद वहां के डीएम व पुलिस अधिकारी मौके पर आए और पिस्टल दिखाकर हमें डराने की कोशिश की, लेकिन हमारी मांगों को उन्हें मानना पड़ा। पानी और दरी का इंतजाम किया गया। वहां मौजूद कर्मचारियों के साथ बाजार जाकर हम लोग ही खाने का सामान लेकर आए और अस्थायी जेल में ही खाना बनाकर हम लोग खाते थे।
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6 दिसंबर को छोड़ा तो मांगा प्रमाणपत्र
रत्नेश के मुताबिक 6 दिसंबर 1990 को हम लोगों को जेल से रिहा कर दिया गया। इस पर कहा कि 7 दिन तक गिरफ्तार करके रखा गया है, इसका प्रमाण पत्र दिया जाए। हमें वहां के प्रशासन की तरफ से प्रमाण पत्र दिया गया, जिसमें कब से कब तक जेल में रखा गया, इसका पूरा उल्लेख किया गया है। रत्नेश बंसल ने कहा कि मैंने जो सपना 33 साल पहले देखा था वह आज फलीभूत हो रहा है। इससे बड़ी खुशी की बात क्या होगी।

रेवाड़ी। रत्नेश बंसल।

रेवाड़ी। रत्नेश बंसल।

रेवाड़ी। रत्नेश बंसल।